केस दर्ज होते ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भागे

Published at :26 Feb 2017 6:36 AM (IST)
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केस दर्ज होते ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भागे

कार्रवाई. फर्जी हस्ताक्षर व कागजात से हुई बहाली का मामला औरंगाबाद नगर : स्वास्थ्य विभाग में फर्जी हस्ताक्षर कर कर्मचारियों की हुई बहाली मामले में शनिवार को नगर थाने में सिविल सर्जन डाॅ आरपी सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. यह प्राथमिकी भादवि की धारा 468, 467, 471, 420, 409, 120 बी […]

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कार्रवाई. फर्जी हस्ताक्षर व कागजात से हुई बहाली का मामला

औरंगाबाद नगर : स्वास्थ्य विभाग में फर्जी हस्ताक्षर कर कर्मचारियों की हुई बहाली मामले में शनिवार को नगर थाने में सिविल सर्जन डाॅ आरपी सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. यह प्राथमिकी भादवि की धारा 468, 467, 471, 420, 409, 120 बी के तहत दर्ज करायी गयी है, जिसमें सिविल सर्जन ऑफिस के लिपिक चंदेश्वर चौधरी, रंजीत कुमार के अलावा फर्जी रूप से बहाल कर्मचारी कृष्णा सिंह बारुण परिवार कल्याण कार्यकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,
देवी दयाल सिंह लिपिक देव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सुबोध कुमार चतुर्थवर्गीय कर्मचारी गोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, देवेंद्र कुमार हसपुरा परिवार कल्याण कार्यकर्ता, हरिनंदन मदनपुर प्रसाद बीएचडब्ल्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सरयु प्रसाद चतुर्थवर्गीय कर्मी दाउदनगर, महेंद्र सिंह टीकाकार एसीएमओ कार्यालय औरंगाबाद, वीरेंद्र कुमार वर्मा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रफीगंज, दुलारचंद प्रसाद गुप्ता रेफरल अस्पताल, हसपुरा, राजकुमारी देवी रेफरल अस्पताल, कुटुंबा, सुनीता कुमारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रफीगंज को आरोपित बनाया है. इन सभी लोगों पर सिविल सर्जन ने आरोप लगाया है
कि एक सुनियोजित साजिश के तहत धोखाधड़ी कर उन्हें अंधकार में रख कर जाली एवं फर्जी कागजात के आधार पर कर्मियों द्वारा पूर्ण नियुक्ति पत्र करवाया गया. वहीं वेतन का भी भुगतान करवाया गया. जब इस मामले को निदेशक प्रमुख प्रशासन स्वास्थ्य सेवाएं के ज्ञापांक 7(4) दिनांक 5 जनवरी 2016 को संबंधित पदाधिकारी के हस्ताक्षर को कंप्यूटर विधि से इस्तेमाल किया गया, तो हस्ताक्षर व कागजात जाली पाये गये. इसके बाद संपुष्टि के लिए सिविल सर्जन कार्यालय के पत्रांक 385 ,दिनांक 6 फरवरी 2016 द्वारा निदेशक प्रमुख प्रशासन को जांच के लिए भेजा गया.
इसके बाद निदेशक प्रमुख प्रशासन के पत्रांक 182 (4) दिनांक 17 फरवरी 2016 द्वारा सिविल सर्जन को पत्र प्राप्त हुआ,जिसके आधार पर बहाल हुए सभी स्वास्थ्य कर्मियों को सीएस कार्यालय के पत्रांक 632,दिनांक 1 मार्च 2016 एवं संशोधित ज्ञापांक 781, दिनांक 11 मार्च 2016 द्वारा विभिन्न स्थानों पर पदस्थापित किया गया. लेकिन इस वर्ष फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में निदेशक प्रमुख प्रशासन के ज्ञापांक 7(4) दिनांक 5 जनवरी 2016 एवं संपुष्टि पत्र जिसका पत्रांक 182 (4) दिनांक 17 फरवरी 2016 के बारे में बताया कि दोनों पत्र फर्जी है. इसके बाद सिविल सर्जन ने ज्ञापांक 632 दिनांक 1 मार्च 2016 एवं संशोधित ज्ञापांक 781, दिनांक 11 मार्च 2016 जारी पत्र को रद्द करते हुए बहाल कर्मियों को तत्काल सिविल सर्जन कार्यालय के ज्ञापांक 228,
दिनांक 7 फरवरी 2017 के माध्यम से सेवा समाप्त कर दी. वहीं वेतन को वसूलने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया. इधर इस तरह के फर्जीवाड़े से पूरा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. सिविल सर्जन कार्यालय के दोनों लिपिक चंदेश्वर चौधरी व रंजीत कुमार ऑफिस छोड़ कर फरार हो गये हैं. शनिवार को पूरे दिन कार्यालय में नहीं आये. इधर, इस मामले में तरह-तरह की चर्चा हो रही है. कोई लिपिक को दोष ठहरा रहे, तो किसी ने सिविल सर्जन को.
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