अपराधियों की आंखों की किरकिरी थे राजीव

बांका : अपराधियों की लगातार खिलाफत की वजह से जहां क्षेत्र के अपराधी उनसे खार खाते थे, वहीं आम अमन पसंद लोगों में वे इससे लगातार लोकप्रिय हो रहे थे. उनकी हालिया लोकप्रियता के पीछे चांदन अंधरी नदी बचाओ आंदोलन भी था जिसका वे नेतृत्व कर रहे थे. इस आंदोलन का मकसद चांदन नदी के […]
बांका : अपराधियों की लगातार खिलाफत की वजह से जहां क्षेत्र के अपराधी उनसे खार खाते थे, वहीं आम अमन पसंद लोगों में वे इससे लगातार लोकप्रिय हो रहे थे. उनकी हालिया लोकप्रियता के पीछे चांदन अंधरी नदी बचाओ आंदोलन भी था जिसका वे नेतृत्व कर रहे थे. इस आंदोलन का मकसद चांदन नदी के जैठोर बीयर से लेकर सिंहनान तक हो रहे बालू के उठाव को रोक कर नदी की सेहत कायम रखना था. हालांकि इसमें उन्हें बहुत सफलता नहीं मिली.
लेकिन यह अभियान उन्हें इस क्षेत्र के आम लोगों में लोकप्रिय कर गया. इस लोकप्रियता का फायदा उठाने की उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में भी कोशिश की. वे 4-5 साल पहले जदयू की राजनीतिक में सक्रिय हुए और अपनी पैरवी व पहुंच के बूते युवा जदयू के प्रदेश महासचिव बन गये. लेकिन कतिपय पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो साल पूर्व उन्हें संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया या फिर वे खुद पार्टी को छोड़ गये. इसी दौर में उन्होंने रालोसपा से जुड़ कर इसके नेता उपेंद्र कुशवाहा का दामन थाम लिया. उन्हें पार्टी में प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी दी गयी.
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