बांका की जीवनरेखा चांदन जलाशय संकट में, गाद ने छीनी सिंचाई की ताकत, पुनर्जीवन के इंतजार में किसान
चांदन जलाशय की तस्वीर. | Prabhat Khabar Network
Chandan Reservoir in Crisis : बांका की पहचान चांदन जलाशय गाद से लगभग 65% भर चुका है, जिससे सिंचाई व्यवस्था गंभीर संकट में है. लाखों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने वाला यह बांध वर्षों से गाद निकासी न होने और रखरखाव की कमी से जूझ रहा है. किसान अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.
Chandan Reservoir in Crisis : बांका जिले की पहचान और किसानों की जीवनरेखा माने जाने वाले चांदन जलाशय की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है. वर्ष 1962 में निर्मित यह डैम कभी करीब 68 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई का प्रमुख आधार था, लेकिन वर्षों से गाद निकासी नहीं होने और रखरखाव के अभाव ने इसे गंभीर संकट में डाल दिया है. करोड़ों रुपये की परियोजना प्रस्तावित होने के बावजूद अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है. ऐसे में किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द ठोस कदम उठाएगी.
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वर्ष 1962 में हुआ था निर्माण
चांदन जलाशय का निर्माण वर्ष 1962 में कृषि सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था. उस समय यह परियोजना बांका और भागलपुर जिले के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई थी. जलाशय से बौंसी, बाराहाट, धोरैया और अमरपुर समेत कई प्रखंडों की लगभग 68 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती थी. धान, गेहूं, मक्का और दलहन जैसी फसलों की बेहतर पैदावार में इस जलाशय की अहम भूमिका रही है.
65 प्रतिशत हिस्से में भर चुकी है गाद
विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों के अनुसार, वर्तमान में चांदन जलाशय का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा गाद से भर चुका है. लगातार सिल्ट जमा होने के कारण इसकी जल भंडारण क्षमता हर वर्ष घटती जा रही है. इसका सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है. पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से उन्हें सिंचाई के लिए डीजल पंप और निजी बोरिंग का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन और मुनाफा घटता जा रहा है. कई किसानों ने पानी की कमी के कारण रबी फसलों की खेती भी कम कर दी है.
मार्च में ही सूख गया था जलाशय
इस वर्ष स्थिति और भी गंभीर रही. गर्मी के मौसम में मार्च महीने में ही चांदन जलाशय पूरी तरह सूख गया था. इससे न केवल सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि ग्रामीण इलाकों में जल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो गई. लंबे समय तक जलाशय खाली रहने से किसानों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई.
डीपीआर बनी, लेकिन काम नहीं हुआ शुरू
चांदन जलाशय की बदहाल स्थिति को लेकर वर्षों से किसान और जनप्रतिनिधि आवाज उठाते रहे हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो बार जलाशय का निरीक्षण कर गाद हटाने का भरोसा दिया था. इसके बाद जल संसाधन विभाग ने लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी. किसानों को उम्मीद थी कि जल्द ही सफाई का कार्य शुरू होगा, लेकिन वर्षों बाद भी परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी.
पर्यटन की अपार संभावनाएं भी ठप
चांदन जलाशय केवल सिंचाई का स्रोत ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है. पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा केंद्र है. यहां वाटर स्पोर्ट्स, रिसॉर्ट और एडवेंचर टूरिज्म विकसित करने की योजनाएं बनाई गई थीं. पर्यटन विभाग ने रिसॉर्ट निर्माण के लिए भूमि भी चिन्हित की थी, लेकिन जलाशय में पर्याप्त पानी नहीं रहने के कारण सभी योजनाएं अधूरी रह गईं.
फिलहाल 455 फीट पर है जलस्तर
लगातार हो रही बारिश के बावजूद चांदन डैम का जलस्तर फिलहाल 455 फीट तक ही पहुंच पाया है. यानी अब तक करीब 15 फीट पानी का ही भंडारण हुआ है. डैम का अधिकतम जलस्तर 500 फीट होने पर ही पानी स्पिल (ओवरफ्लो) होता है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस वर्ष डैम के पूरी तरह भरने की संभावना कम मानी जा रही है. हालांकि किसानों को उम्मीद है कि 25 जुलाई के बाद सिंचाई के लिए डैम से पानी छोड़ा जा सकता है.
अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई की उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलाशय से गाद हटाने का कार्य शुरू कर दिया जाए तो इसकी जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इसका लाभ केवल बांका और भागलपुर ही नहीं, बल्कि झारखंड के गोड्डा जिले तक के किसानों को मिलेगा. तत्कालीन लघु जल संसाधन मंत्री जयंत राज ने भी डैम की समस्या के समाधान और गाद हटाने का भरोसा दिया था. अब क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर काम शुरू हो. उनका मानना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बांका की पहचान बन चुका यह ऐतिहासिक जलाशय अपनी उपयोगिता खो देगा और हजारों किसानों की उम्मीदें भी सूख जाएंगी.
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