तीन साल बाद कोईलवर थाने के मालखाना से परिवार संग मुक्त हुए रामलला

बक्सर के ढकाइच ठाकुरबाड़ी से तीन साल पहले चोरी गयीं अष्टधातु की मूर्तियां कोईलवर से हुई थीं बरामद
कोईलवर.
21 जनवरी, 2023 को बक्सर जिले के ढकाइच ठाकुरबाड़ी से चोरों चुरायी गयीं परिवार संग रामलला की प्रतिमा कोर्ट के आदेश पर कोईलवर थाने के मालखाना से मुक्त हो गयी. 22 जनवरी 2023 की सुबह कोईलवर थाना क्षेत्र के कोईलवर-बबुरा रोड पर जांच के दौरान स्विफ्ट कार से बक्सर जिले के ढकाइच ठाकुरबाड़ी से चुरायी गयीं राम, लक्ष्मण, भरत, मां सीता, हनुमान जी के साथ सात मूर्तियां बरामद हुईं थीं. बरामदगी के तीन साल बाद माननीय न्यायालय के आदेश पर मंगलवार को रामलला अपने परिवार के साथ कोईलवर थाने के मालखाना से मुक्त हो गये. इस दौरान उन्हें लेने ढकाइच से आये ठाकुरबाड़ी के सदस्य और अन्य धार्मिक लोगों के साथ कोईलवर के समाजसेवियों और थाना कर्मियों ने थाना परिसर में रामदरबार की विधिवत पूजा पाठ कर उन्हें विदाई दी.क्या था मामला21 जनवरी 2023 को बक्सर जिला के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र के बड़की ढकाइच के रामजानकी मठ से प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और सीता माता के साथ हनुमान जी और कृष्ण-बलिराम की सात अष्टधातु की प्रतिमा और एक मुकुट चोरी कर ली गयी थी. चोरी की घटना के बाद भागने के क्रम में 22 जनवरी, 2023 की अहले सुबह एक स्विफ्ट डिजायर कार में रखे इन सभी मूर्तियों के साथ मुजफ्फरपुर के मीनापुर थाना क्षेत्र के नयाटोला टेंगराहा निवासी राजमंगल महतो के बेटे दिलकुमार को कट्टे के साथ कोईलवर में पकड़ा गया था. तब से लेकर आज तक कोईलवर थाना के मालखाना में तीन साल से बंद रामदरबार के अष्टधातु की सातों प्रतिमाएं और मुकुट का बेलर मिलने के बाद मंगलवार को सभी प्रतिमाओं को मुक्त कर दिया गया.छह लाख के बेल बांड भरने पर मिली रिहाईसभी प्रतिमाओं के लिए सीजीएम न्यायालय में छह लाख रुपये का बेल बांड भरने के बाद कोईलवर थाना से मुक्त किया गया. बरामद अष्टधातु की इन सभी प्रतिमाओं की कीमत लगभग 80 करोड़ रुपये से अधिक बतायी जा रही है. राम दरबार को मालखाना से मुक्त कराने के लिए बड़का ढकाइच की सरपंच बिंदु देवी और कुसुम देवी ने छह लाख रुपये का बेल बांड भरा है, जिसके बाद न्यायालय ने रामदरबार की प्रतिमाओं को मुक्त करने का आदेश दिया. इसके बाद आदेश की प्रति लेकर ढकाइच के रामजानकी मंदिर के सचिव कन्हैया दुबे, सुधीर दुबे, नवीन कुमार, केस के अधिवक्ता धनेश पांडेय, कोईलवर के सकड्डी निवासी समाजसेवी रौशन बाबा समेत कई धार्मिक लोग कोईलवर थाना पहुंचे. जहां विधिवत मंत्रोच्चार, जयकारे एवं विधि विधान से पूजा पाठ कर उन्हें रामजानकी मंदिर ढकाइच के सदस्यों को सुपुर्द किया गया. इस दौरान रामजानकी मंदिर ढकाइच के सचिव कन्हैया दुबे ने बताया कि सभी प्रतिमाएं शुद्ध अष्टधातु की हैं और तकरीबन डेढ़ सौ किलो वजनी हैं. इनकी स्थापना तीन सौ साल पहले सत्रहवीं शताब्दी में नेपाल के महाराजा ने उक्त मठ में करवायी थी. 2011 में भी हुई थी इसी मूर्ति की चोरी06 जून 2011 को भी कृष्णब्रह्म के ढकाइच के इसी ठाकुरबाड़ी से पुजारी भुवनेश्वर दास की हत्या कर इन्हीं मूर्तियों की चोरी कर ली गयी थी. बाद में तीन आरोपितों को पकड़ा भी गया था. बाद में 2013 में कोईलवर थाना क्षेत्र से ही इन मूर्तियों को लावारिस अवस्था में बरामद किया गया था. मूर्ति बरामद होने के बाद उन्हें सम्मान पूर्वक प्राण प्रतिष्ठा कर 2017 में ठाकुरबाड़ी में स्थापित कर दिया गया था. इनकी सुरक्षा के लिए बीएमपी के चार जवानों की भी ड्यूटी लगायी गयी थी. बाद में मूर्ति की सुरक्षा में लगे जवानों को ठाकुरबाड़ी से हटा लिया गया था. इसी के बाद ताक में बैठे चोरों ने 2023 में एक बार फिर इन मूर्तियों पर हाथ साफ कर दिया. इस बार भी चोरी गयी मूर्तियों को दोबारा कोईलवर में ही घटना के छह घंटे के अंदर बरामद किया गया था. तब खदेड़ कर पकड़े गए चोर दिलकुमार ने अपने साथ 4 और लोगों के रहने की बात बतायी थी. उसने कहा कि सभी मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और गैंग बनाकर ऐसी मूर्तियों की चोरी करते हैं. मूर्तियां चुराने के बाद ये उन्हें नेपाल और अन्य बाजारों में बेच देते हैं. उसने किसी मिथुन नाम के सरगना का नाम उगला था जो चोरी की ऐसी मूर्तियों के बाजार का बड़ा नाम था.
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