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पंचायतों में खोजे जायेंगे टीबी के संभावित मरीज

Updated at : 11 Dec 2024 7:39 PM (IST)
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पंचायतों में खोजे जायेंगे टीबी के संभावित मरीज

वर्ष 2025 तक देश को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का है लक्ष्य

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टीबी मुक्त पंचायत निर्माण को लेकर चिह्नित पंचायतों में एसीएफ संचालित 44-प्रतिनिधि, अररिया जिले को टीबी मुक्त बनाने को लेकर विभागीय स्तर से जरूरी पहल की जा रही है. गौरतलब है की वर्ष 2025 तक देश को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है. इसे लेकर टीबी मुक्त पंचायत निर्माण की कवायद की जा रही है. टीबी मुक्त पंचायत निर्माण को लेकर जिले के सभी प्रखंडों के दो पंचायत पूर्व से चिह्नित हैं. जहां संभावित मरीजों की खोज के लिये सक्रिय रोगी खोज अभियान संचालित किया जा रहा है. इसके लिए प्रखंडवार कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया गया. ताकि सक्रिय रोगी खोज अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित कराया जा सके. जिला टीबी समन्वयक दामोदर शर्मा ने बताया कि जिले में सक्रिय रोगी खोज अभियान की सफलता को लेकर संबंधित कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. कर्मियों के प्रशिक्षण के उपरांत कुछ एक प्रखंडों के चिह्नित पंचायतों में अभियान शुरू भी हो चुका है. टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत सभी प्रखंड के दो पंचायत चिन्हित किये गये हैं. अभियान नरपतगंज प्रखंड के अचरा, पिठौरा, रानीगंज के बोहरा रामपुर, धामा जोकीहाट के काकन व गैरकी, अररिया के बांसबाड़ी व संदलपुर गैडा, फारबिसगंज के रामपुर दक्षिण व पोठिया, सिकटी के बेंगा व ठेंगापुर पिपरा, पलासी प्रखंड के कनखुदिया व पकड़ी, कुर्साकांटा के कुआड़ी व कुर्साकांटा पंचायत चिह्नित किये जाने की जानकारी उन्होंने दी.

प्रति एक हजार आबादी पर होगी 50 लोगों की जांच

जिला टीबी समन्वयक व निक्षय मित्र योजना के नोडल अधिकारी दामोदर शर्मा ने बताया कि चिह्नित पंचायतों में प्रति एक हजार आबादी 50 लोगों की टीबी जांच की जायेगी. इसमें दो या दो से कम मरीज मिलने सहित निर्धारित अन्य शर्तों को पूरा करने वाले पंचायत को टीबी मुक्त पंचायत घोषित करने की दिशा में जरूरी पहल की जायेगी. चिह्नित सभी पंचायतों में डोर-टू-डोर सक्रिय रोगी खोज अभियान संचालित किया जायेगा. इस क्रम में संभावित मरीजों को चिह्नित किया जायेगा. दूसरे दिन जांच के लिये सैंपल प्राप्त कर इसे नजदीकी डीएमसी में माइक्रोस्कोपिक जांच के लिए भेजा जायेगा.

आपसी समन्वय व सहयोग से होगा अभियान सफल

जिला यक्ष्मा रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ वाईपी सिंह ने बताया कि चिह्नित पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने की विशेष पहल की जा रही है. अभियान की सफलता को लेकर संबंधित कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया गया है। प्रखंड स्तर पर विभिन्न विभागीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते अभियान की सफलता को लेकर अधिकारी व कर्मियों को निर्देशित किया गया है।

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राजद नेता तेजस्वी यादव 18 को आयेंगे अररिया

42- प्रतिनिधि, फारबिसगंज

प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री व राजद नेता तेजस्वी यादव की यात्रा के चौथे चरण का आगाज मिथिला से होगा. सीमांचल होते हुए भागलपुर जायेंगे. राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ प्रदेश प्रधान महासचिव ई आयुष अग्रवाल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया की पूर्व उपमुख्यमंत्री सह राजद नेता तेजस्वी यादव की यात्रा के चौथे चरण में 15 दिसंबर से शुरू होगा जो 22 दिसंबर तक चलेगा. 15 दिसंबर-सुपौल, 16 दिसंबर- सहरसा, 17 दिसंबर- मधेपुरा, 18 दिसंबर-अररिया, 19 दिसंबर- किशनगंज, 20 दिसंबर- पूर्णिया, 21 दिसंबर -कटिहार, 22 दिसंबर- भागलपुर जायेंगे. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के कार्यकर्ता दर्शन कार्यक्रम के लिये जिलों में जगह भी तय कर ली गई हैं. इस मौके पर राजद नेता तेजस्वी यादव पार्टी के बूथ स्तर के कमेटी सदस्यों से मुलाकात कर संगठन के मजबूत व आगामी विधानसभा चुनाव पर चर्चा करेंगे.———

एसएसबी व नेपाल एपीएफ ने की संयुक्त गश्ती

43-प्रतिनिधि, सिकटी

भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एसएसबी व नेपाल एपीएफ के जवानों ने संयुक्त गश्ती वास्तविक स्थिति का जायजा लिया. इस संयुक्त गश्ती का एसएसबी 52 बटालियन के मजरख कंपनी के निरीक्षक मदनलाल व रंगेली बौका एपीएफ इंस्पेक्टर शरण बहादुर खड़का के नेतृत्व में टीम में 08 से 10 जवान शामिल होकर संयुक्त गश्ती कर नो मेंस लेंड पर अवस्थित पीलरों का अवलोकन किया. यह अभियान भारत-नेपाल सीमा के स्तंभ संख्या 164 के समीप चलाया गया. जानकारी अनुसार सीमा की सुरक्षा को लेकर अराजक तत्व से निपटने, सीमा से अवैध सामानों की तस्करी व रोकथाम सहित दोनों देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से संभावित खतरों से बचने के लिए सीमा की महत्वपूर्ण जानकारियां एक दूसरे से साझा की. अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बताया कि भारत-नेपाल का खुला बॉर्डर होने के नाते सीमा पर हर आने जाने वालों पर नजर रखना कठिन होता है. इसीलिए नेपाल एपीएफ़ व भारतीय जवान के सहयोग से हीं दोनों देश को ऐसे खतरों से बचाया जा सकता है. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान दोनों देश के नो मेंस लेंड पर बने पीलरों को सुरक्षित रखने, संभावित खतरों, संदिग्ध, असामाजिक तत्वों पर नजर रखने व दोनों देश की सीमा पर रह रहे आम लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के उद्देश्य से चलाया जाता है.

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