खुली सड़क पर लगती हैं दुकानें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Mar 2017 8:28 AM (IST)
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कुव्यवस्था. मांस-मछली बेचनेवालों पर प्रशासन का अंकुश नहीं मानकों की अनदेखी, गंदगी से परेशान हैं शहरवासी औरंगाबाद कार्यालय : औरंगाबाद शहर के प्रमुख पथ पर हर जगह मांस की दुकानें खुल चुकी हैं. रमेश चौक से पुरानी सब्जी मंडी तक एक दर्जन से भी अधिक मुरगों की मांस मुख्य पथ के किनारे स्टॉल लगा कर […]
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कुव्यवस्था. मांस-मछली बेचनेवालों पर प्रशासन का अंकुश नहीं
मानकों की अनदेखी, गंदगी से परेशान हैं शहरवासी
औरंगाबाद कार्यालय : औरंगाबाद शहर के प्रमुख पथ पर हर जगह मांस की दुकानें खुल चुकी हैं. रमेश चौक से पुरानी सब्जी मंडी तक एक दर्जन से भी अधिक मुरगों की मांस मुख्य पथ के किनारे स्टॉल लगा कर बेचे जा रहे हैं. सबसे तो दुखद बात यह है कि नगर थाना के समीप कि सब्जी मंडी में मुर्गा-मांस से लेकर बकरे भी काटे जाते हैं, मछलियां भी बेची जाती हैं. वह भी खुलेआम रूप से.
जबकि मुरगा-मांस, मछली के बिक्री के लिए अदरी नदी के समीप इसकी मंडी बनायी गयी है. इस मंडी में लगभग 25 से 30 दुकानें हैं. लेकिन इन्हीं में से कई दुकानदार अधिक पैसे कमाने की लालच में आकर शहर के सब्जी मंडी और घनी आबादी में मांस की दुकानें खोल दी हैं. इससे हर तरफ गंदगी फैला रहता है. सड़क पर ही मुर्गा के पंख और मछली के छिलके पसरे रहते हैं. मांस की दुकानों के समीप से गुजरते समय निकलनेवाले दुर्गंध से आम लोग परेशान होते हैं. सबसे अधिक परेशानी, तो वैसे लोगों कि है जो शाकाहारी भोजन करते हैं और वे जब सब्जी मंडी में हरी सब्जी खरीदने पहुंचते हैं, तो सब्जी के दुकान के बगल में ही मांस भी बिकता हुआ दिखाई देता है.
प्रशासन की इस व्यवस्था को मन ही मन कोसते रहते हैं, लेकिन आम लोगों की विवशता यह है कि न तो ये मांस की दुकानों को हटा सकते हैं और नहीं मांस बेचनेवालों पर कोई दबाव बना सकते हैं. दो दिन पहले ही सब्जी खरीदने आये एक व्यक्ति के साथ मांस बेचनेवाला उलझ पड़ा था. यह घटना कोई नयी नहीं थी, जो भी मांस बेचनेवालों का विरोध किया, उसका खमियाजा उन्हें उलटी-सीधी बातें सुन कर भुगतना पड़ा है. यह स्थिति है औरंगाबाद शहर के मुख्य पथ की. जहां सब्जी और फल के दुकानों के बीच में मांस की भी दुकानें चलती हैं.
एक वर्ष पूर्व शहर के मुख्य पथ से हटायी गयीं थीं मांस की दुकानें : एक वर्ष पूर्व शहर के लोगों ने मांस की दुकानों को मुख्य पथ और सब्जी मंडी से हटाने के लिए मांग उठाई थी.
लोगों ने इस समस्या को लेकर आक्रोश भी जताया था. तब जाकर जिला प्रशासन ने निर्णय लिया था कि पुरानी जीटी रोड व सब्जी मंडियों से मांस की दुकानों को हटाया जायेगा. प्रशासन द्वारा अभियान चला कर पूरे शहर से मांस की दुकानें को हटा कर अदरी नदी के पास ले जाया गया. इसमें सदर अनुमंडल पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद व तत्कालीन थानाध्यक्ष सोना प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. इससे शहर के लोगों ने काफी राहत महसूस की थी, लेकिन एक बार फिर यह समस्या गंभीर रूप में सामने आयी है.
औरंगाबाद शहर का दुर्भाग्य है ऐसी कुव्यवस्था
औरंगाबाद शहर के लिए दुर्भाग्य है कि फल, मांस और सब्जी एक ही जगह बेचे जाते हैं. ऐसी कुव्यवस्था और किसी शहर में देखने को नहीं मिलती. यह कहना है युवा व्यवसायी राहुल राज का.
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही है प्रमुख वजह
समाजसेवी व एलआइसी कर्मी उमाशंकर प्रसाद का कहना है कि स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण ही शहर के मुख्य पथों पर फिर एक बार मांस की दुकानें चल रही हैं.
सब्जी मंडी से जल्द हटायी जाएं मांस की दुकानें
शहर के ही जाने-माने व्यवसायी नीरज कुमार उर्फ लप्पू गुप्ता ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि सब्जी मंडी से अविलंब मांस की दुकानें हटाया जाएं. इस समस्या शहर में रह रहे लाखों लोगों से जुड़ी है. पर्व-त्योहार के अवसर पर जब लोग फल और सब्जी खरीदने जाते हैं, तो उस जगह मांस बिकता हुआ दिखता है, तो लोगों का मन में घृणा पैदा होती है.
केवल अदरी नदी के समीप ही होंगी मांस की दुकानें
नगर थानाध्यक्ष राजेश कुमार वर्णवाल ने इस समस्या पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की बात कही. साथ ही, यह भी कहा कि दो से तीन दिन के भीतर सब्जी मंडी और मुख्य पथ पर खोली गयी मांस की दुकानों को हटा दिया जायेगा. मांस की दुकानें केवल अदरी नदी के समीप की मंडी में ही होगी. मुख्य पथ के किनारे व सब्जी मंडी में मांस बेचने की इजाजत नहीं है.
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