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आम के उत्पादन में आयी भारी गिरावट, किसानों में मायूसी

Updated at : 19 May 2024 11:58 PM (IST)
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आम के उत्पादन में आयी भारी गिरावट, किसानों में मायूसी

आम के उत्पादन में आयी भारी गिरावट, किसानों में मायूसी

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इस बार ठंड देर से जाने व बेमौसम कोहरे की वजह से आम पर पड़ा प्रतिकूल असर बांका.इस बार जिले में आम के उत्पादन को तगड़ा झटका लगा है. पिछले वर्ष की तुलना में पेड़ पर आम के फल काफी कम नजर आ रहे हैं. गिने-चुने आम जरूर पेड़ों पर लटके हैं, लेकिन वे भी मौसम की मार से बेजान लग रहे हैं. आम का बगीचा खरीदनेवाले से लेकर किसान तक मायूस हैं. उनके मुताबकि, पिछले वर्ष की तुलना में एक चौथाई आम के फल नहीं आये हैं. इस बार उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गयी है. वहीं दूसरी ओर आम झड़ने की भी शिकायत बढ़ गयी है. ज्ञात हो कि जिले में पिछले पांच साल से बड़े पैमाने पर आम का उत्पादन होता आ रहा था. इससे किसानों में बगीचा लगाने में दिलचस्पी काफी बढ़ी है. चूंकि एक-एक बगीचा सालाना लाखों की आमदनी देता है. लेकिन इस बार वैसी संभावना नहीं दिख रही है. इस वजह से किसान वर्ग में खासी उदासी छायी हुई है. इतना ही नहीं जिले के आम नागरिक भी बाजार में स्थानीय आम नहीं उतरने से निराश हैं. लंबे समय तक रही ठंड, कोहरे ने किया नुकसान किसान प्रेम शंकर सिंह, विक्की, मणिलाल यादव, मृत्युंजय शर्मा आदि ने कहा कि इस बार ठंड लंबे समय तक रही. साथ ही बेमौसम कोहरा भी छाया रहा. इस वजह से आम के मंजर को नुकसान पहुंचा. टिकोला आने के साथ ही प्रचंड गर्मी भी आ गयी. यानी कुल मिलाकर मौसम की मार ने इस बार आम के उत्पादन पर गहरा असर डाला है. जब बारिश की जरूरत महसूस की जा रही है तो बारिश भी ठीक से नहीं हो रही है. एक तरह से मौसम में उतार-चढ़ाव की स्थिति ने आम उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल दिया है. बगीचे की समय-समय पर करें सिंचाई : डॉ विकास सिंह इस बार ठंड लेट तक रहने की वजह से आम के फल को नुकसान हुआ है. मंजर देर से आये हैं. टिकोला आने के साथ ही गर्मी भी आ गयी है, ऐसे में टिकोला कमजोर पड़ गया है और सूख कर गिरने की भी समस्या बढ़ गयी है. यह समय ऐसा है कि पेड़ पर दवाई का स्प्रे भी नहीं कर सकते हैं. चूंकि स्प्रे मंजर आने के पहले और टिकोला आने के साथ किया जाता है. अब केवल किसान इतना ध्यान अवश्य रखें कि बगीचे में पानी की कमी न होने दें. बगीचे में नमी बनी रहे, इसके लिए समय-समय पर सिंचाई अवश्य करें. डॉ विकास सिंह, उद्यान विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, बांका

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