घनी आबादी के बीच लगाये जा रहे मोबाइल टॉवर

Published at :05 Feb 2017 6:27 AM (IST)
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घनी आबादी के बीच लगाये जा रहे मोबाइल टॉवर

मनमानी. दूरसंचार कंपनियाें व नप ने किया नियमों को दरकिनार औरंगाबाद सदर : नियम कानून को ताक पर रख कर शहर में मोबाइल टावर लगाये गये हैं. मोबाइल टावरों के रेडिएशन से आमलोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके चलते टावरों को आवासीय क्षेत्र में लगाने पर रोक है. बावजूद मोबाइल कंपनियाें ने अपनी […]

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मनमानी. दूरसंचार कंपनियाें व नप ने किया नियमों को दरकिनार

औरंगाबाद सदर : नियम कानून को ताक पर रख कर शहर में मोबाइल टावर लगाये गये हैं. मोबाइल टावरों के रेडिएशन से आमलोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके चलते टावरों को आवासीय क्षेत्र में लगाने पर रोक है. बावजूद मोबाइल कंपनियाें ने अपनी मोटी कमाई के लिये घनी आबादी के बीच में ही मोबाइल टावरों को लगा दिया है. औरंगाबाद शहर में ऐसे अधिकांश टावर हैं, जो घनी आबादी के बीच हैं. आगे भी इसके लगाने की प्रक्रिया चल रही है. नगर पर्षद क्षेत्र में लगे कई टावरों का रिकॉर्ड नप में नहीं है. नगर पर्षद ने जितने टावरों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया है और जिसका रिकार्ड उपलब्ध है, उसकी ही गिनती करती है.
नगर पर्षद के पास जो डाटा उपलब्ध है उसमें मात्र 38 मोबाइल टावरों को ही विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया है. नगर पर्षद क्षेत्र में लगे अधिकतर टावर भवन मालिकों की मिलीभगत से गली-मुहल्लों व छतों पर लगाये गये हैं. इससे न सिर्फ लोगों के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि नगर पर्षद के टैक्स की भी खुलेआम चोरी हो रही है. नगर पर्षद से मिली जानकारी के अनुसार मोबाइल कंपनियां टावर लगाने के लिए विभाग में आवेदन देते हैं. उसमें निर्धारित स्थल की भी जानकारी होती है. आवेदन मिलने के बाद अभियंता उस जगह की जांच करते हैं. इसके बाद जांच रिपोर्ट नगर पर्षद को दी जाती है. इस दौरान यह देखा जाता है कि संबंधित स्थान घनी आबादी वाले क्षेत्र में तो नहीं या फिर टावर का भार कहीं क्षमता से अधिक तो नहीं है. नगर पर्षद इसके बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र कंपनी को देती है.
खतरनाक है रेडिएशन
शहर में लगाये गये मोबाइल टावर खतरनाक हैं. इनसे निकलनेवाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से लोगों में चिड़चिड़ापन आ जाती है. नींद नहीं आने की बीमारी सामान्य हो गयी है. मोबाइल टावर के रेडिएशन से पशु-पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं. ऐसा शोध में भी पाया गया है कि कौआ, गौरेया व अन्य कई पक्षियां रेडिएशन के कारण विलुप्त हो रही हैं. मोबाइल टावर के लगने से पहले उसकी जांच होनी चाहिए. .
बमेंद्र सिंह, पर्यावरणविद् सचिव पथ प्रदर्शक
क्या कहते हैं अधिकारी
मोबाइल कंपनी टावर लगाने से पूर्व नगर पर्षद से परमिशन लेती है. किसी कारणवश वह अनुमति नहीं ले पाते हैं, तो टॉवर लगाने के बाद नगर पर्षद को पूरी जानकारी उपलब्ध करायी जाती है. इसके बाद नगर पर्षद के अभियंता स्थल की जांच कर उन्हें लाइसेंस देते हैं. 38 मोबाइल टावरों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है. कुछ प्रक्रिया में है.
भूषण प्रसाद ,प्रधान लिपिक ,नगर पर्षद
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