बौंसी मेला को लेकर तैयारियां जोरों पर, लोक कला से सजा महोत्सव मंच व प्रवेश द्वार

Published by :SHUBHASH BAIDYA
Published at :12 Jan 2026 7:30 PM (IST)
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बौंसी मेला को लेकर तैयारियां जोरों पर, लोक कला से सजा महोत्सव मंच व प्रवेश द्वार

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बौंसी मेला के आयोजन को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी हैं. मेले के मुख्य आकर्षण के रूप में बनाये गये महोत्सव मंच को सोमवार की देर रात पूरी तरह तैयार कर लिया गया है.

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धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, सांस्कृतिक एकता व लोक परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक भी है बौंसी मेला बौंसी. बौंसी मेला के आयोजन को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी हैं. मेले के मुख्य आकर्षण के रूप में बनाये गये महोत्सव मंच को सोमवार की देर रात पूरी तरह तैयार कर लिया गया है. वहीं मेले का प्रवेश द्वार और मंच को पारंपरिक मंजूषा और मधुबनी पेंटिंग से सजाया गया है. लोक कला की इस अनूठी सजावट ने पूरे मेला क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया है. प्रवेश द्वार पर उकेरी गयी मंजूषा और मधुबनी पेंटिंग बिहार की समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शा रही हैं. रंग-बिरंगे चित्र, पारंपरिक आकृतियां और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रसंग मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पहली नजर में ही आकर्षित कर रहे हैं. महोत्सव मंच पर मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोक नृत्य, लोक गीत, भजन-कीर्तन और अन्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जायेगा. अग्रवाल इवेंट के प्रतिनिधि मनीष अग्रवाल के अनुसार, मंच को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, ताकि कलाकारों और दर्शकों दोनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. मंच के चारों ओर आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था रहेगी, जो रात के समय मेले की शोभा को और बढ़ायेगी. प्रशासन की ओर से सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और यातायात व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पर्याप्त संख्या सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जा रही है. साथ ही, मेले में आने वाले लोगों के लिए जगह-जगह दिशा सूचक बोर्ड के अलावे महोत्सव मंच के सामने प्रशासन के द्वारा कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है जहां से मेले की हर गति विधि पर नजर रखी जायेगी. एसडीओ राजकुमार ने बताया कि बौंसी मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और लोक परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक भी है. इस बार लोक कला के माध्यम से बिहार की पहचान को और मजबूती से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है. कुल मिलाकर, महोत्सव मंच और कलात्मक प्रवेश द्वार के साथ बौंसी मेला इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, संस्कृति और कला का संगम साबित होने जा रहा है.

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