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प्रैक्टिस की नहीं है व्यवस्था

Updated at : 18 Feb 2017 12:06 AM (IST)
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प्रैक्टिस की नहीं है व्यवस्था

अनदेखी. पहलवानों के लिए नहीं है कोई स्तरीय अखाड़ा जहानाबाद नगर : जिले में कुश्ती के प्रति नौजवानों का रुझान बढ़ रहा है. फिल्म दंगल देखने के बाद छोटे-छोटे बच्चे भी कुश्ती के बारे में जानने लगे हैं. जिले में कुश्ती में भारी संभावना तो नजर आती है लेकिन प्रैक्टिस की कोई व्यवस्था नहीं होने […]

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अनदेखी. पहलवानों के लिए नहीं है कोई स्तरीय अखाड़ा

जहानाबाद नगर : जिले में कुश्ती के प्रति नौजवानों का रुझान बढ़ रहा है. फिल्म दंगल देखने के बाद छोटे-छोटे बच्चे भी कुश्ती के बारे में जानने लगे हैं. जिले में कुश्ती में भारी संभावना तो नजर आती है लेकिन प्रैक्टिस की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण पहलवान अपनी जौहर नहीं दिखा पाते हैं. जिले में हर वर्ष नये पहलवानों की संख्या सामने आ रहा है. जिले के विभिन्न इलाकों अपना जौहर दिखाने वाले ये पहलवान जिले से आगे नहीं बढ़ रहे हैं. बल्कि जिले में ही इनका जौहर खत्म हो जा रहा है. प्रैक्टिस की कोई व्यवस्था नहीं होने तथा पहलवानों के लिए कोई स्तर का अखाड़ा नहीं होने के कारण इनका जौहर मिट्टी में ही दम तोड़ दे रहा है.
जिले के ग्रामीण इलाकों में कई अवसरों पर ये पहलवान अपनी जौहर दिखा कर लोगों की वाहवाही तो लूटते हैं लेकिन ये जिले से आगे नहीं बढ़ पाते हैं. इसके कारण कुश्ती में इनका कैरियर नहीं बन पाता है. हाल के दिनों में विभिन्न फिल्मों में कुश्ती देख नौजवानों के साथ बच्चों का भी रुझान इस खेल के प्रति बढ़ा है लेकिन कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण इनका दावं -पेच धरा- का- धरा रह जाता है. प्रतिभा के साथ शक्ति रहने के बावजूद जिले के पहलवान जिले के बाहर निकलने के बजाय चारों खाने चित हो जा रहे हैं.
जिले में कहीं भी कुश्ती का गुर सीखाने के लिए कोई एकेडमी नहीं है. ऐसे में समाज के बुजुर्गों से दावं-पेच सीखनेवाले पहलवान अपना करिश्मा दिखाने से चूक जा रहे हैं. संसाधनों का अभाव भी उनके रास्ते में रोड़ा बन रहा है. ऐसे में कुश्ती में अपना कैरियर बनाने का सपना देखनेवालों का सपना चूर हो रहा है.
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