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संतों का लगा रहता है आना-जाना, नहीं है उनका कोई ठिकाना

Updated at : 11 Nov 2024 7:57 PM (IST)
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संतों का लगा रहता है आना-जाना, नहीं है उनका कोई ठिकाना

संत बहते निर्मल पानी की तरह

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संत बहते निर्मल पानी की तरह होते हैं: साध्वी श्री स्वर्ण रेखा फोटो-17-कार्यक्रम में मौजूद साध्वी श्री स्वर्ण रेखा जी व अन्य. प्रतिनिधि, फारबिसगंज शहर के तेरापंथ भवन के जय सभागार में तेरापंथ धर्म संघ के ग्यारहवें आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री स्वर्ण रेखा जी ठाणा चार की सन्निधि में मंगलभावना का कार्यक्रम ””अनुभव की मंगल स्वर, गूंजे घर-घर के रूप में रखा गया. जैन धर्म में सभी साधु संत चार महीने के चातुर्मास के लिए एक जगह पर स्थित होकर धर्म आराधना में लीन हो जाते हैं. तिन्नाणं तारयाणं के लक्ष्य को लेकर ये सभी महान आत्माए चातुर्मासिक प्रवास व बाकी आठ महीने विहार करते हैं. इस क्रम में गुरुदेव महाश्रमण जी की आज्ञा से 2024 का स्वर्ण रेखाजी ठाणा 4 का चातुर्मास फारबिसगंज में होना तय हुआ था. चातुर्मासिक मासिक कल की संपन्नता पर जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा फारबिसगंज की तरफ से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया. 2024 का चातुर्मास 15 जुलाई से लेकर 15 नवंबर तक है. 16 नवंबर को साध्वीवृन्द विहार करके चक्रदाहा जापेगे. कार्यक्रम की मंगल शुरुआत मंगलाचरण में वीतराग प्रभु के स्मरण द्वारा की गई. साध्वी श्री ने इन चार महीनो में जो भी शिक्षाएं व प्रेरणादायक कथनों की प्रस्तुति अनुभवी मंडल,सभा, महिला मंडल, युवक परिषद, कन्या मंडल व ज्ञानशाला के बच्चों के द्वारा दी गई. कार्यक्रम में सभी संस्थाओं के पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य व अन्य मौजूद थे. कार्यक्रम का कुशल संचालन कल्पना सेठिया ने किया व आभार ज्ञापन मुकेश राखेचा उर्फ बंटी ने किया. ——— खुटहरा में शिव गुरु परिचर्चा का आयोजन फोटो-16- शिव चर्चा में मौजूद शिव शिष्य व अन्य. प्रतिनिधि, कुर्साकांटा_ कुर्साकांटा पंचायत के खुटहरा राजपूत टोला वार्ड संख्या 12 में रविवार की संध्या शिव गुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया. आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में गुरु भाइयों -गुरु बहनों ने परिचर्चा व भजन प्रस्तुत किया. गुरु भाई देवीलाल महतो ने कहा कि मानव तृष्णा में हैं, जबकि सारा वस्तु इसी संसार में छोड़कर भगवान के घर जाना है. शिव शिष्यों ने लोगों से शिव को गुरु बनाने व शिव शिष्यता का पालन करने को कहा. गुरु भाई प्रेमकांत जी ने कहा कि 84 लाख योनि में भटक कर मानव शरीर प्राप्त होता है. लेकिन मनुष्य भावनाओं व भौतिक सुख के अधीन हो जाता है. कहा कि भावनाओं से ऊपर उठकर गुरु आदेशित मार्ग पर चलना चाहिए. गुरु भाई सुरेश यादव ने कहा कि गुरु महादेव के आदेशित तीन विधाओं का पालन करना चाहिए. गुरु भाई मणिकुमार झा ने कहा कि शिव से बड़ा गुरु कोई हो नहीं सकता, शिव सत्य हैं, आदि गुरु हैं, अनंत हैं. उन्होंने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान नहीं होता है व बिन ज्ञान के मनुष्य अधूरा है. मंच संचालन गुरु भाई रामकुमार गुप्ता ने किया.

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