गांधीजी को बिहार से था गहरा लगाव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Jun 2017 9:08 AM (IST)
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चंपारण सत्याग्रह में अनुग्रह बाबू की भूमिका पर हुई चर्चा औरंगाबाद : लोक समिति द्वारा बुधवार को नगर भवन में बुधवार को आयोजित चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में अनुग्रह बाबू की भूमिका पर चर्चा की गयी. कार्यक्रम का उद्घाटन लोक समिति के अध्यक्ष गिरिजा सतीश, राज्यसभा सांसद सह पत्रकार हरिवंश, पत्रकार व लेखक आशुतोष, समाजसेवी […]
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चंपारण सत्याग्रह में अनुग्रह बाबू की भूमिका पर हुई चर्चा
औरंगाबाद : लोक समिति द्वारा बुधवार को नगर भवन में बुधवार को आयोजित चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में अनुग्रह बाबू की भूमिका पर चर्चा की गयी. कार्यक्रम का उद्घाटन लोक समिति के अध्यक्ष गिरिजा सतीश, राज्यसभा सांसद सह पत्रकार हरिवंश, पत्रकार व लेखक आशुतोष, समाजसेवी कौशल कनिष्ठ, छेदी बैठा, शिवजी सिंह, डीडीसी संजीव कुमार सिंह, जिला योजना पदाधिकारी कुमार पंकज, गणेश आचार्य, प्रो टीएन सिन्हा, सेवानिवृत्त शिक्षक जगन्नाथ प्रसाद सिंह ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. साथ ही, मंच पर उपस्थित लोगों ने महात्मा गांधी व अनुग्रह बाबू के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम का संचालन जगन्नाथ सिंह व समापन के दौरान धन्यवाद ज्ञापन लोक समिति सचिव श्रीराम सिंह ने किया.
समारोह के दौरान वरिष्ठ पत्रकार व लेखक आशुतोष कुमार ने कहा कि अनुग्रह बाबू 18 अप्रैल 1917 को चंपारण सत्याग्रह में शामिल हुए थे, तो उन्हें ये जरा भी एहसास नहीं था कि वे इस सत्याग्रह के दौरान गांधी के बेहद करीब हो जायेंगे. अनुग्रह बाबू ने अपने संस्मरण में लिखा है कि गांधी के कभी भी कथनी और करनी में कोई भिन्नता नहीं रही. जो बातें उनके होठों पर रहीं, वहीं बातें उनके दिल में रहा करती थीं.
अनुग्रह बाबू इन्हीं बातों से प्रेरित थे और उनका जीवन व लेखनी सादगी से भरा रहा. लेकिन, ऐसा नहीं कि उनके जीवन में रंग नहीं है. उन्होंने कहा कि चंपारण आंदोलन से बिहार से लोगों को गांधी से गहरा लगाव हो गया था.
यही कारण है कि लोग उनके लिए जेल जाने को भी तैयार हो जाते थे. उन्होंने जाने-माने पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की चर्चा करते हुए कहा कि 1916 में जब गांधी चंपारण को जानते भी नहीं थे, तब उन्होंने अपने एक लेख में कहा था कि गांधी उन लोगों में से हैं, जो न्याय के निर्णय के बाद दोषी को फूल की छड़ी से भी मारना पसंद नहीं करते.
श्री आशुतोष ने कहा कि तीन सितंबर 1917 की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त एक अखबार में नकली गांधी शीर्षक से एक खबर छपी थी, तब गांधी के दूत बन कर और उनकी वेशभूषा पहन कर घूम रहे दर्जनों लोगों को पकड़ा गया था. लेकिन, आज शायद 100 वर्षों बाद भी हम नकली गांधी को पकड़ने में असफल है.
कार्यक्रम के दौरान समारोह में वरिष्ठ पत्रकार निराला,अनुग्रह बाबू के परिवार से जुड़े सदस्य कौशलेंद्र प्रताप नारायण सिंह, राघवेंद्र प्रताप नारायण सिंह, गोकुल सेना अध्यक्ष संजय सज्जन, संजीव सिंह, सीतयोग के चेयरमैन कुमार योगेंद्र नारायण सिंह, जदयू जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह, पूर्व जिप अध्यक्ष पंकज पासवान, सुजीत सिंह, राजीव मोहन पटवर्धन, प्रो विजय, प्रधानाध्यापक उदय कुमार सिंह आिद उपस्थित थे.
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