एनजीओ नहीं पहुंचा रहा है मध्याह्न भोजन

Published at :15 Dec 2015 9:17 PM (IST)
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एनजीओ नहीं पहुंचा रहा है मध्याह्न भोजन

बांका : भारत सरकार द्वारा पूरे भारत को शिक्षित करने के लिए कल्याणकारी व लाभकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मध्याह्न भोजन योजना को बनाया था. ताकि गरीब परिवार के बच्चे की पढ़ाई यथावत रहे. सरकार को लगा था कि कई बच्चे इस लिए विद्यालय नहीं पहुंचते है कि उनके पास भोजन की […]

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बांका : भारत सरकार द्वारा पूरे भारत को शिक्षित करने के लिए कल्याणकारी व लाभकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मध्याह्न भोजन योजना को बनाया था. ताकि गरीब परिवार के बच्चे की पढ़ाई यथावत रहे. सरकार को लगा था कि कई बच्चे इस लिए विद्यालय नहीं पहुंचते है कि उनके पास भोजन की समस्या रहती है. जिस कारण बच्चे विद्यालय नहीं पहुंचे है. विद्यालय में शत प्रतिशत बच्चे की उपस्थिति को लेकर सरकार ने योजना को धरातल पर उतारा था.

लेकिन इस जिले में योजनाओं की धज्जी उड़ रही है. वीएसएस द्वारा शत प्रतिशत बच्चे को दिया जा रहा है भोजनविद्यालय शिक्षा समिति ने जो अपना आंकड़ा दिया है उसमें शत प्रतिशत बच्चे को एमडीएम उपलब्ध कराने का दावा किया है. सरकारी वेबसाइट पर विद्यालय शिक्षा समिति के द्वारा जो आंकड़े अपडेट किये गये है उसमें जमीनी सच्चाई सामने आ रही है. विद्यालय शिक्षा समिति के द्वारा जो आंकड़ा पेश किया गया है

उसमें से वर्ग एक से लेकर आठ तक के 29 लाख 66 हजार 715 बच्चे को माह अक्टूबर में भोजन उपलब्ध कराया गया है. यानी रोजाना एक लाख 23 हजार 630 बच्चे को भोजन उपलब्ध कराया गया था. यानी प्रत्येक विद्यालय में करीब 66 बच्चे को रोजाना भोजन उपलब्ध कराया गया.

कई बच्चे भी हुए हैं बीमारजिले में चल रही मध्याह्न भोजन में बौंसी, अमरपुर और धोरैया के बच्चे बीमार भी हो चुके है. जांच के दौरान कई स्थानों पर भोजन में क्रीड़े मिलने की शिकायत मिली थी. जिसके बाद शिक्षकों पर कार्रवाई भी की गयी. कई बार भोजन में मिला है कीड़ामध्याह्न भोजन में पूरे जिले के कई विद्यालय से बार बार कीड़े मिलने की शिकायत मिलते रहती है.

कई बार शिक्षक उक्त भोजन से कीड़े निकाल कर बच्चे को खिला देते है. तो कहीं भोजन को फेंक देते है लेकिन कई स्थानों पर बच्चों के द्वारा हंगामा भी किया जाता रहा है. अब तक बाराहाट का नहीं हुआ है टेंडरएसएफसी के गोदाम से प्रत्येक विद्यालय में चावल पहुंचाने के लिए अब तक जिले के ग्यारहों प्रखंडों में टेंडर पूरा नहीं किया गया है.

दस प्रखंड में टेंडर पूरा हो चुका है लेकिन बाराहाट में अब तक पूरा नहीं किया गया है. सारणी के अनुसार नहीं मिलता है भोजनसारणी के अनुसार अधिकांश विद्यालय में एमडीएम नहीं दिया जाता है. ग्रामीण इलाकों में भीएसएस के द्वारा जो मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है उसमें प्राय: खिचड़ी दिया जाता है.

कभी दाल, चावल और चोखा तो कभी सोयाबीन और चावल दिया जाता है. विद्यालय शिक्षा समिति द्वारा उपलब्ध आंकड़ामाह®जिले में विद्यालय®कितने विद्यालय में जा रहा है भोजन®वर्ग 01 से 5®वर्ग 6 से 8®प्रतिशतनवंबर: 1980: 1678: 2453061: 948462: 90.51अक्तूबर: 1980: 1854: 2115476: 851239: 100सितंबर: 1980: 1854: 2815518: 1182404: 100एनजीओ द्वारा उपलब्ध भोजनमाह: विद्यालय: उपलब्ध भोजननवंबर: 60: 0अक्तूबर: 60:0सितंबर: 60:0कहते हैं

अधिकारी : पूरे जिले में मध्याह्न भोजन चल रहा है. एक दो विद्यालय में चावल की कमी के कारण एक दिन बंद हो सकता है. बराबर विद्यालय का निरीक्षण कर सारणी के अनुसार मध्याह्न भोजन देने का निर्देश दिया जाता है. सुशीला शर्मा, डीपीओ, एमडीएम, बांका

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