नकदी फसल की खेती किसानों के लिए वरदान, किया जा रहा जागरूक

Updated at : 10 Mar 2025 9:46 PM (IST)
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नकदी फसल की खेती किसानों के लिए वरदान, किया जा रहा जागरूक

Aurangabad news. कृषि के क्षेत्र में नकदी फसल की खेती को किसानों के लिए वरदान कहा गया है. जिन क्षेत्रों में ऐसी खेती होती है, वह इलाका समृद्ध हो चुका है.

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दाउदनगर. कृषि के क्षेत्र में नकदी फसल की खेती को किसानों के लिए वरदान कहा गया है. जिन क्षेत्रों में ऐसी खेती होती है, वह इलाका समृद्ध हो चुका है. इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय एवं राष्ट्रीय जूट बोर्ड के सौजन्य से “खलिहान” कृषक सेवा स्वावलंबी सहकारी समिति रेपुरा द्वारा शुरू की गयी है. इसमें रबी और खरीफ फसल के बीच के चार महीने आमतौर पर खेत के खाली होने पर जूट की खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है. इसके लिए इसके कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर किसानों को अभिप्रेरित कर रहे हैं और उनका निबंधन कर रहे हैं. गौरतलब है कि इस पहल की शुरुआत जुलाई 2024 से हुई थी. खलिहान संस्था रेपुरा के प्रयास से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कोलकाता के कृषि वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र का दौरा किया. किसानों के साथ सभा की और शोध रिपोर्ट विभाग को सौंपी. राष्ट्रीय पटसन बोर्ड इस वर्ष पूरे देश में पटसन के उत्पादन के लिए नये क्षेत्र चयनित कर रहा था. कृषि वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर खलिहान रेपुरा का प्रस्ताव भी बोर्ड द्वारा चयन कर लिया गया. इस योजना के तहत किसानों को सब्सिडी पर बीज और कृषि उपकरण मुफ्त में प्रदान किया जायेगा. फसल के बाद जूट के रेशों की खरीद भी भारतीय पटसन निगम द्वारा की जायेगी. गुणवता के आधार पर पटसन के रेशों की अलग अलग श्रेणियां हैं. सरकार हर वर्ष पटसन का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है.

6035 रुपये प्रति क्विंटल थी पटसन की कीमत

शिक्षक अंबुज कुमार सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष सबसे उच्चतम श्रेणी के पटसन की कीमत 6035 रुपये प्रति क्विंटल थी और सबसे निचले श्रेणी की कीमत 4535 रुपये थी. इस वर्ष इससे अधिक एमएसपी होने की पूरी संभावना है. प्रोजेक्ट मैनेजर जियाउल खान, सचिव गया सिंह और अध्यक्ष शांति देवी ने बताया कि “खलिहान” रेपुरा के इस क्रांतिकारी कदम से हजारों किसानों के जीवन में गुणात्मक बदलाव आने की उम्मीद है. इससे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी होगी. आर्थिक समृद्धि उनके सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति को बेहतर बनायेगा. खलिहान के कर्मचारी पूरे इलाके के गांव-गांव में जाकर किसानों से मिलकर उनकी खेती का डाटा लेकर भारतीय पटसन निगम को पहुंचा रहे हैं. सघन जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. गांव-गांव तक अलग-अलग माध्यम से ये संदेश किसानों तक पहुंचाने में खलिहान के कर्मचारी दिन-रात प्रयासरत हैं. इसके साथ ही किसानों के निबंधन का काम भी किया जा रहा है. निबंधित किसानों को ही सरकारी सहायता उपलब्ध होगी. एक छोटे से गांव रेपुरा के चंद किसानों द्वारा निर्मित “खलिहान” कृषक सेवा स्वावलंबी सहकारी समिति अपने इस प्रयास से पूरे इलाके के किसानों की प्रगति का माध्यम बन रहा है.

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