आरा के बड़हरा में हजरत हाजी बाबा मिस्टर चमन शाह वारसी का 17वां उर्स, गागर जुलूस में दिखी सामाजिक सौहार्द की मिसाल

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चादरपोशी में उमड़े श्रद्धालु

पूर्वी गुंडी पंचायत के गुंडी गांव में हजरत हाजी बाबा मिस्टर चमन शाह वारसी का 17वां उर्स श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ. इस दो दिवसीय आयोजन में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक साथ शामिल होकर सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की. कव्वाली और भजनों के माध्यम से प्रेम और एकता का संदेश दिया गया.

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Prem Kuti Darbar: बड़हरा प्रखंड अंतर्गत पूर्वी गुंडी पंचायत के गुंडी गांव स्थित प्रेम कुटी दरबार वारिसगंज में हजरत हाजी बाबा मिस्टर चमन शाह वारसी का 17वां उर्स श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. दो दिवसीय उर्स में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक साथ शामिल होकर सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की. इस दौरान दरबार में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.

गाजे-बाजे के साथ निकला गागर जुलूस

उर्स के अवसर पर प्रेम कुटी दरबार से गाजे-बाजे के साथ गागर जुलूस निकाला गया. जुलूस में महिला और पुरुष श्रद्धालु सिर पर कलश और प्रसाद लेकर शामिल हुए. नगर भ्रमण करते हुए जुलूस सूफी संत शामशीन बाबा के मजार पर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने चादरपोशी कर अमन-चैन, खुशहाली और समाज में भाईचारे के लिए दुआ मांगी. इसके बाद जुलूस वापस प्रेम कुटी दरबार पहुंचा, जहां लंगर का आयोजन किया गया. इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया.

सूफी परंपरा से जुड़े थे बाबा

बताया गया कि हजरत हाजी बाबा मिस्टर चमन शाह वारसी सूफी परंपरा से जुड़े बड़े फकीर थे. उनके धर्मगुरु बाराबंकी निवासी हाजी वारिस अली साहब थे. अमेठी निवासी सिद्दीक शाह वारसी और हाजी बाबा करामत अली शाह से जुड़ी सूफी परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने फकीरी का मार्ग अपनाया था. बाबा के अनुयायियों के अनुसार उनके दरबार में हर धर्म और समुदाय के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं.

कव्वाली ने बांधा समां, भजनों से दिया भाईचारे का संदेश

बाबा के पुत्र हाजी दानिश वारसी ने बताया कि उर्दू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष बाबा की पुण्यतिथि पर उर्स का आयोजन किया जाता है. इसमें दोनों समुदायों के लोग उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं. रात में आयोजित महफिल-ए-कव्वाली में बाराबंकी के कव्वाल अरफान वारसी ने सूफियाना कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.

खास बात यह रही कि कव्वाली के साथ रामायण और महाभारत से जुड़े भजनों की भी प्रस्तुति दी गई. भजनों के माध्यम से आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया. देर रात तक दरबार में श्रद्धालुओं और श्रोताओं की भीड़ जुटी रही.

आयोजन में ग्रामीणों ने किया सहयोग

आयोजन को सफल बनाने में कौसेन वारसी, खुर्शीद वारसी, सकलैन वारसी, बुटन सिंह, राय जी सिंह, उपेंद्र सिंह, शिवानंद सिंह, दिनेश यादव उर्फ जाटा, केदार सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहयोग किया.

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संतोष कुमार सिंह

लेखक के बारे में

By संतोष कुमार सिंह

संतोष कुमार सिंह 20 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं. प्रिंट, डिजिटल और प्रमुख मीडिया ऐप्स (न्यूज प्लेटफॉर्म्स) पर काम का अनुभव रखने वाले संतोष की राजनीति, अपराध और धर्म-संस्कृति की खबरों पर पैनी नजर रहती है.

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