अररिया में उद्योग और स्वरोजगार को मिलेगी रफ्तार: डीएम विनोद दूहन ने बुलाई टास्क फोर्स की बैठक

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उद्योगों को बढ़ावा देने की तैयारी तेज, नरपतगंज व फारबिसगंज में भूमि चिह्नित करने का निर्देश

समीक्षा करते जिलाधिकारी | Prabhat Khabar Network

जिलाधिकारी विनोद दूहन ने बैंकों में लंबित ऋण आवेदनों के तत्काल निपटारे का निर्देश दिया है. नरपतगंज और फारबिसगंज में उद्योगों के लिए भूमि चिह्नीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी. जूट आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाएंगे.

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जिले में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से समाहरणालय सभाकक्ष में जिलाधिकारी (डीएम) विनोद दूहन की अध्यक्षता में 'उद्योग टास्क फोर्स' की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, बिहार लघु उद्यमी योजना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सहित कई केंद्रीय व राज्य स्तरीय योजनाओं के तहत विभिन्न बैंक शाखाओं में लंबित पड़े ऋण (लोन) आवेदनों की विस्तृत समीक्षा की गई और अधिकारियों को दो टूक निर्देश जारी किए गए.

बैंकों में लंबित लोन आवेदनों का तुरंत करें निपटारा, लापरवाही पर गिरेगी गाज

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी विनोद दूहन ने बैंक प्रबंधकों और विभागीय अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संबंधित बैंक लंबित ऋण आवेदनों का अविलंब निष्पादन सुनिश्चित करें.

"सरकार की इन कल्याणकारी व स्वरोजगार योजनाओं का मुख्य उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद युवाओं को समय पर आर्थिक मदद पहुंचाना है. बैंकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय न होने के कारण फाइलें अटकी रहती हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगली बैठक में श्रम अधीक्षक, सहकारिता पदाधिकारी, नाबार्ड के डीडीएम और सभी बैंकों के जिला समन्वयकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी ताकि समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट (मौके पर) समाधान हो सके." — विनोद दूहन, जिलाधिकारी, अररिया

नरपतगंज और फारबिसगंज में उद्योगों के लिए चिह्नित होगी भूमि

जिले को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए डीएम ने भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया:

  • भूमि का चिह्नीकरण: नरपतगंज और फारबिसगंज प्रखंडों में नए उद्योगों की स्थापना के लिए उपयुक्त और बड़े भूखंडों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी संबंधित अंचलाधिकारियों और उद्योग विभाग को सौंपी गई है.
  • विभागीय समन्वय: औद्योगिक विकास के लिए बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी आधारभूत सुविधाओं को समय पर बहाल करने के लिए सभी विभागों को एक साथ मिलकर (समन्वित रूप से) कार्य करने को कहा गया है.

सीमांचल के 'पीले सोने' (जूट) से चमकेगी किस्मत, जीविका को मिला जिम्मा

इस महत्वपूर्ण बैठक में अररिया और पूरे सीमांचल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होने वाली जूट (पटुआ) की खेती और उस पर आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर बेहद बारीक चर्चा हुई. डीएम ने इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. विस्तृत रिपोर्ट की मांग: जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) को निर्देश दिया गया कि वे जूट से तैयार किए जाने वाले विभिन्न आधुनिक उत्पादों (जैसे बैग, रस्सी, सजावटी सामान) का गहन अध्ययन करें और एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) प्रशासन को सौंपें.
  2. लोन की सुविधा: अग्रणी बैंक प्रबंधक (LDM) को जूट आधारित लघु व सूक्ष्म उद्योगों (स्टार्टअप्स) को प्राथमिकता के आधार पर आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने को कहा गया है.

बैठक में इनकी रही मुख्य उपस्थिति:

इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मुख्य प्रबंधक, वरीय उप समाहर्ता, जिला कृषि पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सहायक निदेशक (उद्यान) तथा जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सहित जिले के तमाम संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे.


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