मोबाइल की लत से बिगड़ रही सेहत और रिश्ते, डॉक्टर ने बताया कितना स्क्रीन टाइम है सुरक्षित

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फोटो | Prabhat Khabar Network

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Mobile Addiction: क्या आपका दिन मोबाइल पर ही बीतता है? यह आदत गंभीर लत का रूप ले सकती है, जिससे सेहत, पढ़ाई और रिश्तों पर बुरा असर पड़ रहा है। जानिए विशेषज्ञ की सलाह और बचाव के तरीके।

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Mobile Addiction: स्मार्टफोन ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है. बैंकिंग, पढ़ाई, खरीदारी, मनोरंजन और संचार जैसे लगभग हर काम अब मोबाइल से हो रहे हैं. लेकिन यही सुविधा अब कई लोगों के लिए परेशानी की वजह बनती जा रही है.

बांका जिले के बाराहाट में लगातार बढ़ रहे मोबाइल इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है. खासकर युवाओं और बच्चों में सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम और वीडियो देखने की आदत तेजी से बढ़ रही है. खाली समय मिलते ही अधिकांश लोग घंटों तक मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहते हैं.

युवाओं की दिनचर्या बदल रही, खेल के मैदान हो रहे खाली

कुछ साल पहले तक युवा अपना समय खेलकूद, पुस्तकालय, दोस्तों और सामाजिक गतिविधियों में बिताते थे. अब तस्वीर बदल चुकी है. परिवार या दोस्तों के बीच बैठने के बावजूद अधिकतर लोग इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य मोबाइल ऐप में व्यस्त रहते हैं.

इस बदलाव का असर पढ़ाई, करियर, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक व्यवहार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. आमने-सामने बातचीत कम हो रही है और डिजिटल दुनिया वास्तविक रिश्तों की जगह लेती जा रही है.

लंबे स्क्रीन टाइम से बढ़ रहीं ये स्वास्थ्य समस्याएं

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार स्क्रीन देखने और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं.

इनमें मोटापा, गर्दन और कमर दर्द, आंखों पर दबाव, नींद की समस्या, तनाव, अवसाद और एकाग्रता में कमी जैसी दिक्कतें तेजी से सामने आ रही हैं. लगातार मोबाइल चलाने से शरीर की सक्रियता कम होती है, जिससे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को खाना खिलाने या शांत रखने के लिए मोबाइल देना बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति है.

लंबे समय तक मोबाइल देखने से बच्चों की आंखों पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा बोलने में देरी, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, सीखने की क्षमता प्रभावित होना और खेलकूद से दूरी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर इसका सीधा असर पड़ता है.

डॉक्टर ने दी स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाराहाट के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निलांबर निलय ने कहा कि लगातार 30 से 40 मिनट से अधिक मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए.

उन्होंने सलाह दी कि बीच-बीच में उठकर टहलें, आंखों को आराम दें और नियमित व्यायाम करें. अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर निगरानी रखनी चाहिए और उन्हें खेलकूद, पुस्तक पढ़ने तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए.

समय रहते नहीं संभले तो बढ़ सकती है समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है. यदि समय रहते स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं.

आत्म अनुशासन, परिवार के साथ समय बिताना, नियमित व्यायाम और डिजिटल ब्रेक जैसी छोटी-छोटी आदतें मोबाइल की लत से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

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अजय कुमार झा

लेखक के बारे में

By अजय कुमार झा

अजय कुमार झा प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बाराहाट (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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