भागवत कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन

प्रखंड क्षेत्र के गोकुला गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया.
बौंसी. प्रखंड क्षेत्र के गोकुला गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया. वृंदावन धाम से पधारी श्रद्धेय दीदी राधा किशोरी के मुखारविंद से निकले प्रवचन और भजनों को सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे खड़े रहने तक की जगह मुश्किल हो गयी. हालांकि आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है. अपने प्रवचन में दीदी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों पर कृपा करने के लिए युग-युग में अवतार लेते हैं. उन्होंने कहा कि हमें भी श्रीकृष्ण की तरह सत्य को ग्रहण करने वाला सत्संगी बनना चाहिए. उन्होंने बताया कि बाल्यकाल में भगवान द्वारा की गयी लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन का गूढ़ संदेश देती हैं. मिट्टी खाने की लीला से लेकर गोपियों के साथ प्रेम और इंद्र का मान मर्दन करने तक, हर घटना में भक्तों के लिए सीख छिपी है. इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए भगवान ने गिरिराज जी की पूजा करायी और यह संदेश दिया कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है. दीदी जी ने कहा कि जीवन में कभी अभिमान नहीं करना चाहिए, अन्यथा ब्रह्मा जी की तरह कष्ट उठाना पड़ सकता है. उन्होंने भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि चाहे व्यक्ति महलों में रहे या झोपड़ी में, उसके जीवन में भगवान का स्मरण बना रहना चाहिए. इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्यों के साथ-साथ क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया.
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