नहीं लेना है...1973 में नक्सलियों ने औरंगाबाद में पसारा था अपना पांव, सबसे पहले रंधीर सिंह की हुई थी हत्या, लगातार नक्सलियों के निशाने पर रहा है जिला

Published at :09 Jan 2016 10:58 PM (IST)
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नहीं लेना है...1973 में नक्सलियों ने औरंगाबाद में पसारा था अपना पांव, सबसे पहले रंधीर सिंह की हुई थी हत्या, लगातार नक्सलियों के निशाने पर रहा है जिला

नहीं लेना है…1973 में नक्सलियों ने औरंगाबाद में पसारा था अपना पांव, सबसे पहले रंधीर सिंह की हुई थी हत्या, लगातार नक्सलियों के निशाने पर रहा है जिला औरंगाबाद(नगर) औरंगाबाद जिले में नक्सलियों ने अपने पांव आज से 43 साल पहले पसारा था. वर्ष 1973 में मुखिया रंधीर सिंह को कासमा बाजार में हत्या कर […]

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नहीं लेना है…1973 में नक्सलियों ने औरंगाबाद में पसारा था अपना पांव, सबसे पहले रंधीर सिंह की हुई थी हत्या, लगातार नक्सलियों के निशाने पर रहा है जिला औरंगाबाद(नगर) औरंगाबाद जिले में नक्सलियों ने अपने पांव आज से 43 साल पहले पसारा था. वर्ष 1973 में मुखिया रंधीर सिंह को कासमा बाजार में हत्या कर नक्सलियों ने अपना संगठन को आगाज किया था. इसके बाद एक-एक कर लगातार घटना का अंजाम देने में नक्सली सफल हो रहे थे. रफीगंज प्रखंड के कासमा में मुखिया के हत्या करने के बाद मुफस्सिल थाना के परसडीह गांव में दो लोगों की हत्याएं की थी. इस घटना का अंजाम देने के बाद नक्सली रफीगंज थाना क्षेत्र के दरमिया गांव में एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या की थी. इसके बाद मदनपुर थाना क्षेत्र के छेछानी गांव में छह लोगों की हत्या कर पीकेट को उड़ा दिया था. इन घटनाओं के बाद पुलिस नक्सलियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही थी कि 26,27 मई 1987 की रात्री मदनपुर थाना क्षेत्र के ही दलेलचक बघौरा गांव में हमला कर दूधमूंहे बच्चो के साथ 54 लोगों को निर्मम हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद सरकार ने नक्सलियों के विरूद्ध लड़ने की रणनीति बनायी. उस समय से पुलिस प्रशासन की हाथ मजबूत रही और नक्सलियों पर काबू भी पाया गया. लेकिन नक्सलियों ने अपनी हार न मानते हुये संगठन को हमेशा मजबूत करने की प्रयास में रही. वर्ष 1997 में गोह थाना क्षेत्र के भृगरारी मेला में हमला बोलकर छह बीएमपी जवानो दिनदहाड़े हत्या कर दी थी और जवानो के पास रहे हथियारो को लूट लिया था. यह घटना का बड़ा वारदात माना जाता रहा था जो काफी दिनो तक सूर्खियों में था. वर्ष 2003 में माली व सिमरा थाना पर हमला बोलकर थाना भवन को ध्वस्त कर कई पुलिस जवानो के पास से हथियार लूट लिया था. वर्ष 2013 के जुलाई महीने में गोह प्रखंड के एमवीएल कं पनी के बेस कैंप पर हमला बोलकर चार सैफ जवानो सहित छह लोगों की हत्या कर 30 आधुनिक हथियार, हजारो कारतूस लूट लिये थे, साथ ही दर्जनांे वाहनो को जला दिया था. कुछ ही माह बाद खुदवां थाना क्षेत्र के पिसाय गांव जाने वाली पथ में लैंडमाइंस लगाकर नक्सलियों ने जिला पर्षद पति सुशील पांडेय सहित सात लोगों को मौत का घाट उतार दिया था. इस घटना के बाद तत्कालीन एसपी दलजीत सिंह को सरकार ने हटाते हुये उपेन्द्र शर्मा को जिले का एसपी बनाया था, यही नही उपेन्द्र शर्मा को हेलीकॉप्टर से जिला में भेजा था. एसपी उपेन्द्र शर्मा ने नक्सलियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर ही रहे थे कि 3 दिसंबर 2013 को दिन के उजाले में नक्सलियों नवीनगर-टंडवा पथ में लैंडमाइंस लगाकर टंडवा थाना पुलिस जीप के उड़ा था. जीप पर सवार टंडवा थानाध्यक्ष अजय कुमार सहित सात लोग इस बलास्ट में मारे गये थे. दिसंबर में घटना का अंजाम देने के बाद नक्सली कुछ समय के लिये राहत की सांस ली. 2014 मंे जब लोकसभा चुनाव परवान पर चढा तो नक्सली भी परवान पर चढ चूके थे. देव-बालूगंज पथ में बनुआ मोड़ के समीप सड़क मे लैंडमाइंस लगाया. जब सूचना पाकर भलुआही सीआरपीएफ कैंप के डिप्टी कमांडेट इंद्रजीत कुमार, ढिबरा थानाध्यक्ष अमर चौधरी के नेतृत्व में बम को निष्क्रीय करने के लिये पहुंचे तो लैंडमाइंस विस्फोट हो गया था. इस घटना में डिप्टी कमांडेट सहित तीन जवानो की मौत घटनास्थल पर हो गयी थी, जबकि थानाध्यक्ष अमर चौधरी सहित सात लोग गंभीर रूप से जख्मी हुये थे. इसके बाद नक्सलियों ने कई अन्य बड़ी एवं छोटी घटनाओं का अंजाम देने का काम किया.

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