आरा की पूर्व सीओ और राजस्व पदाधिकारी समेत चार कर्मियों पर दलित उत्पीड़न का केस

कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी थाने में बुधवार को दर्ज की गयी प्राथमिकी
आरा.
सदर अंचल की पूर्व सीओ पल्लवी गुप्ता और राजस्व पदाधिकारी विमल कुमार गुप्ता समेत चार सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज की गयी है. कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी थाने में बुधवार को चारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. दो अन्य आरोपितों में राजस्व कर्मचारी धर्मेंद्र कुमार और अनिल कुमार पंथ शामिल हैं. सभी पर दाखिल-खारिज करने के लिए शहर के जगदेव नगर मुहल्ला निवासी केस के वादी मनीष कुमार रोशन से रिश्वत मांगने और नहीं देने पर अपने कार्यालय में बुलाकर जाति सूचक शब्द का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया है. गाली-गलौज की घटना पिछले साल जनवरी और फरवरी माह में हुई है. इसे लेकर मनीष कुमार रौशन द्वारा प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह एससी-एसटी के विशेष जज शैलेंद्र कुमार पांडा के कोर्ट में परिवाद दायर किया गया था. उस मामले में कोर्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया था. उस आधार पर पूर्व सीओ और राजस्व अधिकारी सहित चारों कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. एससी-एसटी थानाध्यक्ष बिगाउ राम ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है. मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है.डीसीएलआर के आदेश के बाद भी मांगे गये पैसे, नहीं देने पर खारिज किया गया केस जगदेव नगर निवासी मनोहर लाल राम के पुत्र मनीष कुमार रौशन की ओर से दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि उनकी मां मधु सुचित्रा भारती द्वारा 2015 में मथवलिया मौजा में रामकुमार सिंह से पांच कट्ठा जमीन की खरीद की गयी थी. उसे लेकर सदर अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के लिए 2017 में वाद दाखिल किया गया था, लेकिन दस्तावेजों की जांच के ही वाद को अस्वीकृत कर दिया गया था. उसके विरुद्ध उनके द्वारा 2024 में डीसीएलआर के पास अपील वाद दाखिल किया गया था. उस मामले में डीसीएलआर की ओर से सीओ को नियम के अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था. उसके बाद कर्मचारी धर्मेंद्र कुमार और अनिल कुमार पंथ द्वारा दाखिल-खारिज करने के लिए 10 हजार रुपये की मांग की गयी. नहीं देने पर कागजात फेंक दिये गये. उसी क्रम में 14 जनवरी 2025 को दोनों राजस्व कर्मचारी द्वारा वादी को कार्यालय बुलाया गया. वहां सीओ पल्लवी गुप्ता द्वारा जाति सूचक शब्द का प्रयोग करते हुए वादी के साथ गाली गलौज की गयी. साथ ही डीसीएलआर का आदेश मानने से भी. इनकार कर दिया गया. तब वादी द्वारा जिलाधिकारी, डीसीएलआर, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग में सीओ, राजस्व पदाधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की गयी. कार्रवाई नहीं होने पर वादी की ओर से आरटीआइ के तहत जवाब मांगा गया. उससे खार खाये राजस्व पदाधिकारी विमल कुमार गुप्ता, राजस्व कर्मचारी धर्मेंद्र कुमार और अनिल कुमार पंथ द्वारा अंचल कार्यालय में जाति सूचक शब्द का प्रयोग करते हुए वादी के साथ गाली गलौज किया गया. शिकायत वापस लेने का दबाव दिया गया और माफी मंगवायी गयी. उसके बाद भी दाखिल-खारिज को अस्वीकृत कर दिया गया.
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