पंचायत चुनाव: आरक्षण-परिसीमन की अंतिम सूची से पहले तेज हुई सरगर्मी, पंजवारा में संभावित प्रत्याशी सक्रिय

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पंचायत भवन.

Panchayat Election 2026: आरक्षण और परिसीमन की अंतिम सूची जारी होने से पहले ही पंजवारा क्षेत्र में पंचायत चुनाव की हलचल तेज हो गई है और संभावित प्रत्याशी जनसंपर्क अभियान में जुट गए हैं.

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पंजवारा बांका से गौरव कश्यप के रिपोर्ट

Panchayat Election 2026: बिहार पंचायत चुनाव की आहट अब गांवों तक साफ सुनाई देने लगी है. बांका जिले के पंजवारा क्षेत्र में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है. कोई खेलकूद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर लोगों के बीच पहुंच रहा है तो कोई धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है. हालांकि चुनावी समीकरण की असली तस्वीर आरक्षण और परिसीमन की अंतिम सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी.

दो कार्यकाल से एससी आरक्षण ने बदला था चुनावी समीकरण

पंजवारा पंचायत में पिछले दो चुनावों से मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और सरपंच का पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित रहा है. इसके कारण अन्य वर्गों के कई इच्छुक उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरने से वंचित रह गए थे.

इस बार चक्रानुक्रम प्रणाली के तहत आरक्षण की श्रेणी में बदलाव की संभावना जताई जा रही है. यही वजह है कि सामान्य, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के संभावित उम्मीदवार भी सक्रिय होकर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गए हैं.

सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में बढ़ी दावेदारों की मौजूदगी

चुनावी सरगर्मी के बीच संभावित प्रत्याशी गांवों में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं. कई दावेदार गांव-गांव जाकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और जनसंपर्क अभियान के जरिए अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

कुछ लोग सामाजिक सहयोग और जनहित के कार्यों के माध्यम से भी मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.

Panchayat Election 2026: खुलकर दावेदारी से बच रहे संभावित उम्मीदवार

क्षेत्र में सक्रियता बढ़ने के बावजूद अधिकांश संभावित उम्मीदवार फिलहाल खुलकर चुनाव लड़ने की घोषणा करने से बच रहे हैं. उनकी नजर सरकार द्वारा जारी की जाने वाली आरक्षण सूची और परिसीमन की अंतिम अधिसूचना पर टिकी हुई है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम सूची आने के बाद ही उम्मीदवार अपने चुनावी पत्ते खोलेंगे.

परिसीमन की अंतिम अधिसूचना पर टिकी हैं निगाहें

संभावित प्रत्याशियों की चिंता सिर्फ आरक्षण तक सीमित नहीं है. पंचायतों और वार्डों के परिसीमन को लेकर भी सभी की निगाहें अंतिम गजट अधिसूचना पर टिकी हुई हैं.

दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि पंचायतों की सीमाओं या वार्डों के स्वरूप में कोई बदलाव होगा या नहीं. परिसीमन में बदलाव चुनावी गणित को पूरी तरह बदल सकता है.

अंतिम सूची के बाद और तेज होगी चुनावी गतिविधियां

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण और परिसीमन की अंतिम सूची प्रकाशित होते ही पंचायत चुनाव की गतिविधियां और तेज हो जाएंगी. इसके बाद समर्थकों की बैठकें, रणनीति निर्माण और प्रचार अभियान खुलकर शुरू हो जाएंगे.

फिलहाल पूरे क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार कौन सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा और परिसीमन के बाद पंचायत की नई चुनावी तस्वीर कैसी होगी.

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