शिवाजी चौक जाम जाम. शहरवासियों को नहीं मिल रही निजात

Published at :30 Jun 2016 6:40 AM (IST)
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शिवाजी चौक जाम जाम. शहरवासियों को नहीं मिल रही निजात

बांका से होकर गुजरना अब अधिक कठिन होता जा रहा है. शिवाजी चौक पर अतिक्रमण की वजह से अक्सर लगनेवाला जाम, परेशानी का सबब बन रहा है. बांका : बांका के समीपवर्ती जिले या स्थानीय गांव के लोग एक बार यह सोच कर सिहर उठते हैं कि उन्हें एक बार फिर बांका शहर से होकर […]

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बांका से होकर गुजरना अब अधिक कठिन होता जा रहा है. शिवाजी चौक पर अतिक्रमण की वजह से अक्सर लगनेवाला जाम, परेशानी का सबब बन रहा है.

बांका : बांका के समीपवर्ती जिले या स्थानीय गांव के लोग एक बार यह सोच कर सिहर उठते हैं कि उन्हें एक बार फिर बांका शहर से होकर अन्य जगहों की ओर जाना है. बांका से गुजरने वाले लोगों को हर हाल में शहर के शिवाजी चौक को पार कर ही कहीं और जाया जा सकता है. शिवाजी चौक का आलम यह है कि दिनों भर यह चौक जाम की जद में रहता है. जिसके लिए जिम्मेदार चौक पर के स्थानीय दुकानदार एवं जिला प्रशासन के द्वारा तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी हैं.
शिवाजी चौक काफी संकीर्ण है. संकीर्ण होने के बाद भी स्थानीय दुकानदार अपने दुकान के सामान को रोड पर निकाल कर लगा देते हैं. जिससे पहले से संकीर्ण रोड और भी संकीर्ण हो जाती है. जाम लगाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेवार चौक पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी है. यदि वो चाह लें तो शिवाजी चौक पर जाम कभी लगे ही नहीं. शहर के दाता शाह मजार के समीप ऑटो चालक अपनी ऑटो को कतारबद्ध लगा कर पैसेंजर को बैठाते हैं. इस दौरान यदि कोई बड़ी बस या भारी वाहन जिनका कि नो इंट्री में प्रवेश है, वो आ जायें, तो तुरंत जाम लग जाता है. ऑटो चालक जाम देख कर भी अपने ऑटो को आगे नहीं बढ़ाते. लिहाजा जाम लगा रहता है.
सड़क चार फीट तक है अतिक्रमित
शिवाजी चौक पर जाम के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी भी जिम्मेवार हैं. स्थानीय दुकानदार 4 फीट तक सड़कों पर अपनी दुकान सजा कर रखते हैं. ऐसे में यदि दो बड़ी बस विपरीत दिशा से आ जाये, तो जाम लग जाता है. यदि इन दुकानदारों पर कार्रवाई की गयी होती तो भी जाम से बहुत हद तक निजात मिलती. दोपहर 1 बजे से लेकर तीन बजे तक जाम का आलम यह रहता है कि जब स्कूलों में छुट‍्टी होती है और स्कूल बस बच्चों को लेकर निकलते हैं तो इस दौरान जाम लगना ही लगना है, यह तय है. जाम कितने समय का होगा यह कोई नहीं कह सकता है.
जाम यदि लंबा लग जाये तो स्कूल बसों में बैठे बच्चे गर्मी व भूख से परेशान हो जाते हैं. कई बार तो ऐसा हुआ है कि जाम में फंसे बच्चों के अभिभावक पहुंच कर बच्चे को बस से निकाल कर पैदल मार्ग से अपने घर ले जाते हैं. शिवाजी चौक पर लगा जाम ऐसा होता है कि जाम में फंसे वाहन व आदमी जाम से निकल नहीं रहे बल्कि रेंग रहे हों. जाम की समस्या से शहरवासी को निजात तभी मिल सकता है जब शहर में बाइ पास मार्ग का निर्माण हो. लेकिन वर्तमान में बाइपास की निर्माण की कोई हलचल नहीं दिखती. तब तक शहरवासी इसी प्रकार से प्रतिदिन जाम से जूझते रहेंगे.
दो सप्ताह बाद अतिक्रमणकारियों पर फिर चला प्रशासन का बुलडोजर
बांका : शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए विगत 16 जून को चलाये गये अभियान के बाद बुधवार को दूसरी बार फिर अभियान चला. कचहरी, अनुमंडल एवं थाना से लेकर जेल तक के दोनों ओर अतिक्रमण कर रखे हुए दुकानों को सीओ के एन पाठक के नेतृत्व में हटाया गया. अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई जेल हाजत के समीप रखी गुमटी से शुरू हुआ और उसका समापन अनुमंडल परिसर के अंदर रिजर्वेशन काउंटर के आगे लगे गुमटियों को हटाने के बाद शाम 6 बजे समाप्त हुआ.
इस दौरान अनेकों दुकानदारों ने कहा कि गुमटी हटाने का समय दिया जाये. इस पर सीओ ने कहा कि पूर्व से अब तक कई बार माइक के माध्यम से प्रचार करा कर हटाने को कहा गया था. लेकिन दुकानदारों द्वारा गुंगटी व दुकान नहीं हटाये जाने पर बुधवार को बुलडोजर चला कर अतिक्रमण मुक्त किया गया है.
ज्ञात हो कि विगत 15 जून 2016 को अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के द्वारा शहर को स्वच्छ, सुंदर, अतिक्रमण मुक्त एवं जाम से मुक्ति दिलाने को लेकर इससे संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की गयी थी. बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि प्रथम चरण में शहर को अतिक्रमण मुक्त किया जायेगा. इस संबंध में सीओ ने बताया कि एक बार और स्थानीय दुकानदारों को दो-तीन दिनों का समय दिया जा रहा है. वे स्वेच्छा से रोड के किनारे लगाये हुए दुकानों व गुमटियों को हटा ले अन्यथा अगली बार बिना कुछ समय दिये उनके दुकानों को तहस – नहस कर दिया जायेगा.
अतिक्रमण मुक्त कराने में जो भी स्थानीय दुकानदारों की सामानों की क्षति होगी उसकी पूरी जिम्मेवारी उस दुकानदार की ही होगी. जिन्होंने रोड पर दुकानें व गुमटियों को सजा रखा है.
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