बड़े शौक से सुन रहा था जमाना, तुम्हीं सो गये..
जमुई: पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह उर्फ दादा का जन्म गिद्धौर क्षेत्र स्थित नयागांव में 14 नवंबर 1953 को हुआ था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा गिद्धौर में ही हुई थी. दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद वे आगे की शिक्षा पटना से किया . पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात […]
जमुई: पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह उर्फ दादा का जन्म गिद्धौर क्षेत्र स्थित नयागांव में 14 नवंबर 1953 को हुआ था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा गिद्धौर में ही हुई थी. दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद वे आगे की शिक्षा पटना से किया . पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. पीएचइडी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सन् 1989 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से छात्र संघ का चुनाव लड़ा और भारी मतों से महासचिव के पद पर विजयी हुए. महासचिव का चुनाव जीतने के बाद वे पहली बार 1990 में राज्यसभा के सदस्य के रूप में चुने गये. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के पश्चात ही सन् 1990 में वे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह की सरकार में पहली बार उप वित्त मंत्री बने तथा कुछ दिनों तक राज्य मंत्री के प्रभार में भी रहे. इसी दौरान तत्कालीन उप राष्ट्रपति स्वर्गीय भैरो सिंह शेखावत के संपर्क में आये और ताउम्र उनसे बहुत प्रगाढ़ संबंध रहा. स्व दादा सर्वप्रथम बांका लोकसभा संसदीय क्षेत्र से सन् 1991 में चुनाव लड़ा. तत्पश्चात 1996 में उन्होंने बांका लोकसभा क्षेत्र से सांसद का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा. वे पहली बार सन् 1998 में बांका लोकसभा से सांसद के रूप में निर्वाचित हुए. सन् 1999 में उन्होंने पुन: बांका संसदीय क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और सांसद के रूप में निर्वाचित हुए. सन् 1999 में बांका से सांसद बनने के पश्चात वे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में बनी राजग सरकार में रेल राज्य मंत्री बने और पुन: विदेश राज्य मंत्री व उद्योग राज्य मंत्री भी बने. जिले को राष्ट्रीय स्तर पर एक नयी पहचान दिलाने के लिए उन्होंने दुर्गा पूजा के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंद्ध परिषद के सहयोग से गिद्धौर महोत्सव नामक भव्य सांस्कृ तिक कार्यक्रम की शुरुआत की. इस कार्यक्रम में देश के मशहूर गायकों को भी शिरकत करवाया. जिले के लोगों को मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने हेतु देश के ख्याति प्राप्त चिकित्सकों के सहयोग से उन्होंने 2001 से स्वास्थ्य मेला का शुभारंभ गिद्धौर में किया. सन् 2004 में उन्हें बांका लोकसभा से सांसद के चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा. लेकिन मिलनसार प्रवृत्ति के कारण उन्हें ही झारखंड से राज्यसभा सदस्य के रूप में चुन लिया गया. अपने जीवनकाल में जिले के विकास हेतु कई जनोपयोगी कार्य किये और जमुई व गिद्धौर स्टेशन पर कई ट्रेनों का ठहराव भी करवाया. वे हमेशा लोगों की सेवा व मान-सम्मान के लिए प्रयासरत रहे. सन् 2009 में वे बांका लोकसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और अपनी जनप्रिय छवि के कारण भारी मतों से सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे.
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