Auranganad News : मॉडल अस्पताल में झूल रहे ताले

Auranganad News: कैसी व्यवस्था : निर्माण कंपनी ने नहीं किया हैंडओवर, उद्घाटन के बाद उम्मीदों पर फिरा पानी
औरंगाबाद कार्यालय़ सदर अस्पताल या यूं कहे मॉडल अस्पताल के नये भवन के निर्माण में 34 करोड़ से अधिक की सरकारी राशि खर्च की गयी. आसमान छूते भवन से औरंगाबाद जिले के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति एक बेहतर उम्मीद भी जगी,लेकिन उदघाटन के बाद भी अस्पताल के नये भवन में व्यवस्थाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया गया. स्थिति यह है कि जी प्लस नाइन सहित अन्य नवनिर्मित भवनों में ताले लटक रहे है. जब अस्पताल के नये भवन की पड़ताल की गयी तो पता चला कि यहां अभी व्यवस्थाओं का आभाव है. ऊंची बिल्डिंग में लिफ्ट की सुविधा बहाल नहीं की गयी है. इससे भी बड़ी बात यह है कि भवन का निर्माण कराने वाली बीएमएसआईसीएल कंपनी ने अभी तक नये भवन को हैंडओवर भी नहीं किया है. ज्ञात हो कि 11 फरवरी को प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदर अस्पताल के नये मॉडल अस्पताल का उदघाटन किया था. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि यहां इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों पर गंभीरता से ध्यान रखा जाये. उदघाटन के साथ अस्पताल की व्यवस्था को सुचारू रूप से प्रारंभ हो जाना चाहिए था,लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उद्घाटन के आठ दिन बाद भी नये भवन से चिकित्सकीय सेवा की शुरूआत नहीं हुई. अन्य जो भवन बनाये गये है उसका भी यही हाल है. तमाम भवनों में ताले लटके पड़े है.यह भी ज्ञात हो कि सदर अस्पताल को 300 बेड के अस्पताल में परिवर्तित किया गया है. अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की बातें कही गयी थी,लेकिन वर्तमान की स्थिति भयावह है.स्वास्थ्य विभाग का एक भी अधिकारी इस मामले में बोलने से परहेज कर रहा है. हर किसी का एक ही कहना है कि मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ही कुछ बता सकते है.
नये भवन में नहीं लगाये गये है एसी
औरंगाबाद जिला हीटवेब के प्रभाव वाला जिला माना जाता है. पिछले कई वर्षों से हीटवेब का कहर दिखते रहा है. सैकड़ों लोगों की जाने हीटवेब की वजह से गयी है .वैसे भी गर्मी का मौसम लगभग प्रारंभ हो गया है. हीटवेब का संभावित मौसम भी दूर नहीं है. हीटवेब से मरीजों को बचाने के लिए कमरों का वातानुकूलित होना आवश्यक है. अस्पताल के जो नये भवन बनाये गये है उसमें एक भी एसी नहीं लगाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर नये भवन को चालू भी करा दिया जाता है तो मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. इसकी जिम्मेदारी कौन उठायेगा.
क्या कहते हैं सीएस
सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सदर अस्पताल के नये भवन में लिफ्ट की व्यवस्था अभी नहीं बनायी गयी है. निर्माण कंपनी द्वारा अभी हैंडओवर भी नहीं किया गया है. इसके लिए पत्र लिखा गया है. फिलहाल दो विभागों को नये भवन में शिफ्ट करने की कोशिशें शुरू है. जल्द ही अस्पताल के नये भवन का लाभ मरीजों को मिलने लगेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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