बेलारी खानकाह में उर्स मेला के दूसरे दिन गागर शरीफ का हुआ आयोजन

Updated at : 19 Feb 2025 8:48 PM (IST)
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बेलारी खानकाह में उर्स मेला के दूसरे दिन गागर शरीफ का हुआ आयोजन

शंभुगंज प्रखंड के बेलारी गांव में बाबा भोला शाह के खानकाह में आयोजित उर्स मेला में बुधवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

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शंभुगंज. शंभुगंज प्रखंड के बेलारी गांव में बाबा भोला शाह के खानकाह में आयोजित उर्स मेला में बुधवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. यहां हर वर्ष लगने वाला उर्स मेला हिन्दू व मुस्लिम समुदाय के लोगों के एकता का प्रतीक है. बेलारी गांव में वर्ष 1951 से ही उर्स मेला का आयोजन बाबा भोला शाह के मजार पर होता रहा है. चार दिनों तक आयोजित इस मेले में प्रथम दिन मंगलवार को आलम शरीफ का कार्यक्रम किया गया. इसमें बाबा का झंडा फहराया जाता है. दूसरे दिन बुधवार को गागर शरीफ कार्यक्रम हुआ है. जिसमें गांव के हर घर से कलश में जल भर कर गांव-गांव भ्रमण कर खानकाह पहुंचकर उर्स मेले में बाबा भोला शाह के मजार पर चढ़ाते हैं. इस आयोजन में हर जाति समुदाय के लोग बाबा से श्रद्धा रखने वाले भाग लेते हैं, जबकि तीसरे दिन गुरुवार को यहां प्रसाद के रूप में लंगर का आयोजन किया जायेगा. जिसमें हजारों लोग बाबा का प्रसाद लंगर में ग्रहण करेंगे. बुधवार की रात में महफिलें खास का आयोजन किया गया. जिसे देखने के लिए यहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लगी हुई है. यहां के गद्दी नशीन सेवक अंशार बाबा ने बताया कि यहां सर्वधर्म के लोग आते हैं. देश भर में 13 जगहों पर बाबा भोला साह का खानकाह मजार है. जिसमें शंभुगंज के बेलारी दूसरे स्थान पर है. उन्होंने बताया कि मजार दादा गुरु बाबा मुराद शाह सबके गुरु हैं तथा उनके 50 लाख से अधिक शिष्य देश व विदेश में हैं. जहां हर वर्ष बाबा भोला शाह के वंशज कायम अली शाह यहां आते हैं. जिनके देख रेख नें इतना बड़ा आयोजन किया जाता है. बेलारी गांव स्थित खानकाह में आयोजित उर्स मेला में दर्जनों से ज्यादा विभिन्न राज्यों से मानसिक रूप से विक्षिप्त रोगियों को लाया गया है. ऐसी मान्यता है कि मानसिक रूप से विक्षिप्त मरीजों को तीन दिनों तक यहां बाबा भोला शाह के दरबार में रखा जाता है. जिसके बाद मनोरोगी बाबा की कृपा से ठीक हो जाते हैं. जिसे तीन दिनों तक मानसिक रूप से विक्षिप्त मरीजों को लोहे के जंजीर में बांधकर रखा जाता है, जो तीन दिनों में बाबा के कृपा से ठीक होकर फिर परिवार के सदस्यों के साथ चले जाते है. ग्रामीणों ने बताया कि इतना बड़ा आयोजन समस्त ग्रामीणों के सहयोग से किया जाता है.

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