भरत तिवारी एनकाउंटर मामला, परिवार के आवेदन पर अब तक कार्रवाई नहीं, निलंबित पुलिसवालों की जानकारी भी नहीं मिली
भरत तिवारी
Bharat Tiwari Encounter : आरा के बिलौटी गांव में हुए एनकाउंटर के बाद पुलिस कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. निलंबित पुलिसकर्मियों के नाम सार्वजनिक नहीं होने से पारदर्शिता पर संदेह गहराया है. परिजनों के आवेदन और प्राथमिकी को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है. ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है.
Bharat Tiwari Encounter : (नरेन्द्र प्रसाद सिंह) भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर के बाद पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. घटना के कई दिन गुजर जाने के बाद भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है और पुलिस की हर गतिविधि लोगों के बीच संदेह पैदा कर रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि जिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है, उनके नाम अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे पूरे मामले पर पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
पुलिस ने थानाध्यक्ष को छोड़कर अन्य अधिकारियों और जवानों को निलंबित करने की बात तो कही है, लेकिन केवल संख्या बताकर मामले को सीमित रखा गया है. आखिर किन-किन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है, यह अब भी रहस्य बना हुआ है. इसके साथ ही मृतक के परिजनों द्वारा दिए गए आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज हुई या नहीं, इस बारे में भी पुलिस की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

गांव से लेकर जिले तक गुस्सा
बिलौटी गांव ही नहीं, बल्कि पूरे भोजपुर जिले में इस घटना को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से घटना हुई और उसके बाद पुलिस का रवैया सामने आया, उसने लोगों के भरोसे को झटका दिया है. जवईनिया गांव से बिलौटी में बसे कई परिवारों ने खुलकर भरत तिवारी के पक्ष में अपनी बात रखी है. पुरुष और महिलाएं दोनों ही भरत को एक मददगार इंसान के रूप में याद कर रहे हैं. कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि भरत उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं थे.
हम बचाने जा रहे थे, पुलिस ने रोका
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के वक्त जब वे भरत को बचाने के लिए मौके की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. लोगों का कहना है कि अगर उन्हें जाने दिया जाता, तो शायद भरत की जान बच सकती थी. कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरी घटना योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई. उनका कहना है कि भरत तिवारी को जानबूझकर निशाना बनाया गया, क्योंकि वे लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे.

सामाजिक कार्यों को लेकर मिल चुका था सम्मान
ग्रामीणों के मुताबिक भरत तिवारी सिर्फ एक आम व्यक्ति नहीं थे, बल्कि समाज के लिए काम करने वाले लोगों में उनकी पहचान थी. उन्होंने कई बार प्रशासन से लड़कर इलाके में बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं दिलाने की कोशिश की थी. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उनके सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें पहले कई बार सम्मानित भी किया जा चुका था. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि जो व्यक्ति समाज के लिए काम कर रहा था, वह अचानक अपराधी कैसे बन गया.
क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलना गुनाह है
घटना के बाद गांव में एक बड़ा सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अब अपराध माना जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति प्रशासन की गलतियों के खिलाफ खड़ा होता है, तो उसे इसी तरह सजा दी जाएगी, यह डर अब लोगों में बैठता जा रहा है.
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पूरे मामले में अब पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है. लोग चाहते हैं कि पुलिस न सिर्फ निलंबित कर्मियों के नाम सार्वजनिक करे, बल्कि परिजनों के आवेदन पर क्या कार्रवाई हुई है, यह भी साफ करे. जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक इस एनकाउंटर को लेकर उठ रहे शक और लोगों का आक्रोश कम होता नजर नहीं आ रहा है.
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