बांका में आज सुबह 5 बजे खुला मंदिरों का पट, भक्ति और आरती से गूंज उठा शहर

Edited by AMIT KR SINHA
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मंदार स्थित अष्टकमल मंदिर.

Aaj Ka Darshan: सुबह 5 बजे खुलते ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़. भयहरण स्थान से मंदार मधुसूदन मंदिर तक पंचामृत स्नान, भोग और भव्य आरती ने भक्तों को भावविभोर कर दिया.

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बांका से चंदन कुमार की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर का धार्मिक वातावरण आस्था और भक्ति के रंग में रंग गया. भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर, जगतपुर स्थित ठाकुरबाड़ी सहित विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों का पट सुबह पांच बजे ही खोल दिया गया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे.

भयहरण स्थान में गूंजे मंत्रोच्चार, भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि

शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल भयहरण स्थान में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं के समक्ष दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की. मंदिर परिसर में घंटियों और मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.

Aaj Ka Darshan: पंचमुखी मंदिर और ठाकुरबाड़ी में दिखी आस्था की झलक

बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं. वहीं जगतपुर स्थित ठाकुरबाड़ी में भी भक्तों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया. मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालुओं ने दिन की शुरुआत आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक भावनाओं के साथ की.

मंदार मधुसूदन मंदिर में पंचामृत स्नान बना आकर्षण का केंद्र

मंदार मधुसूदन मंदिर में भगवान की विशेष पूजा-अर्चना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुई. सुबह 7:30 बजे पुजारी बिंदेश्वरी उर्फ पटल झा और लक्ष्मण झा ने भगवान का पंचामृत से विधिवत स्नान कराया. इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर स्वयं को धन्य महसूस किया.

शाम की भव्य आरती में दिखेगी भक्ति की छटा

दोपहर 12 बजे भगवान को विशेष भोग अर्पित किया जायेगा. इसके बाद संध्या 6 बजे शृंगार पूजा का आयोजन होगा, जिसमें भगवान का आकर्षक शृंगार किया जायेगा. शाम की भव्य आरती के दौरान मंदिर परिसर दीपों की रोशनी, शंखध्वनि और भक्ति के गीत गूंजेंगी.

आस्था और परंपरा का जीवंत संगम बना शहर

दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ ने शहर के आध्यात्मिक माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया. मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साबित किया कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद लोगों की आस्था और धार्मिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है.

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