सुखाड़ व बाढ़ में भी होगी अच्छी उपज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Jun 2015 8:45 AM (IST)
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बिहारशरीफ . जिले के किसान हर वर्ष सुखाड़ व बाढ़ की मार ङोलने को विवश हैं. इस कारण उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. इससे किसान खेती से मुंह मोड़ते जा रहे हैं. इस बात को ध्यान में रख कर कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान की तनावरोधी किस्म अनुदान पर उपलब्ध करायी जा […]
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बिहारशरीफ . जिले के किसान हर वर्ष सुखाड़ व बाढ़ की मार ङोलने को विवश हैं. इस कारण उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. इससे किसान खेती से मुंह मोड़ते जा रहे हैं. इस बात को ध्यान में रख कर कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान की तनावरोधी किस्म अनुदान पर उपलब्ध करायी जा रही है. सुखाड़ के लिए धान की सहभागी वेराइटी एवं बाढ़ की स्थिति में स्वर्ण एस वन लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. बदलते मौसम में इन दोनों धान की वेराइटियों का उपयोग किसान बखूबी कर सकते हैं. सूखे की आशंका को देखते हुए सहभागी धान का किस्म किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है, जबकि बाढ़ की स्थिति में स्वर्ण एस वन किसानों के लिए लाभदायक हो सकता है.
सहभागी से कम पानी में अच्छी उपज : ऊंची जमीन व सुखाड़ की स्थिति के धान का सहभागी प्रभेद सबसे उपयुक्त है. यह प्रभेद कम पानी में भी अच्छी उपज देता है. इसमें कीट व्याधि का प्रकोप नहीं होता है. इस प्रभेद के बीज की खरीदारी पर विभाग किसानों को 10 रुपये प्रति किलो अनुदान दे रहा है. 115 से 120 दिन की अवधि वाले इस किस्म की उपज 35 से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.
25 से 30 दिन पानी में डूबने पर भी बढ़िया उपज : निचले स्थानों, जलजमाव वाले क्षेत्रों व बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के लिए स्वर्ण एस वन की किस्म किसानों के लिए उपयोगी है. 25 से 30 दिन पानी में डूबे रहने के बाद भी यह प्रभेद अच्छी उपज देता है. धान की यह वेराइटी भी 115 से 120 दिन में तैयार हो जाती है. उपज 35 से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है. इसके बीज की खरीदारी पर भी किसानों को अनुदान दिया जा रहा है.
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