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लापरवाह चिकित्सा ने ले ली मेरे बच्चे की जान

Updated at : 14 Jan 2026 10:48 PM (IST)
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लापरवाह चिकित्सा ने ले ली मेरे बच्चे की जान

थाना क्षेत्र के भितिया गेडाटीकर गांव निवासी रूपेश कुमार का 9 माह के मासूम पुत्र राजवीर कुमार उर्फ दिव्यांशु की मृत्यु हो गयी है.

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फुल्लीडुमर. थाना क्षेत्र के भितिया गेडाटीकर गांव निवासी रूपेश कुमार का 9 माह के मासूम पुत्र राजवीर कुमार उर्फ दिव्यांशु की मृत्यु हो गयी है. माता सोनी कुमारी व पिता का आरोप है कि उनके पुत्र की जान लापरवाह चिकित्सा ने ली है. माता पिता ने बताया है कि उनका पुत्र बीमार था. जिसका इलाज झारखंड के देवघर से चल रहा था. इस बीच घर पहुंचने पर 12 जनवरी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फुल्लीडुमर के एएनएम नीलम देवी अपने दो सहयोगियों के साथ गेडाटीकर गांव पहुंची और बच्चे का वैक्सीन लगाने की बात कही. इस पर बच्चे की माता सोनी कुमारी ने कहा कि मेरा बच्चा बीमार है. वैक्सीन नहीं लगायी जाये, लेकिन एएनएम के द्वारा कहा गया कि वैक्सीन लगाने से कुछ नहीं होगा और बच्चे को वैक्सीन लगा दिया गया. इसके बाद 13 जनवरी मंगलवार को उनके बच्चे की तबीयत बिगड़ गयी. आनन-फानन में माता-पिता ने बच्चे को सदर अस्पताल बांका लाया. माता पिता का आरोप है कि सदर अस्पताल में चिकित्सक के द्वारा जो दवाई लिखी गयी. वे दवाईयां यहां उपलब्ध नहीं था. इसके बाद बच्चें को लेकर पुन: देवघर चला गया. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. और देवघर पहुंचते ही उनके पुत्र की जान चली गयी. और शोकाकुल माता पिता बच्चे का शव लेकर घर पहुंचे. जिसके बाद इस घटना की सूचना बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फुल्लीडुमर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. संजीव कुमार सिंह को जानकारी दी गयी. सूचना के बाद फुल्लीडुमर व बांका के चिकित्सा टीम उनके घर पहुंची. इसमें जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. सुनील कुमार चौधरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फुल्लीडुमर के प्रभारी सहित डा. राजेश कुमार, स्वास्थ्य प्रबंधक बिकास कुमार, रोहीत कुमार, सुशील कुमार सिंह सहित अन्य शामिल थे. चिकित्सकीय टीम ने बच्चें का शव व इलाज का पर्ची आदि का अवलोकन किया. जिसमें चिकित्सकीय टीम ने बताया कि वैक्सीन की वजह से बच्चें की मौत नहीं हुयी है. बच्चें को पूर्व से निमोनिया था. जिसका ससमय इलाज नहीं होने से मृत्यु हुयी है. कुल मिलाकर देखा जाय तो इस बच्चें की मौत के पीछे कहीं न कहीं लापरवाह चिकित्सा है. परिजनों का आरोप है कि सदर अस्पताल में उनके बच्चें का सही से इलाज हो जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी. उधर इस घटना के बाद परिजनों में शोक है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHUBHASH BAIDYA

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By SHUBHASH BAIDYA

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