मुख्य सड़कों पर मौत बनकर खड़े हैं सूखे पेड़, प्रशासन की अनदेखी से राहगीर खौफजदा

केबीसी केनाल पर बने सड़क पर सूखे पेड़
बांका के शंभुगंज प्रखंड में मुख्य सड़कों के किनारे वर्षों से खड़े सूखे पेड़ किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं. प्रखंड मुख्यालय और बग्घा गांव के समीप झुके इन पेड़ों के बिजली के हाईटेंशन तारों के संपर्क में होने से राहगीरों में भारी दहशत है, जिसे लेकर सीओ ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
शंभुगंज, (बांका) से ठाकुर बिनोद सिंह की रिपोर्ट: प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मुख्य मार्ग और सार्वजनिक स्थलों के किनारे सूखे विशालकाय पेड़ किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहे हैं. तेज हवा और बारिश के मौसम में ये पेड़ कभी भी काल का ग्रास बन सकते हैं. स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस खतरे को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं.
प्रखंड मुख्यालय के समीप झुका है विशाल शीशम का पेड़
पुराने प्रखंड मुख्यालय परिसर स्थित कौशल विकास युवा केंद्र के ठीक सामने सड़क किनारे शीशम का एक विशाल पेड़ पिछले कई वर्षों से सूखा खड़ा है. इस पेड़ की टहनियां टूटकर सड़क पर गिरती रहती हैं. पेड़ का मुख्य तना और भारी डालियां सड़क की ओर दो-तिहाई से अधिक झुक चुकी हैं. गौरतलब है कि इसी मार्ग से मनरेगा कार्यालय, ई-किसान भवन और कौशल युवा केंद्र के लिए भारी संख्या में लोगों और छात्रों की आवाजाही होती है. प्रखंड प्रशासन की नाक के नीचे खड़ा यह पेड़ कभी भी गिर सकता है.
हाईटेंशन तार पर मंडरा रहा खतरा
दूसरी ओर, जिलानी पथ से बसबिट्टा गांव जाने वाली नहर की सड़क पर बग्घा गांव के पास भी एक विशाल सूखा पेड़ मौत बनकर खड़ा है. इस पेड़ के ठीक पास से बिजली की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है. स्थानीय निवासी दीपक सिंह, विभाष कुमार और सन्नी यादव ने बताया कि तेज हवा चलने पर पेड़ की टहनियां बिजली के तारों से टकराती हैं, जिससे भीषण स्पार्क होता है. यह सड़क काफी व्यस्त है और लोगों को हमेशा करंट या पेड़ गिरने का डर सताता रहता है.
सीओ ने दिया आश्वासन
ग्रामीणों का आरोप है कि इस खतरे को हटाने के लिए कई बार लिखित और मौखिक शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इस संबंध में पूछे जाने पर अंचलाधिकारी (सीओ) जुगनू रानी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थल निरीक्षण कर समस्या का समाधान किया जाएगा और खतरनाक पेड़ों को हटाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. अब देखना यह है कि प्रशासन किसी हादसे का इंतजार करता है या समय रहते इन “मौत के पेड़ों” से निजात दिलाता है.
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