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एक दशक बाद भी अनुमंडल अस्पताल में संसाधनों का अभाव

Updated at : 19 Nov 2025 5:34 PM (IST)
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एक दशक बाद भी अनुमंडल अस्पताल में संसाधनों का अभाव

32 के बजाय सात चिकित्सकों के सहारे चल रहा अनुमंडल अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट दो वर्षों से बंद, चिकित्सीय व्यवस्था में सुधार कराना चुनौती

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32 के बजाय सात चिकित्सकों के सहारे चल रहा अनुमंडल अस्पताल,ऑक्सीजन प्लांट दो वर्षों से बंदचिकित्सीय व्यवस्था में सुधार कराना चुनौती

फोटो नंबर-50- अनुमंडल अस्पताल51-बंद पड़ा ऑक्सीजन प्लांटप्रतिनिधि, दाउदनगर.

करीब एक दशक पहले दाउदनगर में अनुमंडल अस्पताल का उद्घाटन हुआ था, तो लोगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी थी. उद्घाटन के कुछ वर्षों बाद तक जैसे-तैसे संचालन होता रहा, लेकिन बाद के वर्षों में जब संसाधन मुहैया कराये जाने लगे तो लगा कि अब अनुमंडल अस्पताल की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार होगा, लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा है. विधानसभा चुनाव समाप्त हो चुका है. ओबरा विधानसभा क्षेत्र ने अपना नया विधायक भी चुन लिया है. नवनिर्वाचित विधायक डॉ प्रकाश चंद्र ने अपने जनसंपर्क के दौरान अस्पतालों में बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया था. अब उम्मीद की जानी चाहिए कि अनुमंडल अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की दिशा में सकारात्मक पहल हो.

मात्र सात चिकित्सक पदस्थापित

10 वर्षों में भी अनुमंडल अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक और मानव संसाधन पदस्थापित नहीं हो सके. 32 चिकित्सकों का पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में केवल सात चिकित्सक ही पदस्थापित हैं. दो आयुष चिकित्सक हैं. इनमें तीन महिला चिकित्सक शामिल हैं. उपाधीक्षक का पद भी दस वर्षों से प्रभार के सहारे चल रहा है. इन चिकित्सकों में गायनिक चिकित्सक मात्र एक ही है. हड्डी रोग, शिशु रोग, चर्म रोग, इएनटी सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है. एनेस्थीसिया का पद खाली है, जिससे सिजेरियन प्रभावित होता है. यहां पदस्थापित एकमात्र सर्जन सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर हैं. रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है. हालांकि एक महिला चिकित्सक द्वारा महीने में औसतन 6-7 सिजेरियन ऑपरेशन किये जा रहे हैं. अस्पताल में 25 जीएनएम तैनात हैं. कई पद अभी भी खाली हैं, जबकि अनुमंडल अस्पताल में 107 पद स्वीकृत हैं. सूत्रों के अनुसार लगभग आधे पद पूरी तरह रिक्त हैं, जबकि ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं.

लगभग डेढ़ वर्षों से अल्ट्रासाउंड बंद

10 अप्रैल 2024 से अनुमंडल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड पूरी तरह बंद है. कारण यह है कि रेडियोलॉजिस्ट की पदस्थापना नहीं हो पायी. जो महिला चिकित्सक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सप्ताह में दो दिन गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करती थीं, उनके वीआरएस लेने के बाद यह सुविधा भी बंद हो गयी. अल्ट्रासाउंड नहीं होने के कारण मरीजों को निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है, जहां मनमानी राशि की वसूली की जाती है. हालांकि डिजिटल एक्स-रे की व्यवस्था उपलब्ध है.

करीब दो वर्षों से ऑक्सीजन प्लांट बंद

यह अनुमंडल अस्पताल 75 बेडों वाला है और 55 बेडों तक ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा है. कोरोना काल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था, लेकिन यह प्लांट करीब दो वर्षों से खराब पड़ा है. जानकारी के अनुसार प्लांट किसी दूसरे राज्य की एजेंसी द्वारा स्थापित किया गया था. जब एजेंसी से संपर्क किया गया तो बताया गया कि इंजीनियर का विजयवाड़ा से आकर निरीक्षण करना ही 30 हजार रुपये में पड़ेगा. निरीक्षण के बाद ही यह तय हो सकेगा कि कौन-सा उपकरण बदला जाना है. विभागीय स्तर पर इस संबंध में पत्राचार भी किया जा चुका है. अस्पताल में 26 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं, जिन्हें बारुण से रिफिल कराकर काम चलाया जा रहा है. अब प्रश्न यह है कि ऑक्सीजन प्लांट आखिर कब चालू होगा.

56 तरह की होती है जांच

सूत्रों के अनुसार अनुमंडल अस्पताल में 91 प्रकार की पैथोलॉजिकल जांच की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन यहां केवल 56 प्रकार की जांच हो पाती है. इसके पीछे कारण फुली एनालाइजर मशीन का अभाव है. हालांकि राहत की बात यह है कि दवाओं की उपलब्धता संतोषजनक है. लगभग 90 प्रतिशत दवाएं यहां उपलब्ध हैं. सर्पदंश और कुत्ता काटने पर दी जाने वाली सूई आदि भी उपलब्ध हैं.

शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है परिसर

अनुमंडल अस्पताल का मुख्य रास्ता नहर पुल के पास से नहर रोड होते हुए अस्पताल तक जाता है. शाम होते ही यह रास्ता अंधेरे में डूब जाता है. अस्पताल के बाहरी परिसर में भी शाम के बाद अंधेरा फैल जाता है, जबकि मुख्य द्वार के पास ही एएनएम कॉलेज एंड हॉस्टल है. पता चला कि नहर रोड में बिजली विभाग द्वारा पोल और तार लगा दिया गया है, लेकिन स्ट्रीट लाइट अब तक नहीं लग सकी है. इसके लिए नगर परिषद से अनुरोध भी किया गया था. परिसर में हाइ मास्ट लाइट की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है. पूर्व सांसद महाबली सिंह की ऐच्छिक निधि से लगाया गया आरओ प्लांट उपयोगी साबित हो रहा है. कुल मिलाकर अनुमंडल अस्पताल में संसाधनों का अभाव स्पष्ट दिखता है, जिसके कारण इस अनुमंडल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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