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कभी बेहतर अस्पतालों में होती थी गिनती, अब व्यवस्था चरमराई

Updated at : 19 Sep 2025 5:13 PM (IST)
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कभी बेहतर अस्पतालों में होती थी गिनती, अब व्यवस्था चरमराई

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कुव्यवस्था : एक चिकित्सक के भरोसे चल रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रफीगंज

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कुव्यवस्था : एक चिकित्सक के भरोसे चल रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रफीगंज

रफीगंज. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रफीगंज की चिकित्सकीय व्यवस्था चरमरा गयी है. जिस अस्पताल को कभी जिले के नंबर वन सरकारी अस्पतालों में गिनती होती थी, अब जिले के टॉप टेन अस्पतालों में भी नहीं है. वर्तमान की स्थिति भयावह है. एक चिकित्सक के भरोसे करीब एक माह से अस्पताल चल रहा है. डॉक्टरों के अभाव के कारण मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है. इस वजह से स्थानीय के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. घंटों लाइन में लगने के बाद मात्र दो मिनट भी एक मरीज को चिकित्सक समय नहीं दे पाते हैं. आलम यह है कि प्रतिदिन करीब चार सौ वाह्य मरीजसें का इलाज होता है. सुदूर गांव से आने वाले मरीज सुबह आठ बजे से स्वास्थ्य केंद्र में लाइन में लगते हैं, जिन्हें करीब दो-तीन घंटे बाद ही चिकित्सक से मुलाकात होती है. 10-11 बजे डॉक्टर इलाज के लिए अस्पताल आते हैं और कतार में लगे मरीजों का नंबर आते-आते दो बजे डॉक्टर को उठाने का समय हो जाता है. ऐसे में मरीज काफी परेशान होते हैं और इसका खामियाजा कर्मियों को भुगतना पड़ता है.

12 एमबीबीएस में चार पदस्थापित, तीन गायब

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 12 एमबीबीएस चिकित्सकों का पद सृजित है, जिसमें चार चिकित्सक यहां पदस्थापित हैं. इसमें से एक चिकित्सक प्रिया शाही मातृत्व अवकाश पर हैं. मुरक्षक चिकित्सक जया रॉय डिपटेशन पर सदर अस्पताल में हैं. सदर अस्पताल में सप्ताह के छह दिन ड्यूटी करनी है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार सिंह को सदर अस्पताल का प्रभारी उपाधीक्षक बनाया गया है. ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बजाय सदर अस्पताल को अधिक देखना पड़ रहा है. केवल एक एमबीबीएस चिकित्सक संतोष कुमार को सातों दिन 24 घंटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है.

तीन एंबुलेंस में दो खराब

यही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस का भी अभाव है. तीन एंबुलेंस में दो खराब है. एक एंबुलेंस से ही मरीजों को ढोने का काम किया जा रहा है. अगर मगध मेडिकल गया जी मरीज लेकर जाता है, तो करीब चार घंटे, सदर अस्पताल जाने पर दो से तीन घंटे बाद ही वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आता है.इस बीच कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए और मरीज को रेफर कर दिया जाए तो एंबुलेंस के अभाव में हंगामे के आसार बन जाते है. लगभग हर दिन कुव्यवस्था को लेकर अस्पताल में आक्रोश फूट रहा है. सीएसी में पदस्थापित स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जब से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार सिंह का डिप्टेशन उपाधीक्षक के रूप में हुआ है और यहां से गये हैं भय के माहौल में वे लोग काम कर रह हैं. उनके रहने पर यहां ऐसा कभी नहीं हुआ. कर्मियों ने बताया कि कुछ दिन पहले सांसद अभय कुशवाहा का यहां आगमन हुआ था. उन्हें भी यहां की समस्या से सभी कर्मियों ने अवगत कराया था. सांसद ने आश्वासन दिया था कि जल्द डीएम से बात कर डॉ अरविंद कुमार सिंह को रफीगंज में बुला लिया जायेगा, किंतु अभी तक ऐसा नहीं हुआ. विधासभा चुनाव का माहौल है ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र पर काफी दबाव रहेगा.यही स्थिती बनी रही तो कभी भी बड़ी घटना हो सकती है .

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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By SUJIT KUMAR

SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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