Aurangabad News : जन्म प्रमाण पत्र के लिए महीनो से भटक रहे लोग

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Aurangabad News: काउंटर से कर्मी गायब,आश्वासन पर चल रही व्यवस्था
औरंगाबाद. सदर अस्पताल के जन्म प्रमाण पत्र काउंटर पर अनियमितता और लापरवाही बरते जाने का मामला सुर्खियों में है. जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दूर-दराज से पहुंचे लोगों को घंटों काउंटर के बाहर इंतजार करना पड़ता है, जबकि संबंधित कर्मी अक्सर काउंटर से गायब रहते हैं. बुधवार को प्रभात खबर की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की तो स्थिति बेहद चिंताजनक पायी गयी. अस्पताल परिसर में दर्जनों लोगों की भीड़ जमा थी. लोग काउंटर खुलने और कर्मियों के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन लंबे समय तक कोई कर्मी वहां मौजूद नहीं मिला. लोगों ने नाराजगी जताते हुए इसका जमकर विरोध भी किया. कई लोगों ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है. पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने छह-छह बार फॉर्म भरकर जमा किया, लेकिन हर बार कर्मियों द्वारा फॉर्म गायब या भूल जाने की बात कह दी जाती है. जब प्रमाणपत्र की मांग की जाती है, तो दोबारा फॉर्म भरने को कह दिया जाता है. इस प्रक्रिया में लोगों का समय, पैसा और ऊर्जा तीनों बर्बाद हो रहा हैं. सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस अनियमितता को लेकर करीब आधे दर्जन कर्मियों को हटाया गया है और कुछ की नौकरी भी जा चुकी है. इसके बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है. सबसे गंभीर आरोप पैसे लेकर प्रमाण पत्र बनाने का है. कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब काउंटर पर भीड़ कम होती है या कोई व्यक्ति अकेला होता है, तो हजारों रुपये की मांग की जाती है. पैसे देने के बावजूद भी प्रमाण पत्र समय पर नहीं बनता. जब काउंटर पर कर्मियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल किया जाता है, तो विभागीय कार्य में व्यस्त होने का हवाला दे दिया जाता है. इस कारण आम लोगों को रोजाना अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है. दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए यह और भी परेशानी का कारण बन रहा है.
24 घंटे में प्रमाण पत्र बनाने का दावा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावा किया जाता है कि बच्चे के जन्म के 24 घंटे या अधिकतम एक सप्ताह के भीतर जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, लेकिन हकीकत यह है कि कई मामलों में दो-दो साल बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है. इतना ही नहीं, कुछ लोगों को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र दिये जाने की भी शिकायत सामने आयी है. आरोप यह भी है कि कुछ आशा दलाल की भूमिका निभा रही हैं. बिना निर्धारित वर्दी के अस्पताल परिसर में सक्रिय ये कर्मी अनजान लोगों को घेरकर पैसे लेकर जल्दी प्रमाण पत्र बनवाने का झांसा देती हैं. पैसे देने के बाद भी परिजन प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहते हैं. पूर्व में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने और पैसे लेने के आरोप में कई कर्मियों पर कार्रवाई भी हुई है, लेकिन इसके बावजूद सिस्टम में सुधार होता नहीं दिख रहा है. लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.हमारे हाथ में कुछ भी नहीं : उपाधीक्षक
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ अरबिंद कुमार सिंह ने जन्म प्रमाण पत्र काउंटर पर हो रही अव्यवस्था को स्वीकार करते हुए कहा कि पहले जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने की जिम्मेदारी डीएस (उपाधीक्षक) के अधीन होती थी. उस समय प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुचारु रूप से चल रही थी, लेकिन पूर्व सिविल सर्जन द्वारा व्यवस्था में बदलाव किए जाने के बाद पूरी प्रक्रिया में परिवर्तन कर दिया गया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने का पूरा अधिकार सिविल सर्जन के अधीन है. लगातार काउंटर से संबंधित शिकायतें मिल रही हैं और आम लोगों में आक्रोश भी देखा जा रहा है. लोगों का गुस्सा जायज है, क्योंकि जन्म प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और इसके लिए लोगों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है. पहले जो कर्मी व्यवस्थित ढंग से कार्य कर रहे थे, उन्हें हटा दिया गया, जिसके बाद से कामकाज प्रभावित हुआ है. वर्तमान व्यवस्था में कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, जिससे विलंब की स्थिति उत्पन्न हो रही है.क्या कहते है सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ कृष्णा कुमार ने बताया कि वे हाल ही में पदभार ग्रहण किये हैं. जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने में अनियमितता और विभिन्न आरोपों की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद पूर्व व्यवस्था में बदलाव किया गया. वर्तमान में जिस कर्मी को इस कार्य में लगाया गया है, वह सिविल सर्जन कार्यालय में भी कार्यरत है, जिससे विभागीय कार्यों के कारण उसकी व्यस्तता बढ़ी रहती है. उसकी अनुपस्थिति में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी द्वारा फॉर्म जमा किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जन्म प्रमाण पत्र का कार्य पूर्व में डीएस के अधीन था और अब भी प्रशासनिक रूप से डीएस ही चार्ज में हैं, लेकिन फिलहाल नियमित (कन्फर्म) डीएस की नियुक्ति नहीं हुई है. डॉ कुमार ने आश्वस्त किया कि जल्द ही मामले पर संज्ञान लेकर व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जायेगा.केस- एक
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के इबनपुर निवासी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सदर अस्पताल स्थित काउंटर का चक्कर काट रहे हैं. हर बार काउंटर पर पहुंचने के बाद कर्मी गायब मिलते हैं. उन्होंने कहा कि काउंटर पर लोगों की लंबी भीड़ लगी रहती है, इसके बावजूद कर्मी अक्सर खाना खाने या अन्य बहाना बनाकर चले जाते हैं. घंटों इंतजार के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती. इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.केस-दो
सिमरा थाना क्षेत्र के अंजनिया गांव निवासी खुशबू कुमारी ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से जन्म प्रमाण पत्र में सुधार के लिए दौड़ लगा रही हैं. वर्ष 2024 में प्रसव के बाद बना प्रमाण पत्र गलत विवरण के साथ जारी कर दिया गया. तब से वे लगातार सुधार के लिए आवेदन दे रही हैं. उन्होंने बताया कि दो बार सुधार की प्रक्रिया हुई, लेकिन फिर भी त्रुटि दोहराई गयी. फॉर्म में जो विवरण भरा जाता है, उससे अलग प्रमाण पत्र बना दिया जाता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जल्द सुधार के नाम पर पैसों की मांग की जाती है. कॉलेज के काम से शहर आने पर वे हर बार सदर अस्पताल जाती हैं, लेकिन काउंटर पर कर्मी अनुपस्थित मिलते हैं.केस -तीन
सदर प्रखंड के भरवार गांव निवासी आमोद कुमार ने बताया कि वह अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई महीनों से प्रयास कर रहा हैं. आवेदन भी जमा कर दिया है, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि जब काउंटर पर कर्मी ही मौजूद नहीं रहते, तो फॉर्म किसके पास जमा करें. उन्होंने व्यवस्था को घोर अनियमित बताते हुए कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जाने वाले दावे धरातल पर कहीं नजर नहीं आता.केस-चार
बिजहर गांव निवासी आजाद कुशवाहा ने बताया कि वह अपने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र में सुधार के लिए कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आज तक सुधार नहीं हुआ. उन्होंने सदर अस्पताल के वरीय पदाधिकारी से भी शिकायत की. वहां से आश्वासन तो मिला कि जल्द ही सुधार कर दिया जाएगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. उन्होंने बताया कि छह बार आवेदन देने के बावजूद हर बार उनका फॉर्म काउंटर से गायब हो जाता है. इससे वे काफी परेशान हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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