लाइलाज है शहर में जाम की समस्या

Published at :12 Mar 2016 5:14 AM (IST)
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लाइलाज है शहर में जाम की समस्या

अतिक्रमण व जाम से जूझ से शहर में लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गयी है. अपने गंतव्य को निकले लोग देर पहुंचते हैं. कई लोगों के काम नहीं हो पाते. लेकिन लेकिन इस रोजमर्रा की समस्या को सुलझाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जाती. योजनाएं बनती हैं, लेकिन उसे ठीक से कार्य रूप […]

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अतिक्रमण व जाम से जूझ से शहर में लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गयी है. अपने गंतव्य को निकले लोग देर पहुंचते हैं. कई लोगों के काम नहीं हो पाते. लेकिन लेकिन इस रोजमर्रा की समस्या को सुलझाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जाती. योजनाएं बनती हैं, लेकिन उसे ठीक से कार्य रूप नहीं दिया जाता.

बांका : जाम की समस्या बांका शहर के लिए लाइलाज मर्ज बन चुकी है. शायद ही कोई दिन हो जब इस शहर के लोग जाम से रू- ब- रू न हुए हों. जाम की वजह से शहर की जिंदगी दिन में कई अवसरों पर ठहर जाती है. दिन में लोग बाजार निकलने से घबराते हैं. शहर का कचहरी मार्ग और इससे जुड़े शिवाजी चौंक व गांधी चौंक के अलावा अलीगंज रोड, कटोरिया रोड तथा पुरानी ठाकुरबाड़ी रोड रोजमर्रा जाम का केंद्र बने हुए हैं. शहर में जाम की गहराती समस्या से निपटने में प्रशासन भी हथियार डाल चुका है. शहर में जिंदगी की गति भगवान भरोसे है.
लोगों का मानना है कि यह समस्या संकरी सड़कों की वजह से कायम हुई है. रही सही कसर इन सड़कों के अतिक्रमण ने पूरी कर दी है. शहरवासी त्राहिमाम कर रहे हैं और प्रशासन लाचार बना हुआ है.
अतिक्रमण बना मुख्य कारण: शहर की सड़कें एक तो बेहद संकीर्ण हैं, ऊपर से बेतहाशा अतिक्रमण ने इसे और दुरुह बना दिया है. शहर के कचहरी मार्ग पर एक साथ दो बड़ी बस या ट्रक आमने सामने से आ जा नहीं सकते. ऐसी स्थिति होने पर एकाएक जाम लग जाती है. यहां लगने वाली जाम कई कई घंटे तक कायम रहती है. शहर की सड़कों पर वाहन लेकर चल रहे लोग भी अपने जिम्मेदारी भूल जाम को और गंभीर बनाते चले जाते हैं. जाम से निपटने को मौके पर कोई सुरक्षाकर्मी तक नहीं दिखते.
सिर्फ दिखावे के लिए हैं ट्रैफिक गार्ड : कहने को यहां दोनों प्रमुख चौराहे गांधी चौंक एवं शिवाजी चौंक पर ट्रैफिक गार्ड तैनात रहते हैं. लेकिन उनकी तैनाती क्यों है और कि उनकी जिम्मेदारी क्या है वे खुद नहीं जानते. ऐसे में जाम की अवधि और इसकी गंभीरता समय के साथ तय होती है. शहर में नो इंट्री का भी कोई मतलब नहीं रह गया है. कोई बायपास रोड नहीं रहने की वजह से यातायात का संपूर्ण दबाव कचहरी रोड पर ही पड़ता है. यह सब ट्रैफिक गार्ड की मौजूदगी में होता है.
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