पुरातात्विक अवशेषों का खजाना समेटे है मंदार

Published at :11 Jan 2017 4:33 AM (IST)
विज्ञापन
पुरातात्विक अवशेषों का खजाना समेटे है मंदार

बौंसी : मंदराचल पर्वत जहां धार्मिक महत्व एवं तीन धर्मों की संगमस्थली है वहीं पुरातात्विक विभाग की नजर में इस पर्वत का भी विशेष महत्व है. मंदार पर्वत के ऐतिहासिक स्थल का पुरातात्विक निरीक्षण के बाद डाॅ एस के मंजुल ने सरकार को एक प्रतिवेदन सौंपा था. जिसमें बताया गया था कि यह पर्वत पौराणिक […]

विज्ञापन

बौंसी : मंदराचल पर्वत जहां धार्मिक महत्व एवं तीन धर्मों की संगमस्थली है वहीं पुरातात्विक विभाग की नजर में इस पर्वत का भी विशेष महत्व है. मंदार पर्वत के ऐतिहासिक स्थल का पुरातात्विक निरीक्षण के बाद डाॅ एस के मंजुल ने सरकार को एक प्रतिवेदन सौंपा था. जिसमें बताया गया था कि यह पर्वत पौराणिक आस्था से जुड़ा हुआ है. साथ ही इसके उपरी सतह से लेकर नीचे के भाग में कई अवशेष बिखरे पड़े हैं. जिसके सतही अंवेशन के क्रम में कई पुरास्थल,

बौद्ध, वैष्णव तथा जैन मंदिर के मूर्तियां, गुफाएं व अभिलेख देखे जा सकते हैं.

प्राचीण किला व मंदिर के अवशेष. पापहरणी तालाब के नजदीक का टीला स्थल क्षेत्र के कई छोटे – छोट टीलों में बंटा है. जहां वर्तमान में गांव एवं अद्वैत मिशन विद्यालय है. यह क्षेत्र लगभग एक किमी चौड़ा तथा डेढ़ किमी लंबाई में फैला है. प्राचीण संरचनाओं में ईंट तथा प्रस्तर खंडों के भग्नावशेष यहां वहां विखरे पड़े हैं. जिनमें एक लखदीपा मंदिर भी है. जहां पहले कभी दीप जला करते थे. वहीं पालकालीन ईंटों के प्रकार, लोहित मृदभांड एवं अन्य अवशेष हैं.
कामधेनु स्थल . यह जगह अद्वैत मिशन विद्यालय से करीब आधा किमी आगे पांच मंदिरों के समुह का खंडहर है, जो कामधेन स्थल के नाम से जाना जाता है. यहां के मंदिर में पार्वती, विष्णु, तथा कामधेनु मूर्ति है. जिसमें उसका बछड़ा स्तन पान कर रहा है. मान्यता है कि कामधेनु भी समुंद्र मंथन के क्रम में 14 रत्नों में से एक है.
चैतन्य महाप्रभु का पदचिह्न स्थल
अद्वैत मिशन स्कूल के पीछे एक छोटे से मंदिर में चैतन्य महाप्रभु का पदचिन्ह रखा है. साथ ही मंदिर के पिछले हिस्से में प्रस्तर फलक पर अभिलेख के अनुसार यह 1505 का बताया जाता है.
मंदार पर्वत का पीछे का टीला
मंदार पर्वत के पिछले हिस्से में एक जलाशय बना है. जिसके नजदीक प्राचीण सांस्कृतिक जमाव हैं जिसमें लोहित एवं कांचित मृदभांद के टुकड़े पाये गये हैं.
पापहरणी तालाब की दायीं ओर का टीला . मंदार पर्वत के उपर जाने के क्रम में नीचे के सतह पर तालाब के दायीं ओर प्राचीण ईंटों की संरचनाएं देखी जा सकती है. पुरातत्व विभाग के अनुसार यह ईंट मध्यकाल की प्रतीत होती है.
मंदराचल पर्वत पर स्थित स्थल व पुरातात्विक अवशेष . पर्वत पर जाने के रास्ते में कई मूर्तियां के खंडित रुप देखे जा सकते हैं. जहां क्षैतिज पहाड़ पर कटी रेखाएं बनी है. उसके नीचे के रास्ते में दायीं ओर ब्राम्ही लिपी में एक अभिलेख मिला है. पर्वत पर समतल सतह पर कई प्राचीण मंदिर की संरचनाएं जो प्रस्तर तथा ईंटों से बनी थी, जो जीर्ण – शीर्ण अवस्था में पड़ी है. पर्वत पर स्थित जलाशय के चारों ओर प्राचीण इमारतों के अवशेष खंडहर के रुप में दिखाई देते हैं. जबकि उपरी हिस्से में कई गुफाएं तथा मूर्तियां बनी हुई है.
शंख कुंड . जलाशय के ठीक उपर एक कुंड है जिसके तल में पत्थर के शंख की आकृति बनी हुई है. पुरातत्व वेत्ताओं के अनुसार यह शंख संभवत: गुप्तकाल में बना होगा. कुंड के उपर पहाड़ के उपर शंख लिपी उत्कीर्ण है. मान्यता है कि यह शंख समुंद्र मंथन के क्रम में बाहर निकला था. पुरातत्व वेत्ताओं के अंवेशन के क्रम में पाये गये पुरावशेषों तथा संरचनात्मक साक्ष्यों से प्रमाणित होता है कि सातवीं सदी से लेकर 15वीं सदी के अवशेष यहां विखरे पड़े हैं. हालांकि पुरातत्व वेत्ताओं का मानना है कि अगर इन प्रतिमाओं में घी, धूप, रंगरोगन का प्रयोग बंद न किया गया और इन प्रतिमाओं के अवशेषों को संरक्षित नहीं किया गया तो इसका ऐतिहासिक स्वरुप नष्ट हो सकता है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन