गिरा जलस्तर, पटवन में लग रहा दोगुणा समय

Updated at : 01 Apr 2025 11:57 PM (IST)
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गिरा जलस्तर, पटवन में लग रहा दोगुणा समय

गर्मी आने के साथ ही होने लगी परेशानी, मक्का की खेती पर हो रहा असर

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सिकटी.

प्रखंड क्षेत्र की जीवन रेखा कही जाने वाली प्रमुख व सहायक नदियां नुना, बकरा, घाघी, पहाड़ा आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं. नदियों के सूख जाने से हरियाली खतरे में गयी है. गर्मी प्रारंभ होने को है, ऐसे में अभी से ही नदियां सूख रही हैं, नदियों के सूखने के कारण किसान व पशु दोनों परेशान हैं. एक तरफ खेतों में मक्के की फसल लगी है, जिसको हमेशा नमी चाहिये. ऐसे समय में नदियों का सूखना किसानों के लिए संकट पैदा कर रहा है.

खतरे की घंटी है जल स्तर का नीचे जाना, पटवन में लग रहा है दोगुणा समय

गर्मियों के प्रारंभ होने के साथ ही जलस्तर का नीचे गिरना खतरे की घंटी है. जबकि इस क्षेत्र में सिंचाई का प्रमुख श्रोत नदियों का जल है. भूगर्भ जलस्तर के नीचे जाने से सिंचाई के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले बोरिंग अपनी क्षमता से काफी कम पानी दे रहे हैं. इससे पटवन में दोगुने से भी ज्यादा समय लग रहा है. इससे पटवन की लागत बढ़ने लगी है. इतना ही नहीं छोटे तालाब सूख गये हैं, जिससे पशुओं के लिए भी पीने के पानी की समस्या उत्पन्न होने लगी है.

पटवन में लग रहा है घंटों समय

प्रखंड क्षेत्र के किसानों हरेंद्र नारायण सिंह, संतोष मंडल, कल्याण झा, मो जमाल, जार्जिश आलम सहित दर्जनों लोगों का कहना है कि खेती अब घाटे का सौदा होती जा रही है. एक तो खाद व बीज महंगे कीमतों पर खरीद कर खेती करना ऊपर से नदियां-पोखर सूखने से सिंचाई में परेशानी. जिले में बोरिंग एक मात्र सिंचाई के साधन है, लेकिन भूगर्भ जलस्तर गिरने से मशीन से कम पानी का निकल रहा है, जिससे पटवन में दो से ढाई गुना अधिक समय लग रहा है. खेत में पानी की कमी के कारण मक्का के दाने छोटे होने लगे हैं. इससे पैदावार में कमी आयेगी.

बारिश में उफान पर रहती हैं नदियां

प्रखंड क्षेत्र में बहने वाली नदियां जो नेपाल से भारतीय क्षेत्र में बहती हैं. ये नदियां बरसात के समय उफान के साथ बहती हैं. नदियां अपने साथ गाद व बालू लेकर आती है जिससे नदियाें का तल उथला होता जा रहा है. वहीं गर्मियों में ये नदियां नाले में तब्दील ही रही है. इससे नदियाें का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. प्रशासन द्वारा समय पर इन नदियों से सिल्ट व गाद की सफाई होती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती. इन नदियों के किनारे कइ गांव अवस्थित हैं, जहां ये खेतों के लिए सिंचाई का मुख्य स्रोत हैं.

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MRIGENDRA MANI SINGH

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