'भरत तिवारी को SDM ने दी थी जान से मारने की धमकी, इसीलिए खरीदी पिस्टल', ग्रामीणों ने किए कई खुलासे
Bharat Tiwari Encounter : भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. सीएम के ऐलान के बाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच कराए जाने की बात सामने आई है. गंगा कटाव पीड़ितों की आवाज बने भरत की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Bharat Tiwari Encounter : (नरेन्द्र प्रसाद सिंह) गंगा कटाव से उजड़े लोगों के हक की लड़ाई लड़ना भरत भूषण तिवारी को इतना महंगा पड़ गया कि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी. अब उनके एनकाउंटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सीएम सम्राट चौधरी द्वारा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच कराने के ऐलान के बाद मामला और गरमा गया है. गांव वालों ने खुले तौर पर पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया है और कई चौंकाने वाले दावे किए हैं.

गंगा कटाव से उजड़ा गांव, करोड़ों की योजना पर सवाल
दरअसल, शाहपुर थाना क्षेत्र के जवईनिया गांव में पिछले साल गंगा नदी के कटाव से आधे से अधिक घर बह गए थे. सैकड़ों लोग बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए थे. सरकार ने विस्थापितों के पुनर्वास और सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये जारी किए, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इस राशि में भारी गड़बड़ी की जा रही थी.
क्या बोले ग्रामीण
छठू चौधरी—प्रशासन पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त है. सरकार द्वारा लोगों की सुविधा के लिए जो राशि दी जाती है, प्रशासन उसे पचा जाने का हर संभव प्रयास होता है. यदि कोई इसका विरोध करता है, तो उसे निपटा देने की कोशिश किया जाता है.

मुकेश चौधरी— वह लड़का लोगों की सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा था. सरकार ने पैसे भेजे थे और उसका कहना था कि उन पैसों को ईमानदारी से उन्हीं लोगों पर खर्च किया जाए, जिनके लिए सरकार ने राशि भेजी है. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था.

जवईनिया से बिलौटी में बसाए गए करीब 70 परिवारों के लिए बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे थे. ग्रामीण महिलाओं के मुताबिक, भरत के प्रयासों से ही उन्हें बिजली और पानी मिल सका. क्षेत्र में विकास कार्यों की निगरानी कर रहे थे और 6 फीट गहरे गड्ढों को भरवाने की मांग कर रहे थे.
उपेंद्र गोंड— जगदीशपुर एसडीएम ने उसे मारने की धमकी दी थी. इसी कारण उसने अपने बचाव में पिस्टल खरीदी थी. घटना के समय थाना अध्यक्ष उसके दरवाजे से कुछ ही दूरी पर खड़े थे. अगर वह अपराधी होता, तो पुलिस पर गोली चला देता, लेकिन वह शांति से बात कर रहा था.

उमेश बिन—अगर प्रशासन भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ इसी तरह का व्यवहार करेगा, तो ऐसे सिस्टम का क्या मतलब रह जाएगा. भोजपुर के सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार चरम पर है. यहां बिना पैसे के कोई काम संभव नहीं है, अधिकारी और कर्मचारी खुलकर पैसे की मांग करते हैं.

प्रशासन से टकराव और धमकी के आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि इसी वजह से प्रशासन उनसे नाराज था. ग्रामीणों का आरोप है कि जगदीशपुर एसडीएम ने उन्हें धमकी भी दी थी. गांव वालों का कहना है कि भरत भूषण तिवारी किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए लड़ रहे थे. एक महिला ने रोते हुए कहा कि अगर समाज के लिए लड़ना पागलपन है, तो भरत पागल थे.
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर प्रताड़ना
बिलौटी गांव के लोगों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण प्रशासन लगातार उन्हें टॉर्चर कर रहा था. लोगों ने मांग की है कि सरकार द्वारा जारी राशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
एनकाउंटर पर उठे गंभीर सवाल
एनकाउंटर को लेकर भी ग्रामीणों ने कई सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि अगर भरत अपराधी होते, तो पुलिस पर हमला करते, लेकिन वे बातचीत कर रहे थे. कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि उन्हें पहले से जान का खतरा था, इसी वजह से उन्होंने आत्मरक्षा के लिए हथियार रखा था.
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साजिश के तहत हुई हत्या -ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने की वजह से ही उन्हें साजिश के तहत फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया. उनका कहना है कि भरत की वजह से गांव में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचीं और कटाव रोकने के काम में तेजी आई.
जांच के ऐलान से बढ़ी उम्मीदें
अब पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराए जाने के ऐलान के बाद लोगों को उम्मीद है कि सच सामने आएगा. वहीं, इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और एनकाउंटर की सच्चाई पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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By Ragini Sharma
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