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ठेका-संविदा पर बहाली कर सरकार कांट्रैक्ट लेबर सिस्टम को बढ़ावा दे रही

Updated at : 12 Feb 2026 6:23 PM (IST)
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ठेका-संविदा पर बहाली कर सरकार कांट्रैक्ट लेबर सिस्टम को बढ़ावा दे रही

चार नये लेबर कोड को रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर निकाली रैली

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आरा.

चार नये लेबर कोड को रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला शाखा भोजपुर के बैनर तले एक बड़ी रैली निकाली गयी. सेंट्रल ट्रेड यूनियन एवं सर्विस एसोसिएशन के आह्वान पर 12 फरवरी को राष्ट्रीय आम हड़ताल की घोषणा की गयी थी.

श्रम कानून में परिवर्तन, एनपीएस/ यूपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना को लागू करने जैसे कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को इस हड़ताल में शामिल रहने के कारण अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इस हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया गया था. इस अवसर पर बड़ी संख्या में सैकड़ों अराजपत्रित कर्मचारी जिला मंत्री विनोद यादव के नेतृत्व में दक्षिणी रमना मैदान स्थित रेडक्रॉस भवन से झंडे बैनर के साथ नारेबाजी करते हुए आंबेडकर मूर्ति गोलंबर होते हुए जेपी प्रतिमा के पास पहुंच कर सभा किये. सभा की अध्यक्षता जिला महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जुबैर आलम ने की. इस मौके पर मौजूद महासंघ के प्रदेश महासचिव सुबेश सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि नये चार लेबर कानून के जरिए सरकार कर्मचारी व मजदूरों के लोकतांत्रिक जनवादी अधिकारों को खत्म करने की साजिश रच रही है. विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है. कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन को समाप्त कर दिया गया है. कोरोना के नाम पर 18 माह के महंगाई भत्ते को रोक दिया गया. वर्तमान बजट में आठवें वेतन पुनरीक्षण के संबंध में कोई चर्चा नहीं होने से उसे लागू करने में संदेह है. सभा को महासंघ सहायता जिला मंत्री कुंदन कुमार, संयुक्त मंत्री कुमार बबलू, अरुण सिंह, सुरेश गोंड, रामाकांत सिन्हा ने संबोधित किया. नेताओं ने कहा कि एक तरफ सांसद-विधायक को पेंशन दिये जा रहे हैं, दूसरी ओर कर्मचारियों का पेंशन खत्म कर दिया गया है. कहा कि आज सरकारी विभागों में लाखों पद खाली है, जिस पर नियुक्ति नहीं हो रही है. स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे अन्य महत्वपूर्ण सेक्टर को संकुचित किया जा रहा है. नये रोजगार का सृजन नहीं हो रहा है. ठेका संविदा पर बहाली कर कांट्रैक्ट लेबर सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है. जिसपर रोक लगाने की जरूरत है. नेताओं ने मजबूती से नए श्रम अधिनियम को रद्द करने की मांग की. इस अवसर पर विनोद यादव, जुबैर आलम, कन्हैया यादव, प्रकाश सुमन, सुरेश गोंड, धनंजय कुमार, पंकज प्रदीप, सुमन कुमारी, आशा कुमारी, सुनीता कुमारी, उर्मिला यादव, अनिल तिवारी, प्रकाश दीप, मुकेश कुमार सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे.

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DEVENDRA DUBEY

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By DEVENDRA DUBEY

DEVENDRA DUBEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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