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पौधे लगाकर की नयी परंपरा की शुरुआत

Updated at : 18 Nov 2025 3:49 PM (IST)
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पौधे लगाकर की नयी परंपरा की शुरुआत

बेढ़ना गांव में समाजसेवी श्रीराम प्रसाद के निधन के बाद ग्रामीणों ने की पहल

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बेढ़ना गांव में समाजसेवी श्रीराम प्रसाद के निधन के बाद ग्रामीणों ने की पहल फोटो नंबर-1-पौधारोपरण करते समाजसेवी प्रतिनिधि, औरंगाबाद ग्रामीण रफीगंज प्रखंड के बेढ़ना गांव में समाजसेवी श्रीराम प्रसाद के निधन के बाद ग्रामीणों ने एक ऐसी पहल की है, जो न केवल सामाजिक परंपराओं को नया रूप देती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है. गांव के लोगों ने पारंपरिक अंतिम संस्कार की रीति में बदलाव करते हुए बरगद और पीपल का पौधा लगाकर एक नयी परंपरा की शुरुआत की है. ग्रामीणों के अनुसार, हिंदू मान्यता में अंतिम संस्कार के बाद पीपल के पेड़ पर घंटिका टांगी जाती है और जो व्यक्ति मृतक को मुखाग्नि देता है, वही कुछ दिनों तक उस घंटिका में पानी देता है. लेकिन, बेढ़ना गांव के लोगों ने इस परंपरा पर पुनर्विचार किया और कहा कि इस विधि का पर्यावरणीय दृष्टि से कोई विशेष लाभ नहीं होता. इसलिए उन्होंने एक नयी सोच अपनायी. पीपल और बरगद का पौधा लगाकर 12 दिनों तक उसी पौधे में पानी देने का फैसला लिया. ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना मृतक के प्रति श्रद्धांजलि देने का अधिक सार्थक तरीका है, क्योंकि इससे पर्यावरण भी सुरक्षित होता है और भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ हवा मिलती है. इस निर्णय के पीछे गांव के कई लोगों की सक्रिय भागीदारी रही. इस पहल में मुख्य रूप से मुखिया रामप्रसाद सिंह, सत्येंद्र मेहता, राजेंद्र सिंह, नरेश कुमार, रामजी मेहता, गांधी मेहता, सुरेश कुमार सक्सेना, अरविंद कुमार वर्मा, शंभू शरण, अरुण कुमार रंजन, मनोज कुमार, ऋषि कुमार, रंजन कुमार, सुजीत कुमार, हिमांशु, नैतिक राज, सुशील, भीष्म, विपिन, चंदन, प्रभात, दीपक, अनुज, ललन व बंटी आदि ग्रामीणों ने भूमिका निभायी. इन सभी का कहना है कि यह नयी परंपरा अब गांव की स्थायी संस्कृति बनेगी और हर परिवार इस नियम का पालन करेगा. अन्य गांवों के लिए मिसाल बनेगी प्रेरणा ग्रामीणों ने बताया कि समाजसेवी श्री प्रसाद का जीवन स्वयं सामाजिक कार्यों और जनसेवा के लिए समर्पित रहा, इसलिए उनके निधन पर पर्यावरण को समर्पित यह नयी परंपरा गांव के लिए एक प्रेरणादायक कदम है. ग्रामीणों का मानना है कि यदि हर गांव ऐसा कदम उठाये, तो समाज में पेड़ों की संख्या बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण का आंदोलन और मजबूत होगा. बेढ़ना गांव की यह पहल अब आसपास के गांवों के लिए भी एक मिसाल बनेगी और लोग इसे एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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