आरा: दूसरे जिलों और राज्यों को बालू भेजने का विरोध तेज, जाम और प्रदूषण से लोग परेशान

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सांकेतिक तस्वीर

सोन नदी से हो रहे बेतहाशा बालू खनन और यातायात जाम से परेशान जिलेवासी अब बालू के बाहर भेजने पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं. जानें क्या है पूरा मामला...

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Arrah Son River Sand: भोजपुर जिले से सोन नदी का बालू बड़े पैमाने पर दूसरे जिलों और राज्यों में भेजे जाने को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे जिले में यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. लोगों ने जिले से बाहर बालू भेजने पर रोक लगाने और अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

जाम से रोजाना परेशान हो रहे लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि बालू लदे ट्रकों की लंबी कतारों के कारण जिले की प्रमुख सड़कों पर प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है. बिहटा-बिहिया स्टेट हाईवे, बिहटा-सहार-संदेश-सकड्डी स्टेट हाईवे, शाहपुर और कोईलवर समेत कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हो रहा है.

लोगों का कहना है कि जाम के कारण एंबुलेंस तक फंस जाती हैं. कार्यालय, विद्यालय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने वाले लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. इससे समय की बर्बादी के साथ मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है.

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर का दावा

लोगों का आरोप है कि सोन नदी में बड़े पैमाने पर बालू खनन किया जा रहा है और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों का पालन नहीं हो रहा है. उनका कहना है कि तटवर्ती क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में बालू का भंडारण भी किया गया है, जिससे भविष्य में खतरे की आशंका बनी हुई है.

स्थानीय लोगों के अनुसार अत्यधिक बालू खनन से प्रदूषण बढ़ रहा है, जलस्तर प्रभावित हो रहा है और कृषि पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है.

अवैध घाटों पर कार्रवाई की मांग

लोगों का कहना है कि सरकार राजस्व के लिए बालू घाटों की नीलामी करती है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर अवैध घाट संचालित होने की शिकायतें मिलती हैं. उनका आरोप है कि जानकारी होने के बावजूद ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है.

खनन के पर्यावरणीय प्रभाव पर चिंता

स्थानीय लोगों ने कहा कि अनियंत्रित खनन से वनों की कटाई, जैव विविधता को नुकसान, मिट्टी का कटाव, भूजल स्तर में गिरावट और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जिले को गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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Narendra Prasad Sin

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