जीएसटी को लेकर असमंजस में व्यवसायी

Published at :22 Jun 2017 8:58 AM (IST)
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जीएसटी को लेकर असमंजस में व्यवसायी

परेशानी. लोगों को समझ में नहीं आ रहा नया टैक्स सिस्टम, क्रियान्वयन के तरीके की नहीं है जानकारी एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी को अधिकतर व्यवसायी एक अच्छी पहल के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि, नया सिस्टम होने के कारण इसे लागू करने के तरीके को लेकर अिधकतर व्यवसायी घबराये हुए […]

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परेशानी. लोगों को समझ में नहीं आ रहा नया टैक्स सिस्टम, क्रियान्वयन के तरीके की नहीं है जानकारी
एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी को अधिकतर व्यवसायी एक अच्छी पहल के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि, नया सिस्टम होने के कारण इसे लागू करने के तरीके को लेकर अिधकतर व्यवसायी घबराये हुए हैं. लोगों को यह डर सता रहा है कि इससे कहीं व्यवसाय करना और भी मुश्किल न हो जाये.
औरंगाबाद सदर : जीएसटी को लेकर व्यवसायियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. एक जुलाई से यह टैक्स देश के कई राज्यों में एक साथ लागू हो रहा है. ऐसे में पूर्व से देते आ रहे परंपरागत तरीके से टैक्स देते आ रहे लोगों को जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लेकर कई चीजें स्पष्ट नहीं हो पा रही हैं. खासकर ऐसे व्यवसायी, जो कम पढ़े लिखे या कंप्यूटर की जानकारी नहीं रखते, उन्हें तो यह जीएसटी पल्ले भी नहीं पड़ रहा. लेकिन कुछ व्यवसायियों व जानकारों का मानना है कि यह टैक्स भारी भरकम टैक्स के बोझ से मुक्ति दिलायेगा और जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती भी हो जायेंगी. साथ ही, इससे 18 से ज्यादा टैक्सों से मुक्ति मिलने के साथ टैक्स भरने का पूरा सिस्टम आसान हो जायेगा. इन्हीं सब बातो को लेकर बुधवार को शहर के कुछ खास व्यवसायी और टैक्स के जानकारों से बात की गयी.
क्या कहते हैं व्यवसायी
बड़े या छोटे सभी व्यापारियों में इस टैक्स को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है. शुरू-शुरू में रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है, पर इससे हकीकत यह है कि भारी-भरकम टैक्स के बोझ से मुक्ति मिलेगी. फिलहाल, रोज कुछ न कुछ नयी बातें सामने आने से भी व्यापारियों में घबराहट है.
सुनील गुप्ता, जमीन कारोबारी, निदेशक, गिव एंड टेक
जीएसटी के लागू होने में अब ज्यादा दिन नहीं है, लेकिन सचयह है कि लोगों को इसकी पूरी जानकारी नहीं. जब तक इस पर खुल कर चर्चा या कोई बड़ा सेमिनार नहीं होगा, तब तक सारे व्यापारियों को इसे समझने में परेशानी हो सकती है. हालांकि, सरकार का यह फैसला अपनी जगह पर सही है.
अशोक गुप्ता, कपड़ा व्यवसायी, बालाजी ड्रेसेज
व्यापारी चाहते हैं कि लिखा-पढ़ी कम से कम करनी पड़े. अब तक जो व्यापार का ट्रेंड रहा है, उसमें कम पढ़े-लिखे लोग व्यापार को महत्व देते थे और उसके बाद एक परंपरा चली, तो लोग कुछ पढ़ कर व्यापार करने लगे, लेकिन टैक्स की समझ नहीं हो सकी. जीएसटी बहुत सारे टैक्सों से छुटकारा देगी.
पीयूष रंजन उर्फ रिशु, संवेदक सह युवा नेता
व्यापारी जीएसटी से बहुत घबराये हुए हैं, क्योंकि पहले जिस तरह से टैक्स भरा करते थे, वो उन्हें आसान लगता था. इस नयी पद्धति से थोड़ी परेशानी तो होगी, लेकिन जीएसटी से व्यापारियों के टैक्स भरने का सिस्टम सुधर जायेगा और भ्रष्टाचार से भी मुक्ति मिलेगी. एक देश और एक टैक्स पहल अच्छी है.
रिंकू अग्रहरी, फर्नीचर व लकड़ी व्यवसायी
जीएसटी के लागू होने से अभी स्पष्ट नहीं हो सका है कि कंज्यूमर को किन वस्तुओं पर टैक्स में राहत मिलेगी. वर्तमान में केंद्र व राज्य दोनों के अलग-अलग टैक्स हैं. जीएसटी में एक टैक्स होने से थोड़ी सहूलियत होगी. छोटे व्यापारियों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है.
राजेश रंजन उर्फ चुन्नू, मोटरसाइकिल विक्रेता, अभिषेक बजाज शो रूम
जीएसटी के आने से टैक्स चोरी और बढ़ सकती है. केंद्र सरकार को इस पर ठीक से तैयारी करके लागू करने की जरूरत है. टैक्स से बचनेवाले व्यापारी अभी से ही इसके जुगाड़ में लग गये हैं कि जीएसटी के जंजाल से कैसे मुक्ति मिले. कम पढ़े-लिखे व्यापारियों को बहुत दिक्कत हो रही है.
खान इमरोज, जूता व कपड़ा व्यवसायी, सियाराम शो रूम
व्यापारी व्यापार करें या टैक्स ही भरते रहें. जीएसटी के तहत प्रत्येक माह में तीन बार रिटर्न भरने हैं. ऐसे में गलती की संभावना भी बढ़ जाती है. इससे एकल व्यापारियों को थोड़ी परेशानी हो सकती है कि उन्हें अनिवार्य रूप से वकील या मुंशी रखना पड़ेगा. सरकार को जीएसटी पर और काम करने की आवश्यकता है. .
मनीष कुमार, गल्ला व्यवसायी
क्या कहते हैं टैक्स मामलों के जानकार
जीएसटी में एक टैक्स के होने से राहत मिलेगी. व्यापारियों को इसे समझने की जरूरत है. अभी सेंट्रल एक्साइज, सर्विस टैक्स, वैट आदि के लिए अलग-अलग बुक रखनी पड़ती है. नयी व्यवस्था में जीएसटीएन पर एक्सल सीट के रूप में ऑफलाइन टूल मौजूद होगा.
इसे कारोबारी डाउनलोड करके भी रख सकते हैं. कंपोजिशन स्कीम में तीन महीने में एक बार रिटर्न भरना पड़ेगा. सालाना 20 लाख रुपये तक टर्नओवरवालों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है. लेकिन, बिना रजिस्ट्रेशन के इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा. यह पूरा फार्मेट ऐसा है कि इससे टैक्स आफिस जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावे पुराने और परंपरागत टैक्सों से मुक्ति मिलेगी. व्यापारियों को शुरू-शुरू में थोड़ी परेशानी लग रही है, पर इससे घबराने की जरूरत नहीं है. टैक्स को समझने की आवश्यकता है.
सीएस रोहित प्रकाश प्रीत, निदेशक आर प्रकाश एंड एसोसिएट व एडीयाज बिजनेस प्रोफेशनल्स
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