औरंगाबाद : गवाहों के पहचान नहीं करने पर बरी किये गये नक्सली हमले के 14 आरोपित

Published at :30 Jun 2017 7:07 PM (IST)
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औरंगाबाद : गवाहों के पहचान नहीं करने पर बरी किये गये नक्सली हमले के 14 आरोपित

औरंगाबाद : जिले के गोह के चर्चित जाजापुर एमबीएल कंपनी के कैंप पर नक्सली हमले के आरोपित अदालत से बरी कर दिये गये. एफटीसी-6 विपीन बिहारी पांडेय की अदालत ने गोह थाने में वर्ष 2013 में दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए सभी 14 आरोपित नक्सलियों को गवाहों द्वारा नहीं पहचानने के कारण बरी कर […]

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औरंगाबाद : जिले के गोह के चर्चित जाजापुर एमबीएल कंपनी के कैंप पर नक्सली हमले के आरोपित अदालत से बरी कर दिये गये. एफटीसी-6 विपीन बिहारी पांडेय की अदालत ने गोह थाने में वर्ष 2013 में दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए सभी 14 आरोपित नक्सलियों को गवाहों द्वारा नहीं पहचानने के कारण बरी कर दिया हैं.

साक्ष्य होते हुए भी मामले के गवाह सैप जवानों द्वारा कांड के अभियुक्तों की पहचान नहीं कर सके. अदालत द्वारा आरोपित गोह थाने के खड़गपुरा गांव निवासी रामाशीष पासवान, सहबीर पासवान, खैरा गांव निवासी अनिल सिंह चंद्रवेशी, सिमरुहा गांव निवासी अनिल यादव उर्फ छोटका संदीपजी, सलैया थाने के कमलचक निवासी बिरा दास, रफीगंज थाने के पड़राही निवासी संजय यादव, पौथू थाने के तेमुड़ा गांव निवासी श्रीधर पाठक, गया जिले के आंति थाने के केराप गांव निवासी जितेंद्र दास उर्फ प्रेमरंजन दास, गुरुआ थाने के महादेव स्थान निवासी उमेश यादव, गुरुआ के बनियां गांव निवासी राजेंद्र यादव उर्फ भाष्करजी, कोच थाने के बिजहरी गांव निवासी अनिल यादव, रफीगंज थाने के बीबीपुर गांव निवासी विकास सिंह चंद्रवंशी, बरुणा गांव निवासी शशिभूषण शर्मा, मदनपुर थाने के भगवान बिगहा निवासी सुरेंद्र मेहता बरी किये गये हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपितों के समर्थकों की भीड़ कोर्ट के बाहर मौजूद रही. जैसे ही कोर्ट से बरी किये जाने का फैसला सुनाया गया, आरोपितों एवं समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गयी. बता दें कि 17 जुलाई, 2013 की शाम 6:30 बजे भाकपा माओवादी के हथियारबंद नक्सलियों ने कैंप पर हमला कर तीन सैप जवान एवं दो निजी सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी. साथ ही तीस आधुनिक हथियार एवं भारी मात्रा में कारतूस भी लूट लिये थे. मामले में गोह के तत्कालीन थानाध्यक्ष ऋ तुराज सिंह के बयान पर भादसं की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 324, 353, 379, 380,396, 427, 435, 120बी, 27 आर्म्स एक्ट, विस्फोटक एवं लोकसंपत्ति विरूपण अधिनियम एवं 17 सीएलए एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

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