अगलगी में 30 घर जले अनहोनी. बेघर हुए अग्निपीड़ित परिवार, लाखों की क्षति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Apr 2016 2:07 AM (IST)
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\आग के कहर से अब गांव-गांव तबाह होने लगा है. रविवार को आग ने एक बार फिर अपना उग्र रूप दिखाते हुए रजौन प्रखंड के चार गांवों के करीब तीस घरों को अपने आगोश में लेकर सबकुछ तहस नहस कर दिया. रजौन : रजौन प्रखंड के कठचातर गांव में आग की लपटों ने विनय दास, […]
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\आग के कहर से अब गांव-गांव तबाह होने लगा है. रविवार को आग ने एक बार फिर अपना उग्र रूप दिखाते हुए रजौन प्रखंड के चार गांवों के करीब तीस घरों को अपने आगोश में लेकर सबकुछ तहस नहस कर दिया.
रजौन : रजौन प्रखंड के कठचातर गांव में आग की लपटों ने विनय दास, समीर दास, महेश दास, टुनटुन दास, नरेश दास, भोला दास, प्रमिला देवी, सुवालक दास, नवल दास, पंकज दास, मनोज दास, धरमु दास, पप्पु दास, सिकंदर दास, गुणसागर दास, अंबिका दास, अरूण दास, चुल्हाय दास, अम्बो दास, विपिन दास के घरों को जलाकर सब कुछ राख कर दिया. इस घटना में चुल्हाय दास को जहां आंशिक क्षति पहुंची है वही विनय दास की एक बकरी भी जलकर मर गयी.
आग से पीडि़तों के घर में रखा कपड़ा, अनाज, नगद रुपये भी जलकर नष्ट हो गये. सभी पीडि़त खुले आसमान के नीचे आ गये हैं. वही दूसरी ओर सिंहनान पंचायत के सिंहनान व धोवीडीह के अलावे चकरोशन गांव में भी आग ने अपना कहर बरपाते हुए करीब 10 घरों को जलाकर राख कर दिया. सिंहनान गांव में शंकर मंडल व रामू मंडल, वहीं धोबीडीह गांव में कम्बो हरिजन, शंभु दास, शंकर दास, कामेश्वर दास,चकरोशन गांव में लालमोहन यादव का घर पूरी तरह जलकर राख हो गया. इन चारों गांव में घटी अगलगी की घटना में करीब 10 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जलने का अनुमान लगाया जा रहा है. इन चारों गांव में घटित आगलगी की घटना में पीड़ितों को प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल सकी है.
धोरैया में लगातार बढ़ रही है बाल मजदूरों की संख्या
गरीबी की चक्की में पिस रहा बचपन, बेकार साबित हो रहीं बाल मजदूरों के पुनर्वास की योजनाएं
धोरैया : धोरैया प्रखंड में बाल श्रमिकों की संख्या दिन प्रतिदिन घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है़ निर्धारित आयु के बच्चों को काम पर नहीं लगाने, उनके पुनर्वास एवं शिक्षा आदि संबंधी प्रावधानों को ठेंगा दिखाकर यहां बड़े पैमाने पर बाल श्रमिकों का शोषण जारी है़ सरकार ने बाल श्रमिकों की मुक्ति एवं पुनर्वास के उदेश्य से कई कानूनों का विनियमन किया है़ सर्वोच्च न्यायालय ने भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कर उनके पुर्नवास एवं शिक्षा हेतु कई निर्देश दिये हैं.
बावजूद इसके धोरैया में बाल श्रम कानून की धज्जियां उड़ रही है. तभी तो पढ़ने वाले बच्चे क्षेत्र के होटलों में काम कर रहे हैं. जिस उम्र में बच्चों को पढ़ना चाहिए उस उम्र में घर चलाने के लिये बच्चे जूठन साफ करते हैं या फिर मोटर, गैरेज व ऑटो जीप में खलासी का काम़ यह कड़वा सच धोरैया प्रखंड क्षेत्र में आंखों से देखा जा सकता है़ तन पर मैले-फटे कपड़े पहने ऐसे बाल मजदूरों को कोई अठन्नी, चौवन्नी, मोटू, पेटू आदि नाम से पुकारते हैं.
घर चलाने को करनी पड़ती है मजदूरी
होटल में काम करने वाला ग्यारह वर्षीय सोनू बताता है कि पिताजी की कमाई से घर नहीं चलता. इसलिए मुझे भी काम करना पड़ता है़ ऐसे में सोनू अकेला नहीं है बल्कि उसके जैसे सैकड़ों हैं जो होटलों में बाल मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं. गरीबी के कारण इन बालकों की स्थिति ऐसी है कि सुबह से देर रात तक दुकानदार कम मजदूरी देकर काम करवाते हैं और रात में अगर सोने के समय भी कोई ग्राहक आ जाता है तो इन बच्चों को काम पर लगा देते हैं.
इधर, दुकानदार मालिक बताते हैं कि आजकल बालिग नौकर कहां मिलता है़ अगर मिल भी जायें तो उसका मासिक अधिक होता है़ ऐसे में बच्चों से ही काम लिया जाता है़ यानि काम बड़ों का और मजदूरी छोटी दी जाती है़ बाल श्रमिकों की स्थिति देख तब हैरतअंगेज में पड़ जायेंगे जब गर्मी व ठंड में भी बच्चे माथे पर ईंट ढोते ईंट भट्ठों पर नजर आयेंगे़ जिन्हें देखने वाला कोई नहीं है़
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