वाहनों की तेज रफ्तार लील रही है जिंदगी

Published at :18 Jun 2017 5:40 AM (IST)
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वाहनों की तेज रफ्तार लील रही है जिंदगी

शराबबंदी के बाद अब तक हादसों में 108 की मौत शराबबंदी के बाद भी सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या जिस तरह घटनी चाहिए थी वह नहीं देखा जा रहा है. शराब की वजह से सड़क दुर्घटना ज्यादा होती थी़ शराबबंदी का एक उद्देश्य हादसे में कमी लाना भी था. बांका : सूबे में […]

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शराबबंदी के बाद अब तक हादसों में 108 की मौत

शराबबंदी के बाद भी सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या जिस तरह घटनी चाहिए थी वह नहीं देखा जा रहा है. शराब की वजह से सड़क दुर्घटना ज्यादा होती थी़ शराबबंदी का एक उद्देश्य हादसे में कमी लाना भी था.
बांका : सूबे में शराबबंदी के बाद सामाज में कई अनुकूल बदलाव आया है. शराबबंदी के बाद अपराध से लेकर कई घरेलु हिंसा सहित अन्य अापराधिक घटनाओं में कमी भी देखी जा रही है़ लेकिन जिले की मुख्य सड़कों पर दुर्घटना का आंकड़ा चिंताजनक है़ अमूमन लोग यह कहते फिर रहे हैं जब से शराबबंदी हुई है, तब से सड़क दुर्घटना में काफी कमी आयी है. परंतु आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं. शराबबंदी के पूर्व वर्ष 2015 में कुल 176 सड़क दुर्घटना घटित हुई थी़
जिसमें 113 लोगों की जान गयी थी और 105 लोग जख्मी हुए थे. वर्ष 2016 में दुर्घटना में कमी आई और सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या घटकर 88 पर रूक गयी. तो 2016 में 120 लोग जख्मी भी हुए थे. आंकड़ों पर गौर करें तो सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 2016 में घटी है़ फिर भी आंकड़ा चौकाने वाला है. मसलन शराबबंदी के बाद भी सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या जिस तरह घटनी चाहिए थी. वह नहीं देखा जा रहा है. वहीं मार्च 2017 तक 20 लोगों की जान सड़क दुर्घटना में हो गयी है. दरअसल, शराब की वजह से सड़क दुर्घटना ज्यादा होती थी़ शराबबंदी लागू करने का एक उद्देश्य सड़क दुर्घटना में कमी लाना भी था. परंतु शराब से अलग सड़क दुर्घटना के कई और कारण जिले में सामने आ रही है़ लिहाजा आवश्यक जागरूकता के बल पर ही सड़क दुर्घटना पर काबू पाया जा सकता है़
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