कहीं पत्थर, तो कहीं ईंट से तौलते हैं सामान

Published at :24 May 2017 4:28 AM (IST)
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कहीं पत्थर, तो कहीं ईंट से तौलते हैं सामान

उचित मूल्य देने के बावजूद मिलता है कम वजन पेट्रोल पंप से लेकर अन्य दुकानों की नहीं होती है नियमित जांच बांका : जिले में कार्यरत माप-तौल विभाग अपने अस्तित्व में नहीं है. विभाग कचहरी परिसर में रेलवे आरक्षण काउंटर के एक रूम में कार्यरत है. माप-तौल का कार्यालय कब खुलता है और कब बंद […]

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उचित मूल्य देने के बावजूद मिलता है कम वजन

पेट्रोल पंप से लेकर अन्य दुकानों की नहीं होती है नियमित जांच
बांका : जिले में कार्यरत माप-तौल विभाग अपने अस्तित्व में नहीं है. विभाग कचहरी परिसर में रेलवे आरक्षण काउंटर के एक रूम में कार्यरत है. माप-तौल का कार्यालय कब खुलता है और कब बंद होती है. यह आम लोगों या ग्राहकों को पता नहीं है. विभाग के अधिकतर कार्य कागजों पर ही चलती है. विभाग शायद ही कभी क्षेत्र में लगे विभिन्न उद्योगों, व्यपारिक प्रतिष्ठानों सहित खुदरा दुकानदारों आदि के बाटों की जांच करती है. इस कार्यालय का अधिकतर कार्य इशारों-इशारों में होती है.
विभाग में अनाधिकृत रूप से कई ऐसे शुभचिंतक कार्यरत है. जो क्षेत्र की कई कार्यों को अधिकारी के बिना संज्ञान के ही अंजाम दे दिया जाता है. उधर विभाग की बिचौलिया संस्कृति को लेकर कई दुकानदार ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं. क्षेत्र के विभिन्न हाट बाजारों में दुकादारों द्वारा खुलेआम खोटे बाटों का उपयोग किया जा रहा है. इससे हर रोज ग्राहकों को कीमत चुकाने के बाद भी सही वजन नहीं मिल पा रहा है.
अधिकतर व्यपारिक प्रतिष्ठानों एवं खुदरा दुकानदार ईंट व पत्थर के टुकड़ों का उपयोग बाट की जगह किया जा रहा है. माप तौल विभाग द्वारा कभी जांच नहीं किए जाने के कारण दुकानदारों की मनमानी बदस्तूर जारी है. स्थिति इस कदर बदहाल है कि साक्षर ग्राहक भी इन दुकानदारों के ठगी के शिकार बन रहे है. कभी-कभी तो दुकानदार व ग्राहकों के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिलती है.
बाटों की नहीं होती हैं नियमित जांच : विभाग द्वारा शहर व गांव में बाटों की नियमित जांच नहीं हो रही है. जानकारी के अनुसार विभाग को इलेक्ट्रानिक बाटों की जांच साल में एक बार करनी होती है और अन्य व्यपारिक प्रतिष्ठानों के दुकानों के वाटों की जांच दो साल में एक बार करनी होती है. लेकिन विभागीय लापवाही के कारण अधिकतर प्रतिष्ठानों की स्थल पर जाकर जांच नहीं की जाती है. बाटों का सत्यापन कार्य विभाग द्वारा कागजों पर ही की जाती है. जिसमें बिचौलिया संस्कृति हावी है.
जिसके कारण अधिकतर व्यपारिक प्रतिष्ठानों में दुकानदारों की मनमानी चलती है. वहीं पेट्रोल पंप आदि के मशीनों की जांच भी नियमित रूप से नहीं होती है. ऐसे में ग्राहकों को प्रतिदिन चूना लग रहा है.
जांच के नाम पर होती हैं खानापूर्ति : दुकानदारों के बाट सत्यापन के नाम पर विभाग खानापूर्ति करता है. इसका लाभ न सिर्फ खुदरा दुकानदार बल्कि पंप मालिक से लेकर आटा-चावल मिल मालिक उठा रहे है और उपभोक्ताओं को खुलेआम लूटा जा रहा है. अधिकतर मिलों में 10 किलो से लेकर 40 किलो तक के पत्थर के बाट उपयोग में लाए जाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे उदाहरण अनेकों हैं. वहीं ग्राहकों की शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है. जिससे ग्राहकों का शोषण लगातार जारी है. कई उपभोक्ता ने बताया है कि जिले का माप-तौल विभाग मुकदर्शक बना हुआ है.
लोहे का बाट भी नहीं हैं सही : शहर के गांधी चौक व शिवाजी चौक सहित विभिन्न चौक-चौराहे पर स्थित किराना, सब्जी दुकानदार, फल व ठेला दुकानदारों का भी लोहे का बाट सही नहीं है. दुकानदार द्वारा सही वजन से कम तौला जा रहा है. कई उपभोक्ताओं ने बताया कि कुछ दुकानदार तराजू पर डांड़ी चढ़ाकर तो कुछ पत्थर के बाटों से ग्राहकों की जेब ढिली करने में लगे हैं. जिनके पास लोहे के बाट हैं, वे भी उन्हें अमानक कर दिये गये हैं.
लोहे के बाटों के अंदर सही वजन के लिए भरे गए रांगा को निकाल दिया गया है. जिससे एक किलो सामान लेने पर उसका सही वजन 800 ग्राम ही हो रहा है. यह बाट मछली बाजार, सब्जी मार्केट, किसानों का धान की खरीदारी करने आदि में धड़ल्ले से इन बाटों का प्रयोग किया जाता है. जबकि कई दुकानों पर लोहे के बाटों से उसका रांगा निकालकर दुकानदार ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
पुलिस बल के अभाव में जिले में जांच अभियान नहीं चल पा रहा है. पुलिस बल उपलब्ध होते ही बाजार में कम वजन नापने वाले दुकानदारों के विरुद्ध सघन जांच अभियान चलाकर कार्यवाही की जायेगी. साथ ही पकड़े जाने पर उक्त दुकानदार के विरुद्ध ठगी करने के आरोप में कानूनी कार्यवाही की जायेगी.
अशोक अंबष्ठ, माप-तौल पदाधिकारी, बांका
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