एक गांव में एक चापाकल

Published at :18 Oct 2015 10:16 PM (IST)
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एक गांव में एक चापाकल

एक गांव में एक चापाकल फोटो : 18 बांका 5 : गांव में सड़कों की स्थिति, 18 बांका 6 : एक मात्र चापाकल, 18 बांका 7 : अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र के अलावे परिचर्चा की तसवीर : 8 :बह्मदेव मांझी9: मुलखी देवी10: भागीरथ मांझी, 11: गुल्ली मांझी12 : बोहरी देवी13: मंजू देवी14 : बसंती देवी15 […]

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एक गांव में एक चापाकल फोटो : 18 बांका 5 : गांव में सड़कों की स्थिति, 18 बांका 6 : एक मात्र चापाकल, 18 बांका 7 : अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र के अलावे परिचर्चा की तसवीर : 8 :बह्मदेव मांझी9: मुलखी देवी10: भागीरथ मांझी, 11: गुल्ली मांझी12 : बोहरी देवी13: मंजू देवी14 : बसंती देवी15 : सुमनी देवी16 : रीता देवी17 : श्रीदेवी एक ओर जहां अब दुनिया चांद पर जाने की बात कह रही है वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत वार्ड नंबर एक के पथरा गांव में सरकारी योजना नहीं के बराबर पहुंच रहा है. इस गांव की सड़कें खुद ही सरकारी दावे को आइना दिखाने के लिए काफी है. कहने को तो यह नगर पंचायत में है लेकिन यह सुदूर गांव से भी बदतर है. इस गांव में नाली नहीं है और न ही पानी के लिए दूसरा चापाकल है. पहले चापाकल से भी पानी न के बराबर ही निकलता है. ऐसे में यहां के लोगों को कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है. प्रतिनिधि, बांका सरकार लाख दावा कर ले कि गांव-गांव तक विकास हुआ है लेकिन पथरा गांव के लोगों के अनुसार यह दावा उनके गांव में आकर फेल हो जाता है. गांव तक पहुंचने के लिए जो सड़क 1990 में बनी थी आज वह फाइलों के चक्कर में बरबाद हो रही है. उस सड़क को बचाने के लिए ग्रामीण लगातार जिला प्रशासन का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई समुचित उपाय नहीं हुआ है. महादलित परिवार के अधिकांश लोग रहते हैं इस गांव में नगर पंचायत वार्ड नंबर 1 के पथरा गांव में अधिकांश लोग महादलित परिवार के हैं. इस गांव में रह रहे महादलित परिवार के अनुसार उनके गांव में करीब तीन सौ महादलित हैं. इसमें से अधिकांश लोग रोजगार के लिए दिल्ली और मुंबई जाते रहते हैं. सबसे खास बात यहां पर यह है कि इस परिवार के लोगों में कोई काफी शिक्षित हैं तो कइयों ने विद्यालय का मुंह नहीं देखा है. क्या क्या है समस्या इस गांव में दस वर्ष पूर्व ही एक सरकारी चापाकल लगा है. इसके अलावे लोग पीने के पानी के लिए कुएं पर निर्भर रहते हैं. जो चापाकल है उसमें यह समस्या है कि दो बाल्टी पानी लेने के बाद एक घंटे तक फिर पानी नहीं निकलता है. इस गांव में एक भी शौचालय नहीं है. गांवों में बिजली पहुंची है लेकिन नगर पंचायत द्वारा पोल पर जल्दी बल्व नहीं लगाया जाता है. अब तक नहीं बना है आंगनबाड़ी केंद्र भवनआंगनबाड़ी के लिए जो भवन का निर्माण हो रहा था उसे 2010 में ही पूरा होना था लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ है. ग्रामीणों के अनुसार जब केंद्र का निर्माण हो रहा था उस वक्त गांव के लोग यज्ञ में व्यस्त थे. उसी दौरान संवेदक ने भवन निर्माण में अनियमितता कर दी. जिसके विरोध के बाद से ही केंद्र का निर्माण नहीं हुआ है. क्या कहते हैं ग्रामीण ब्रह्मदेव मांझी, मुलखी देवी, भागीरथ मांझी, गुल्ली मांझी, बोहरी देवी, मंजू देवी, बसंती देवी, सुमनी देवी, रीता देवी, श्री देवी आदि ने बताया कि उन लोगों को अब तक इंदिरा आवास नहीं मिला है. गांवों में एक भी पक्की सड़क नहीं है. वहीं सुदिन मांझी, मक्कर मांझी, लूथर मांझी, किशोर मांझी, शंकर मांझी, मंजो देवी, लुलखी देवी, दिलीप मांझी, दशरथ राउत, सुमन देवी, कोकन मांझी आदि ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिया गया लेकिन अब तक शौचालय के लिए सरकार द्वारा पैसे नहीं दिये गये. क्या कहते हैं अधिकारी इस संबंध में बीडीओ मनोज कुमार ने बताया कि नगर पंचायत में इंदिरा आवास व शौचालय का निर्माण नहीं कराया जाता है.

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