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28 करोड़ खर्च के बाद भी दो प्रखंडों के तीन लाख लोगों का पुल पर आवागमन का सपना नहीं हो पाया पूरा

Updated at : 18 Jun 2024 11:15 PM (IST)
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28 करोड़ खर्च के बाद भी दो प्रखंडों के तीन लाख लोगों का पुल पर आवागमन का सपना नहीं हो पाया पूरा

पड़रिया में पुल निर्माण का कार्य 12 वर्षों बाद 28 करोड़ खर्च करने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया

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प्रतिनिधि, अररिया/ कुर्साकांटा. बाढ़ की विभीषिका झेल रहे पड़रिया गांव के लोगों के लिये पड़रिया का पुल शामत बन कर ही आया है. लोगों की पथरायी आंखें इस बात का सबूत है कि इस बार की बाढ़ उनका सब कुछ बहा ले जायेगा. वर्ष 2012 से लेकर 2024 तक तीन चरणों में हो रहे पुल के निर्माण के दौरान पुल के पाइलिंग से निकाली गयी मिट्टी नदी में जमा हो गयी, इसके बाद नदी ने धारा बदल लिया, अब तक तीन स्थानों पर नदी धारा बदल चुकी है, ऐसे में पड़रिया में पुल निर्माण का कार्य 12 वर्षों बाद 28 करोड़ खर्च करने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया, यही नहीं पुल के किनारे बसे गांव के लोगों के खेत व घर पानी में समा गये, अब तो यहां के लोगों को यही लग रहा है कि यह पुल नहीं बल्कि हमारे लिये बाढ़ का मंजर लेकर आया है. लोगों का दर्द उनके जुबां से हो रहा था बयां. बकरा नदी के पड़रिया स्थित 7.79 करोड़ की लागत से निर्मित पुल बगैर आवागमन के ही मंगलवार को कागज की टुकड़ों की तरह बकरा नदी में समाहित हो गया. करोड़ों की लागत से निर्मित पुल का नदी के समाहित होने की सूचना मिलते ही पड़रिया नदी घाट पर लोगों की भीड़ लगी रही. सभी आपस में यही चर्चा करते रहे कि रात के अंधेरे में बगैर किसी मानक के निर्मित पुल पुलिया की कमोबेश एक जैसी ही स्थिति होती है. बता दें कि करीब 12 वर्ष पूर्व उक्त स्थल पर 08 करोड़ की लागत से पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ. नदी किनारे रह रहे ग्रामीण जो कि दशकों से बकरा की विनाशलीला के गवाह रहे हैं. उम्मीद जगी कि अब बकरा नदी के कटान से मुक्ति मिलेगी व यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगा. वहीं निर्मित पुल से जब बकरा नदी अपना मार्ग परिवर्तित कर लिया तो विभाग एक बार फिर पुल निर्माण कार्य को बढ़ाते हुए निर्माण कार्य में 07 करोड़ की राशि का इजाफा कर दिया गया. परिणाम हुआ कि पहली पुल के साथ दूसरी पुल का भी निर्माण हुआ, लेकिन बकरा नदी एक बार फिर रास्ता बदल लिया. जिससे निर्मित पुल बगैर औचित्य के ही खड़ी रही, लेकिन ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए स्थानीय विधायक विजय कुमार मंडल के सार्थक प्रयास से उक्त पुल के टेंडर में विभाग लगभग पांच करोड़ का इजाफा करते हुए 10 स्पेन वाली पुल निर्माण कार्य शुरू किया. पूर्व से तैयार दो पुल अपनी जगह पर तो खड़ी है, लेकिन बकरा नदी में समाहित पुल का निर्माण कार्य अभी तो पूर्ण रूप से समाप्त भी नहीं हुआ है. इसी बीच पुल का बरसात के पहली बारिश से नदियों में आयी पानी से बकरा नदी में समाहित हो गया. जिससे निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता, बगैर किसी मानक के पुल का निर्माण कार्य किए जाने सहित अधिकारियों की मनमानी की चर्चा जोरों पर रही. विभागीय अधिकारियों के मेहरबानी के कारण ही संवेदक बना रहा लापरवाह. अगर विभागीय अधिकारी के आंखों पर संवेदक की मेहरबानी का पर्दा नहीं पड़ता तो आज बकरा नदी पर बन रहा पड़रिया पुल नदी के गर्भ में नहीं समाता. जिस पुल पर आवागमन के लिए वर्षों से लोग प्रतीक्षारत हैं. आज सिखटी प्रखंड व कुर्साकाटा प्रखंड को जोड़ने वाला पड़रिया पुल अपने निर्माण के दौरान ही नदी के गर्भ में समा गया. बता दें कि स्कूल के निर्माण को लेकर स्थानीय विधायक विजय कुमार मंडल व सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने काफी मेहनत की थी. यही नहीं यह पुल जब बना तो पहली बार नदी का किनारा बाढ़ के कारण दूर हो गया, इसके बाद 07.79 करोड़ की लागत से नदी को किनारे तक को जोड़ने के लिये पुल का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन विभागीय लापरवाही व संवेदक की अनियमितता पूर्वक कार्य के कारण मंगलवार को पुल बकरा नदी के गर्भ में समा गया. उक्त पुल के निर्माण को लेकर हाल के दिनों में ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता को स्थानीय विधायक विजय कुमार मंडल ने ले जाकर कार्य दिखाया था. यह बात भी हुई थी कि बाढ़ से पूर्व पुल के और नदी के दोनों साइड में कटावरोधी कार्य किये जायेंगे, बहरहाल बातें तो बातें ही रह गयी ना तो कटावरोधी कार्य हीं हुआ ना हीं पुल के निर्माण को लेकर संवेदक ही जवाबदेह हुए. वहीं ग्रामीणों में शामिल पूर्व उप प्रमुख सिकटी दिनेश्वर मंडल ग्रामीण रमेश मंडल, विद्यानंद ततमा, ताराचंद यादव, कृपानंद मंडल, सहत लाल मंडल, जगत लाल मंडल, विजय मंडल, संजय मंडल, विनय मंडल सहित दर्जनों ग्रामीण पुल का नदी में समाहित होने की घटना की उच्च स्तरीय जांच सहित दोषी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है. डबल इंजन की सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला: अविनाश आनंद अररिया. डबल इंजन सरकार व उनके विभाग के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सिकटी के पड़रिया घाट में बना पुल. यह बातें राजद नेता सह अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश आनंद ने कही. सिकटी प्रखंड के बकरा नदी पड़रिया घाट में ग्रामीण कार्य विभाग अररिया द्वारा बनाये लगभग 08 करोड़ की लागत से बना पुल का ध्वस्त होना संबंधित निर्माण विभाग के पदाधिकारियों, संवेदक व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को दर्शाता है. पुल निर्माण में भारी अनियमितता बरती गयी, जिसका परिणाम है कि पुल बाढ़ का पहला पानी भी नहीं झेल पाया व आवागमन शुरू होने से पहले ही पुल नदी में समा गया. राजद नेता ने कहा कि इतनी बड़ी लागत से पुल का निर्माण होता है व पुल हल्की बारिश से नदी के थोड़ी बहाव में ही ध्वस्त होकर गिर जाना, पुल निर्माण के संवेदक व संबंधित विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही व उनके द्वारा निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग को दर्शाता है. अगर विभाग के पदाधिकारी व अभियंता द्वारा पुल निर्माण के दौरान कार्य का प्राक्कलन, ड्रॉइंग, डिजाइन व स्पेसिफिकेशन के अनुसार कार्य कराया जाता तो आज इतनी बड़ी पुल तास के पत्ते की तरह भरभरा कर गिर नहीं जाती. निश्चित तौर पर संवेदक ने भी निर्माण कार्य के दौरान पाइलिंग निर्माण में उसके गहराई छड़, सीमेंट में घोर अनियमितता की होगी, जबकि निर्माण के दौरान विभाग के अभियंताओं का कई बार निरीक्षण होता है, फिर यह घटना घटित होना पूरे राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता जागता सबूत है. श्री आनंद ने पुल ध्वस्त होने की घटना की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी पाये जानेवाले विभागीय अभियंता व संवेदक पर कड़ी कार्रवाई व पुल में लगे जनता के गाढ़ी कमाई की राशि को उनसे हीं वसूलने की मांग व उसी जगह पर बड़ी राशि की मज़बूत पुल के पुनः निर्माण की मांग की है. साहब लोगों से बहुत विरोध किये लेकिन किसी ने नहीं सुना, अंत में पुल बह ही गया पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2012 में शुरू हुआ. पहले पांच पाया का पुल बनाया गया, पूर्व विधायक स्व आनंदी प्रसाद यादव के कार्यकाल में पहले 05 पाया का पुल बनाया गया, लेकिन जब विजय कुमार मंडल विधायक बनें तो नदी अपनी धारा बदल चुकी थी तो उनके प्रयासों से पुन: 02 पाया बढ़ा दिया गया. सात करोड़ का पुल विधायक के प्रयास से 19 करोड़ का बन गया. पुल बना भी लेकिन पुन: नदी अपनी धारा बदल ली. इधर, पुन: सांसद व विधायक के प्रयास से नये पुल का निर्माण वर्ष 2021 में शुरू हुआ, लेकिन संवेदक के द्वारा जमकर अनियमितता बरती गयी. शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, विरोध किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, अंतत: पुल नदी की धारा में बह गया. मनोज कुमार मंडल, विधायक प्रतिनिधि, सिकटी. पुल निर्माण के लिये जो राशि खर्च की गयी वह बर्बाद हो गया शुक्रवार को एक घंटा पहले पुल जब नदी की धारा में बही तो मैं भी यहीं था, यह दृश्य देख दिमाग चकरा गया. 12 वर्ष पूर्व विधायक स्व आनंदी प्रसाद यादव के द्वारा ही पुल निर्माण की आधारशिला रखी गयी थी. इसके बाद विधायक विजय कुमार मंडल ने पुल निर्माण का जिम्मा उठाया, उन्होंने बेहतर प्रयास भी किया, करीब 20 करोड़ की राशि भी खर्च की गयी लेकिन पुल नहीं बन पाया, अभी तो बाढ़ का पानी आया भी नहीं, लेकिन पुल बह गया. अब तो यही लग रहा है कि पुल निर्माण के लिये जो भी राशि खर्च की गयी वह बर्बाद हो गया. अगर बोल्डर पिचिंग हो जाता] तो बच जाता पुल नये पुल का निर्माण कार्य 2021 में शुरु हुआ, एक साल तो ठीक रहा, लेकिन दूसरे साल जब नदी में पानी आया व पुल के द्वारा निकाले गये मिट्टी के नदी के बीच में होने के कारण नदी ने अपनी धारा बदल ली. हम लोगों के लाख कहने के बावजूद संवेदक व विभाग के कनीय अभियंता ने उनकी एक नहीं सुनी व मनमानी कार्य जारी रखा. ठीकेदार के कर्मी रात में ही काम करते थे, पाइलिंग का काम भी रात में ही होता था. पुल निर्माण से पहले नदी के दोनों तरफ बोल्डर पीचिंग की बात कही गयी थी, लेकिन वह भी नहीं हुआ. विधायक ने कर्मी को एप्रोच पथ भी बनाने कहा था, वह भी नहीं बना. अंतत: ग्रामीणों को बाढ़ के गर्भ में समाने के भरोसा छोड़ दिया. शंकर प्रसाद मंडल, वार्ड सदस्य, पंचायत कौआकोह. 2012 में जब पुल बना तो पहले 05 स्पैन का पुल करीब 08 करोड़ रुपये का बना, फिर नदी की धारा में पुल लाने के लिये दो स्पैन और जोड़ने के लिये लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च हुआ. लेकिन उस पुल को भी बकरा महराज छोड़ दिये, फिर पुल के बाद लगभग 500 मीटर पश्चिम पुन: नये पुल का निर्माण शुरू हुआ, यह पुल भी 08 करोड़ की लागत से बनना शुरू हुआ. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. पुल को सुखें में हीं बनाया गया, हम लोगों ने समझाया तो उन्होंने यह कह दिया कि इसी प्रकार से पुल निर्माण करने का सिस्टम है. अब बताइये कागज का घर भी पानी में गलता है यह पुल तो नदी में पानी आने से पहले सूखे में गल गया. विनय दास, पड़रिया

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