घोषणा के बाद भी मंदार में नहीं खुला थाना

Published at :29 Aug 2016 7:50 AM (IST)
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घोषणा के बाद भी मंदार में नहीं खुला थाना

बौंसी : प्रतिदिन असुरक्षा भरे वातावरण में सैलानी मंदार भ्रमण को विवश हैं. उल्लेखनीय है कि पूर्व बिहार के सबसे बड़े पर्यटक स्थल का दर्जा प्राप्त मंदार पर्वत पर प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में देसी, विदेशी सैलानी भ्रमण को आते हैं, लेकिन पर्वत पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं रहने की वजह से शाम ढलने से […]

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बौंसी : प्रतिदिन असुरक्षा भरे वातावरण में सैलानी मंदार भ्रमण को विवश हैं. उल्लेखनीय है कि पूर्व बिहार के सबसे बड़े पर्यटक स्थल का दर्जा प्राप्त मंदार पर्वत पर प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में देसी, विदेशी सैलानी भ्रमण को आते हैं, लेकिन पर्वत पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं रहने की वजह से शाम ढलने से पूर्व ही सैलानी मंदार से वापस लौट जाते हैं. अगर नहीं लौट पाये तो उनके साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी घटनाएं अक्सर होती रहती है.

इसी डर से यहां आने वाले लोग वापस लौटने में ही भलाई समझते हैं.

मंदार पर्वत पर आने वाले सैलानियों की सुरक्षा के लिए पुलिस आउट पोस्ट खोलने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मंदार पहुंचकर 21 जनवरी 15 को की थी. लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी मंदार पर्वत की तराई में ना तो पुलिस थाना खुला और ना ही सैलानियों की सुरक्षा के कोई कदम उठाये गये. मंदार पर्वत चारों तरफ से खुला हुआ है. नतीजतन असामाजिक तत्व किसी भी दिशा से मंदार पर्वत पर चढ़ जाते हैं और किसी प्रकार का वारदात कर वापस उतर जाते हैं इससे हमेशा मंदार आने वाले लोगों के बीच असुरक्षा की भावना बनी रहती है.
मंदार में अबतक करीब एक दर्जन बड़ी वारदात हो चुकी है. इसके अलावे छोटी मोटी छिनतई एवं छेड़खानी की शिकायतें अक्सर सुनने को मिलती है. मंदार में सबसे बड़ी घटना 21 अप्रैल 2013 को घटी थी. घुमने आयी एक छात्रा के साथ चार लोगों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था. हालांकि बाद में इस घटना में शामिल तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. इसके एक साल बाद 27 सितंबर 2014 को जैन तीर्थयात्रियों का दल मंदारगिरी भ्रमण पर आया था इस दल में शामिल महिला तीर्थयात्री के साथ पर्वत पर शराब के नशे में असामाजिक तत्वों ने छेड़खानी की थी.
जिसके बाद साहस दिखाते हुए महिलाओं ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था और इस घटना की सूचना जब राज्य सरकार को हुई तो तभी तत्कालीन पर्यटन मंत्री डा. जावेद इकबाल ने कहा था कि सुरक्षा के लिए अविलंब मंदार में थाना खोला जायेगा. इसी के कुछ महीने बाद मंदार आये सीएम ने थाना खोले जाने की घोषणा की थी. लेकिन सीएम की घोषणा भी हवा हवाई हो गयी. इन सबके बीच थाना एवं जिला स्तर से एक रिपोर्ट भी भेजी गयी जिसमें बौंसी,
बाराहाट व पंजवारा थानाक्षेत्र से करीब 22 हजार आबादी को काट कर थाना बनाने का प्रस्ताव भेजा गया. जिसमें तीनों थाना क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के तीन हजार सात सौ एकड़ एरिया को कवर करना था. लेकिन यह बात आजतक फाईलों में ही सिमट कर रह गया है. मंदार पर्वत पर सिर्फ तीर्थयात्रियों को ही नहीं भगवान भी सुरक्षित नहीं है.
पर्वत के प्रारंभ में ही बने एक मंदिर में भगवान शिव एवं पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा जिसकी कीमत करोड़ों में बतायी जाती थी उस भारी भरकम प्रतिमा को चोरों ने 31 अक्तूबर 13 को चुरा लिया जिसका सुराग पुलिस आज तक नहीं लगा पायी है. इस प्रतिमा को बरामद करने की मांग को लेकर मंदार क्षेत्र के कई आस्थावान लोगों ने आंदोलन व अनशन किया. लेकिन सिर्फ प्रशासन के द्वारा आश्वासन दिया गया.
इन सब के बीच मंदार पर सुरक्षा के नाम पर सिर्फ आधे दर्जन चौकीदार की तैनाती की गयी है. करीब आधे दर्जन ऐसे उचक्के हैं जो दिन भर पर्वत पर मंडराते रहते हैं और अगर कोई प्रेमी जोड़ा अथवा स्कूली छात्र छात्रा पर्वत पर जाते हैं तो उनके साथ पैसे की छिनतई व बदसलुकी की जाती है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर मंदार आने वाले सैलानियों की सुरक्षा कब सुदृढ़ होगी या किसी फिर बड़ी वारदात होने का इंतजार किया जा रहा है.
खास बातें
अब तक आधे दर्जन से अधिक मंदार में घट चुकी है घटना
पूर्व मुख्यमंत्री ने की थी मंदार में थाना खोलने की घोषणा
स्कूली छात्र छात्रा पर्वत पर जाते हैं तो उनके साथ होती है छिनतई
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