बोझ बनी नेत्रहीन सजता खातून की जिंदगी

Published at :07 Jun 2017 6:14 AM (IST)
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बोझ बनी नेत्रहीन सजता खातून की जिंदगी

दिव्यांगता जांच की खातिर सीएस कार्यालय हुई रेफर कटोरिया : अपने मां-बाप की छह संतानों में शामिल सजता खातून (22वर्ष) को खुदा ने भी दुनिया देखने के लिए आंखों में रोशनी दी थी. लेकिन जन्म के करीब दस सालों बाद ही अचानक सजता के दोनों आंखों की रोशनी चली गयी. इसके बाद से ही वह […]

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दिव्यांगता जांच की खातिर सीएस कार्यालय हुई रेफर

कटोरिया : अपने मां-बाप की छह संतानों में शामिल सजता खातून (22वर्ष) को खुदा ने भी दुनिया देखने के लिए आंखों में रोशनी दी थी. लेकिन जन्म के करीब दस सालों बाद ही अचानक सजता के दोनों आंखों की रोशनी चली गयी. इसके बाद से ही वह नेत्रहीन बन कर जी रही है. परेशानी के बारे में पूछने पर ही वह बिलखने लगती है. कहती है कि अब जिंदगी बोझ लगने लगी है. चूंकि उसके पिता उल्फत अंसारी का भी निधन हो गया है.
मां सलिया खातून ही उसकी देखभाल के साथ-साथ भरन-पोषण का कार्य कर रही है. मंगलवार को सजता खातून अपनी मां के साथ रेफरल अस्पताल में आयोजित दिव्यांगता जांच शिविर में भी प्रमाण-पत्र के लिए पहुंची. यहां नेत्र विशेषज्ञ नहीं रहने के कारण उसे जांच के लिए सीएस कार्यालय बांका रेफर कर दिया गया. सजता खातून की मां ने कहा कि दिव्यांगता पेंशन मिलने लगेगी, तो कुछ सहारा भी मिलेगा.
पांच दिव्यांगों की जांच
रेफरल अस्पताल कटोरिया में मंगलवार को दिव्यांगता जांच शिविर का आयोजन किया गया. जिसमें मेडिकल बोर्ड द्वारा पांच दिव्यांगों की जांच हुई. दो दिव्यांगों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्रदान करने की अनुशंसा की गयी. एक नेत्रहीन दिव्यांग सजता खातून को बांका रेफर किया गया.
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