आशीष हत्याकांडः नौ अभियुक्त दोषी करार

Updated at : 12 Jun 2014 6:34 AM (IST)
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आशीष हत्याकांडः नौ अभियुक्त दोषी करार

बांकाः शहर के बहुचर्चित आशीष हत्या कांड के नौ अभियुक्तों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. अपर जिला व सत्र न्यायाधीश तदर्थ न्यायालय फस्र्ट ने सुनवाई के बाद अभियुक्तों को दोषी करार दिया.सजा पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 19 तारीख निर्धारित की है. मालूम हो कि संत जोसेफ स्कूल, बांका के नौवीं कक्षा […]

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बांकाः शहर के बहुचर्चित आशीष हत्या कांड के नौ अभियुक्तों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. अपर जिला व सत्र न्यायाधीश तदर्थ न्यायालय फस्र्ट ने सुनवाई के बाद अभियुक्तों को दोषी करार दिया.सजा पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 19 तारीख निर्धारित की है. मालूम हो कि संत जोसेफ स्कूल, बांका के नौवीं कक्षा के छात्र आशीष की अपहरण करने के बाद हत्या कर दी गयी थी.

क्या है मामला : शहर के जगतपुर मुहल्ले में बसे जय जय राम सिंह के इकलौते पुत्र आशीष कुमार की हत्या अपराधियों ने अपहरण करने के बाद कर दी थी. आशीष कुमार संत जोसेफ स्कूल के नौवीं कक्षा का छात्र था. 28 नवंबर 2012 को वह अपने दोस्त के घर जाने के लिए निकला था कि अपराधियों ने उसका अपहरण कर लिया.

अपहरण के बाद फिरौती के रूप में अपराधियों ने आशीष के घरवालों से पांच लाख रुपये फिरौती की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे बरामद करने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस को कामयाबी नहीं मिली. पुलिस ने 15 दिसंबर को अपहृत छात्र की सिर कटी लाश जमुई के बटिया जंगल से बरामद की थी. पुलिस ने लाश के साथ-साथ हत्या में शामिल तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था.

कितने लोगों ने दी गवाही : करीब दो साल तक चले इस मामले में डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों ने गवाही दी थी, जिसमें आशीष के पिता जय जय राम सिंह, पूर्णिया की प्रमीला देवी, मधेपुरा के लाल बहादुर सिंह, जगतपुर के आनंद राय, दो चिकित्सक आदि शामिल हैं.कार्तिक यादव को किया गया बरी : दस आरोपियों में से कार्तिक यादव को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में मामले में संलिप्तता नहीं पाते हुए बरी कर दिया.

किसने लिया बहस में भाग : मामले की सुनवाई व बहस में अभियोजन पक्ष की ओर से सुबोध झा और आरकेपी सिंह तथा बचाव पक्ष की ओर से ज्योर्तिनदन झा, रामकिशोर यादव, संतोष सिंह, अशोक झा आदि ने भाग लिया.

कोर्ट में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

फैसले को लेकर बुधवार को कोर्ट में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम थे. मामला चर्चित रहने के कारण प्रशासन की ओर से पुलिस जवानों को तैनात किया गया था. सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के साथ-साथ पेट्रोलिंग की भी व्यवस्था थी.

मुख्य विलेन था नंदन

इस मामले का शातिर अपराधी व मास्टर माइंड जमुई जेल में बंद नंदन यादव था. जमुई निवासी नंदन ने ही जेल से इस हत्या कांड की पूरी कथा लिखी थी. जेल से ही मोबाइल के माध्यम से वह पूरी तरह से मामले से जुड़ा था.

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